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आंख के पास लगी गोली, खुल गई खोपड़ी, महाराष्ट्र में फायरिंग अभ्यास के दौरान मेजर की गोली से JCO की मौत

Maharashtra Army News: महाराष्ट्र के पुलगांव स्थित सेंट्रल एम्युनिशन डिपो (CAD) में फायरिंग अभ्यास के दौरान एक मेजर की गोली लगने से JCO सूबेदार मेजर ओम बहादुर खंड की मौत हो गई। घटना के बाद सेना और पुलिस दोनों मामले की जांच में जुटी हैं।

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मुंबई

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Imran Ansari

May 16, 2026

Maharashtra Army News

महाराष्ट्र में फायरिंग अभ्यास के दौरान मेजर की गोली से JCO की मौत ( AI PHOTO )

Army Firing Practice Accident:महाराष्ट्र के पुलगांव स्थित सेना के सेंट्रल एम्युनिशन डिपो (CAD) में फायरिंग प्रैक्टिस के दौरान एक दर्दनाक घटना सामने आई है। यहां तैनात सेना के मेजर ने कथित तौर पर एक जूनियर कमीशंड ऑफिसर (JCO) को गोली मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। मृतक की पहचान सूबेदार मेजर ओम बहादुर खंड के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि घटना शुक्रवार सुबह फायरिंग अभ्यास के दौरान हुई।

रिपोर्ट के मुताबिक, मेजर मनन तिवारी की 5.56 मिमी INSAS राइफल से चली कई गोलियां सूबेदार मेजर ओम बहादुर खंड को लगीं। गोली उनकी आंख के पास लगी और उनकी खोपड़ी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। सेना ने शुरुआती तौर पर इस घटना को 'दुर्घटनावश हुई मौत' बताया है। जानकारी के अनुसार, घटना के समय सूबेदार मेजर ओम बहादुर खंड फायरिंग के बाद खाली कारतूस इकट्ठा कर रहे थे। तभी मेजर मनन तिवारी की राइफल से फायर हुआ। फिलहाल घटना के पीछे किसी तरह के मकसद का पता नहीं चल पाया है। मामले की जांच सेना और पुलिस दोनों कर रही हैं। वहीं, इस पूरी घटना को लेकर पुलिस का दावा है कि शुरुआत में उन्हें CAD परिसर में प्रवेश करने से रोका गया था। देर शाम तक मामले को औपचारिक रूप से वर्धा पुलिस को सौंपे जाने की प्रक्रिया जारी थी।

अभी सेना की हिरासत में हैं मेजर तिवारी

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, गोली का असर इतना तेज था कि सूबेदार खंड का सिर बुरी तरह फट गया और वे मौके पर ही जमीन पर गिर पड़े। शुरुआती जांच में उनके शरीर पर करीब 15 गोली लगने जैसे घाव मिलने की बात सामने आई है, जिससे घटना की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि फायरिंग रेंज में मौजूद अन्य जवानों ने तुरंत मेजर मनन तिवारी को काबू में कर लिया। फिलहाल मेजर सेना की हिरासत में हैं और पूछताछ के बाद उन्हें वर्धा पुलिस को सौंपे जाने की प्रक्रिया चल रही है। वहीं पुलिस का यह भी कहना है कि शुरुआत में उन्हें जांच के लिए सीएडी परिसर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई थी।