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Shinde vs Thackeray: सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग की दलील- बहुमत परीक्षण कैसे किया जाये, यह तय करने के लिए हम स्वतंत्र है

Shiv Sena vs Eknath Shinde: चुनाव आयोग का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने पीठ से कहा, ईसीआई (ECI) का कामकाज पूरी तरह से अलग है और 10वीं अनुसूची के तहत स्पीकर की भूमिका से स्वतंत्र है।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Sep 27, 2022

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Election Commission delists 86 more non-existent registered political parties

Shiv Sena Eknath Shinde and Uddhav Thackeray Case: असली शिवसेना के मुद्दे पर एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे के बीच जारी खींचतान को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ अहम सुनवाई कर रही है। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद संविधान पीठ निर्णायक फैसला देगी कि 'असली' शिवसेना कौन है। इसके साथ ही ठाकरे के खिलाफ विद्रोह करने वाले शिंदे गुट के 16 विधायकों के भाग्य का फैसला होगा, और इससे यह भी तय होगा कि क्या मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को पार्टी से अयोग्य घोषित किया जाएगा?

सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की संविधान पीठ के समक्ष सुनवाई की शुरुआत में शिवसेना की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने जोरदार बहस की। उनके बाद शिंदे गुट की ओर से वरिष्ठ वकील नीरज किशन कौल ने कई दलीले पेश की। फिर गवर्नर और चुनाव आयोग ने भी मामले पर अपना पक्ष रखा। यह भी पढ़े-Shinde vs Thackeray: चुनाव चिन्ह किसी विधायक की संपत्ति नहीं... शिंदे खेमे के वकील ने दी दलील, लंच के बाद फिर शुरू होगी सुनवाई

चुनाव आयोग का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने पीठ से कहा, ईसीआई (ECI) का कामकाज पूरी तरह से अलग है और 10वीं अनुसूची के तहत स्पीकर की भूमिका से स्वतंत्र है। संसद ने संविधान के तहत अयोग्यता के बीच अंतर तय किया है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में अयोग्यता चुनाव आयोग की सिफारिश के आधार पर है और यह दसवीं अनुसूची के अधीन नहीं है।

शिवसेना की याचिका पर चुनाव आयोग का पक्ष रखते हुए दातार ने कहा, यदि राजनीतिक दल एक बड़ा समूह है, तो विधायक दल राजनीतिक दल के सदस्यों का सबसेट होता है जो निर्वाचित होते हैं और सदन का हिस्सा बनते हैं। आपके पास बिना विधायक दल के राजनीतिक दल हो सकते हैं, क्योंकि सभी राजनीतिक दलों के पास विधायक और सांसद नहीं होते हैं।

उन्होंने कहा, “चुनाव आयोग यह तय करने के लिए स्वतंत्र है कि वह बहुमत का परीक्षण कैसे करता है। चुनाव आयोग को शिकायत मिलती है, फिर सबमिशन होता है, फिर सबूत, हलफनामा और फिर इन्क्वारी किया जाता है।“ उन्होंने कोर्ट को बताया कि चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को नोटिस भेजा था, जिसका सदन की सदस्यता से कोई लेना-देना नहीं है।

दातार ने पहले ही दलील दी थी कि दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता की कार्यवाही एक अलग क्षेत्र में संचालित होती है और यह आधिकारिक मान्यता के लिए प्रतिद्वंद्वी गुटों के दावे को तय करने के लिए चुनाव आयोग की शक्ति को प्रभावित नहीं करती है।

दरअसल उद्धव ठाकरे गुट ने शीर्ष अदालत से शिंदे खेमे के असली शिवसेना के दावे पर फैसला लेने से चुनाव आयोग को रोकने की मांग की है।