2 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

महाराष्ट्र में 8000 करोड़ का एंबुलेंस घोटाला! मंत्री के रिश्तेदार की भरी जेब, कांग्रेस का बड़ा आरोप

Maharashtra Ambulance Scam: कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सरकारी खजाने को लूटने का काम धड़ल्ले से चल रहा है।

2 min read
Google source verification

मुंबई

image

Dinesh Dubey

Jan 13, 2024

devendra_fadnavis_mahayuti.jpg

महाराष्ट्र में महाघोटाले का आरोप

Maharashtra Corruption: महाराष्ट्र में कांग्रेस ने बड़े भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया है कि सरकारी एंबुलेंस के 4000 करोड़ के टेंडर को बढ़ाकर 8000 करोड़ कर दिया गया है। एकनाथ शिंदे सरकार ने सरकारी एम्बुलेंस से पैसा कमाने का उद्योग शुरू किया है। जो राज्य भर में गरीब और जरूरतमंद मरीजों का सहारा थी।

महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार ने मंत्री के रिश्तेदार और करीबी ठेकेदार की जेब भरने के लिए टेंडर को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया है। सरकारी खजाने को लूटने का सरकारी कार्यक्रम धड़ल्ले से चल रहा है। उन्होंने बताया कि इस टेंडर को रोकने के लिए मुख्यमंत्री से पत्र के माध्यम से शिकायत करेंगे। यह भी पढ़े-उद्धव ठाकरे को नहीं मिला राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का न्योता, तो चला बड़ा दांव! राष्ट्रपति को भेजा निमंत्रण

कांग्रेस नेता वडेट्टीवार ने कहा, राज्य में एंबुलेंस महाघोटाला सामने आया है। 8 हजार करोड़ का यह घोटाला है। सात दिन के शॉर्ट नोटिस पर टेंडर निकाली गई। 4000 करोड़ के काम को 8000 करोड़ का बताया जा रहा। इसमें मंत्रियों के रिश्तेदारों को काम मिला है।

विजय वडेट्टीवार ने दावा किया कि सरकार ने खुद यह काम एक ऐसे ठेकेदार को देने की कोशिश की है जो सरकार में कुछ नेताओं का पक्षधर है। गरीब मरीजों के लिए बनी इस योजना के टेंडर में आठ हजार करोड़ के बड़े घोटाले की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। सरकार अधिकारियों पर दबाव बनाकर ऐसा काम कर रही है।

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, केंद्रीय सतर्कता आयोग के नियमों के अनुसार, ठेकेदारों को निविदाओं के लिए प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए और काम की गुणवत्ता समान होनी चाहिए। इसके लिए टेंडर की अवधि कम से कम 21 दिन होनी चाहिए। जिससे ठेकेदार भाग ले सकें। लेकिन इन नियमों को दरकिनार कर 7 दिन में टेंडर जारी कर दिया गया। इसलिए इस घोटाले की जांच होनी चाहिए।