
General Budget : मंदी से परेशान आभूषण उद्योग को राहत मिलने की उम्मीद
मुंबई. मंदी की मार झेल रहे आभूषण उद्योग को मोदी सरकार की दूसरी पारी के पहले बजट से ढेर सारी उम्मीदें हैं। आभूषण निमार्ताओं, निर्यातकों और जौहरियों को उम्मीद है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 2019-20 के बजट में ऐसे उपाय जरूर करेंगी, जिससे आभूषणों की न सिर्फ घरेलू मांग बढ़ेगी बल्कि निर्यात को भी प्रोत्साहन मिलेगा। इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन, ऑल इंडिया जेम एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल (जीजेसी) और जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (जीजेईपीसी) का कहना है कि सरकार की ओर से अनुकूल उपाय किए जाएं तो आभूषण उद्योग में बड़ी संख्या में लोगों के लिए रोजगार के अवसर खुल सकते हैं।
जीजेसी अध्यक्ष अनंथ पद्मनाभन ने कहा कि आभूषण उद्योग कई चुनौतियों से जूझ रहा है। आयात शुक्ल ज्यादा होने के चलते घरेलू बाजार में सोने की लागत ऊंची बैठ रही है। चालू खाता घाटे को नियंत्रित करने के लिए सरकार की ओर से सोना आयात पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाया गया है। 2019 में चालू खाते का घाटा जीडीपी के 2.50 प्रतिशत स्तर तक आ गया है। सोने पर आयात शुल्क घटाना चाहिए। इससे दो फायदे होंगे। पहला फायदा यह कि सोने की लागत कम होगी और दूसरा यह कि सोने की तस्करी पर अंकुश लगेगा।
घरों में पड़ा है 24 हजार टन सोना
पद्मनाभन के मुताबिक देश में लोगों के घरों में 24 हजार टन सोना पड़ा है। चालू खाते का घाटा कम करने के लिए सरकार को घरों में रखे इस सोने का इस्तेमाल करने के लिए सरकार को उपाय करने चाहिए। गोल्ड मॉनेटरी स्कीम (जीएमएस) में हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए प्रति घर 500 ग्राम सोना डिपॉजिट करने की छूट मिलनी चाहिए। साथ ही नगदी में आभूषण खरीद सीमा एक लाख रुपए तक बढ़ाई जानी चाहिए। जीजेसी के उपाध्यक्ष शंकर सेन ने कहा कि आभूषणों की बिक्री पर धारा 54 के तहत आयकर छूट का लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे आभूषण उद्योग को न सिर्फ संगठित करने में मदद मिलेगी बल्कि कारोबार में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
बुलियन बैंक से बढ़ेगा कारोबार
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (इब्जा) ने सर्राफा कारोबार के लिए बुलियन बैंक बनाने का सुझाव दिया है। इब्जा का कहना है कि बुलियन बैंक बनाने से आभूषण उद्योग को काफी सहूलियत हो सकती है। एसोसिएशन का सुझाव है कि बुलियन बैंक ने ग्राहकों को अपने खाते में भौतिक रूप में सोना रखने की छूट मिलनी चाहिए, ठीक वैसे ही जैसे कि बैंकों में पैसा जमा किया जाता है। बुलियन बैंक के माध्यम से घरेलू बाजार मांग पूरी करने के लिए आयात निर्भरता कम होगी। साथ ही इससे स्वर्ण मौद्रीकरण योजना को भी समर्थन मिलेगा। इब्जा के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता ने कहा कि रोजगार अवसर बढ़ाने और निर्यात प्रोत्साहन के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में ज्वैलरी पार्क बनाने चाहिए। इब्जा का सुझाव है कि सोने का सही भाव तय करने के लिए चीन के शंघाई गोल्ड एक्सचेंज की तरह का एक्सचेंज भारत में खोलना चाहिए। आभूषणों की हॉलमार्किंग की व्यवस्था चरणों में लागू करने के साथ ही डब्बा ट्रेडिंग पर अंकुश के लिए कमोडिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (सीटीटी) खत्म किया जाना चाहिए।
Published on:
05 Jul 2019 12:24 am
