14 मई 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

‘दूसरों की गलती पर 25 लाख छात्रों को सजा नहीं’, NEET-UG 2026 रद्द करने के खिलाफ लीगल नोटिस

Legal notice against cancellation NEET: नीट-यूजी 2026 परीक्षा रद्द करने के फैसले को मुंबई के एक अधिवक्ता ने कानूनी नोटिस भेजकर चुनौती दी है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को भेजे गए इस नोटिस में पूरी परीक्षा रद्द करने को 'सामूहिक सजा' और 'असंवैधानिक' बताया गया है। अधिवक्ता ने प्रभावित छात्रों के लिए 10 करोड़ रुपये के राहत कोष और बेदाग छात्रों के परिणाम घोषित करने की मांग की है।

2 min read
Google source verification

मुंबई

image

Imran Ansari

May 14, 2026

Legal notice against cancellation NEET

Legal notice against cancellation NEET UG 2026

Cancellation NEET UG 2026:नीट-यूजी 2026 (NEET-UG 2026) परीक्षा को देशव्यापी स्तर पर रद्द करने का मामला अब कानूनी गलियारे में पहुंच गया है। मुंबई के न्यायिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता फैयाज आलम शेख ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA), शिक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) को एक कानूनी नोटिस जारी किया है। नोटिस में परीक्षा रद्द करने के फैसले को 'मनमाना, असंगत और असंवैधानिक' बताया गया है।

25 लाख छात्रों की ओर से कानूनी लड़ाई

सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) की धारा 80 के तहत यह नोटिस उन लगभग 25 लाख चिकित्सा उम्मीदवारों की ओर से भेजा गया है, जो 3 मई को आयोजित इस प्रवेश परीक्षा में शामिल हुए थे। यह कानूनी चुनौती NTA द्वारा 12 मई को जारी उस प्रेस विज्ञप्ति के बाद आई है, जिसमें कथित अनियमितताओं और कदाचार का हवाला देते हुए परीक्षा रद्द करने की घोषणा की गई थी।

नोटिस में उठाए गए मुख्य बिंदु:

  • सामूहिक सजा का आरोप: अधिवक्ता शेख का तर्क है कि 'दागी' (गलत काम करने वाले) और 'बेदाग' उम्मीदवारों के बीच अंतर किए बिना पूरी परीक्षा रद्द करना 'सामूहिक सजा' देने जैसा है। यह संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन है।
  • डेटा छिपाने का दावा: नोटिस में आरोप लगाया गया है कि NTA यह बताने में विफल रहा है कि वास्तव में पेपर लीक या गड़बड़ी का पैमाना क्या था और इसमें कितने परीक्षा केंद्र या छात्र शामिल थे।
  • सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांतों का हवाला: नोटिस में नीट-2024 से संबंधित सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का संदर्भ दिया गया है, जिसमें कोर्ट ने कहा था कि पूरी परीक्षा रद्द करने से पहले एक 'सिस्टमैटिक ब्रीच' (प्रणालीगत उल्लंघन) का स्थापित होना अनिवार्य है।
  • जांच से पहले जल्दबाजी: सवाल उठाया गया है कि किसी भी स्वतंत्र या केंद्रीय एजेंसी की जांच पूरी होने से पहले ही परीक्षा रद्द करने का फैसला क्यों लिया गया, जो पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।

नोटिस में की गई प्रमुख मांगें

कानूनी नोटिस में मांग की गई है कि परीक्षा रद्द करने के आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए और उन उम्मीदवारों के परिणाम घोषित किए जाएं, जो किसी भी तरह की गड़बड़ी या कदाचार से प्रभावित नहीं हैं। इसके साथ ही नोटिस में यह भी कहा गया है कि पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं से जुड़ी सभी जानकारी और डेटा सार्वजनिक किया जाए, ताकि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। प्रभावित छात्रों की मदद के लिए 10 करोड़ रुपये का राहत कोष बनाने की मांग भी उठाई गई है। इस कानूनी नोटिस के बाद अब केंद्र सरकार और NTA पर जवाबदेही का दबाव बढ़ गया है, क्योंकि उन्हें अदालत और लाखों छात्रों के सामने अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा।

बड़ी खबरें

View All

मुंबई

महाराष्ट्र न्यूज़

ट्रेंडिंग