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‘एल्गोरिदम हमारा दर्द नहीं समझता’ 45 डिग्री गर्मी में भी सड़कों पर दौड़ रहे महाराष्ट्र के गिग वर्कर्स, लगा रहे 12 घंटे की शिफ्ट

Delivery Workers Struggle: मुंबई और पुणे में भीषण गर्मी के बीच जोमैटो-स्विगी के डिलीवरी पार्टनर्स घंटों धूप में काम करने को मजबूर हैं। राइडर्स का कहना है कि थोड़ी देर रुकने पर ऑर्डर और इंसेंटिव का नुकसान होता है, जबकि गर्मी से बचने का खर्च भी उन्हें खुद उठाना पड़ रहा है।

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मुंबई

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Imran Ansari

May 13, 2026

Maharashtra Heatwave

AI से बना प्रतीकात्मक फोटो

Maharashtra Heatwave:महाराष्ट्र में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच फूड डिलीवरी और गिग वर्कर्स की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। मुंबई और पुणे जैसे शहरों में तेज धूप और हीटवेव के बीच घंटों काम करने को मजबूर डिलीवरी पार्टनर्स का कहना है कि ऐप का 'एल्गोरिदम' उनकी तकलीफ नहीं समझता। मुंबई में 7 मई से IMD की ओर से येलो अलर्ट जारी है। ऐसे में 12 घंटे की शिफ्ट करने वाले जोमैटो राइडर तेजस पाटिल ने बताया कि अगर वे 5-10 मिनट भी पानी पीने या छांव में बैठने के लिए रुकते हैं, तो अगला ऑर्डर अपने आप कैंसिल हो सकता है। दो ऑर्डर कैंसिल होने पर दिनभर का इंसेंटिव भी खत्म हो जाता है।

जेब खर्च करना पड़ता है पैसे

डिलीवरी पार्टनर्स का कहना है कि गर्मी से बचने के लिए उन्हें अपनी जेब से अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। एक स्विगी राइडर ने बताया कि वह रोज करीब 200 रुपये सिर्फ सब्जा सीड्स, खीरा और जूस पर खर्च करता है, ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। जोमैटो के फाउंडर दीपिंदर गोयल के अनुसार डिलीवरी पार्टनर्स की औसत मासिक कमाई करीब 26,500 रुपये है, जो कटौतियों के बाद लगभग 21 हजार रुपये रह जाती है। ऐसे में गर्मी से बचाव का खर्च उनके लिए अतिरिक्त बोझ बन गया है।

'ग्राहक आते ही रेस्टोरेंट से निकाल देते हैं'

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक पुणे में काम करने वाले कई राइडर्स ने बताया कि शहर में दोपहर के समय आराम करने के लिए पर्याप्त पार्क या छायादार जगहें नहीं हैं। मुंबई में भी रेस्टोरेंट खाली होने पर ही उन्हें AC में बैठने दिया जाता है, लेकिन ग्राहक आते ही बाहर भेज दिया जाता है। एक स्विगी वर्कर ने बताया कि तेज गर्मी की वजह से उसे हीट-इंड्यूस्ड डायरिया हो गया और इलाज का पूरा खर्च खुद उठाना पड़ा। हालांकि कंपनियां बीमा और मेडिकल सुविधा देने का दावा करती हैं, लेकिन राइडर्स का आरोप है कि सामान्य इलाज का खर्च अक्सर कवर नहीं होता।

दिव्यांग डिलीवरी वर्कर्स ज्यादा परेशानी

सबसे ज्यादा परेशानी दिव्यांग डिलीवरी वर्कर्स को हो रही है। पुणे के गिरीश पाटेकर, जो बैटरी से चलने वाली व्हीलचेयर पर डिलीवरी करते हैं, ने कहा कि परिवार की जिम्मेदारी के कारण उन्हें तेज गर्मी, बारिश या ठंड-हर हाल में काम करना पड़ता है। वहीं एक अन्य दिव्यांग राइडर प्रमोद पावड़े ने कहा, “हीटवेव में हालत और खराब हो जाती है। धूप में ज्यादा देर रहने से डिहाइड्रेशन, चक्कर और थकान होती है, लेकिन ऐप का एल्गोरिदम हमारा दर्द नहीं समझ सकता।”

कंपनियों का दावा

वहीं जोमैटो और स्विगी जैसी कंपनियों का कहना है कि वे डिलीवरी पार्टनर्स के लिए पानी, छांव, वॉशरूम और मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध करा रही हैं। जोमैटो ने 14 शहरों में 2500 राइडर्स के लिए कूलिंग वेस्ट का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की बात कही है, जबकि स्विगी ने ग्लूकोज वाले ड्रिंक्स और कूलिंग वेस्ट बांटने का दावा किया है। हालांकि कई राइडर्स का कहना है कि उन्हें ऐसी कोई सुविधा नहीं मिली। महाराष्ट्र सरकार ने भी हीटवेव के दौरान आउटडोर वर्कर्स के लिए पानी, ORS और काम के समय में बदलाव जैसी सलाह जारी की है, लेकिन यह SOP मुंबई और पुणे जैसे बड़े शहरों पर लागू नहीं होती।