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महाराष्ट्र में फिर पांव पसार रहा लंपी वायरस, लातूर में 145 मवेशियों की मौत, किसानों की चिंता बढ़ी

Maharashtra Lumpy Disease Second Wave: महाराष्ट्र के कई जिलों में पशुओं में लंपी वायरस के लक्षण देखने को मिल रहा है. लातूर जिले के साकोल और रानी अंकुलगा इलाके में कई जानवर इससे पीड़ित मिले है. अब तक 13 पशुओं की मौत भी हो चुकी है।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

May 21, 2023

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महाराष्ट्र में लंपी वायरस की दूसरी लहर शुरू?

Lumpy Skin Disease Update: महाराष्ट्र में एक बार फिर लंपी वायरस के मामले बढ़ रहे है। जिस वजह से किसानों की चिंता बढ़ गई है। पिछले साल राज्यभर में मवेशियों में लंपी बीमारी का बड़ा प्रकोप देखने को मिला था। उसके बाद सरकार ने बड़े पैमाने पर मवेशियों का टीकाकरण (Vaccination) अभियान चलाया, जिससे लंपी वायरस नियंत्रण में आ गया। लेकिन अब फिर से मवेशी लंपी त्वचा रोग की चपेट में आ रहे।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, महाराष्ट्र के कई जिलों में पशुओं में लंपी वायरस के लक्षण देखने को मिल रहा है। लातूर जिले के साकोल और रानी अंकुलगा इलाके में कई जानवर इससे पीड़ित मिले है। अब तक 13 पशुओं की मौत भी हो चुकी है। यह भी पढ़े-महाराष्ट्र: 2022 में लंपी वायरस बना मवेशियों की जान का दुश्मन, 11 हजार से ज्यादा की मौत

महाराष्ट्र में आठ महीने पहले इस बीमारी की चपेट में आने से 11 हजार से ज्यादा मवेशी काल के गाल में समा गए थे। लिहाजा सरकार ने भी इसे गंभीरता से लिया और इसे फैलने से रोकने के लिए तमाम उपाय किए। लातूर जिले के साकोल और रानी अंकुलगा गाँवों में मवेशियों में लंपी वायरस फैलने की संभवना है। साकोल पशु चिकित्सालय के अंतर्गत 13 मवेशियों की मौत होने की खबर है और 16 गंभीर रूप से बीमार हैं। इससे पशु चिकित्सा विभाग की भी चिंता बढ़ गई है। अधिकारियों की टीम प्रभावित गांवों का दौरा कर रही है। लेकिन स्थिति काबू में आती नहीं दिख रही हैं।

इसके साथ ही जिले के शिरूर अनंतपाल तालुका में दर्जनों मवेशी इस ढेलेदार त्वचा रोग (एलएसडी) से ग्रसित हो गये है। अब तक यहां 702 मवेशी लंपी रोग की चपेट में आ चुके हैं। जबकि 64 पशुओं की मौत की सूचना है। 567 पशु इस बीमारी से ठीक हुए है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहां वर्तमान में लंपी वायरस से 102 मवेशी पीड़ित हैं।

3 महीने में 1236 मवेशी संक्रमित

लंपी वायरस की पहली लहर के दौरान लातूर जिले के सभी क्षेत्रों में टीकाकरण अभियान चलाया गया था। टीकाकरण की शुरुआत के बाद महामारी पर नियंत्रण पा लिया गया था। लेकिन मार्च महीने के बाद कुछ जगहों पर फिर से इसका प्रकोप शुरू हो गया। नवजात बछड़ों की मृत्यु दर सबसे अधिक होती है। जिन जानवरों को पहले टीका लगाया गया है उनकी मृत्यु नहीं हो रही है। लेकिन जिन पशुओं का टीकाकरण नहीं हुआ है, वह लंपी बीमारी की वजह से मर रहे हैं। इसलिए प्रशासन ने एक बार फिर से टीका लगाने का निर्णय लिया है।

मार्च महीने से अब तक जिले में 1236 नए लंपी वायरस से संक्रमित मवेशियों का पता चला है। इनमें से 145 पीड़ित मवेशियों की मौत हो चुकी है। बाकी इलाज के बाद ठीक हो गए हैं। सबसे ज्यादा मावेशियों की मौत शिरूर अनंतपाल तालुका में हुई है।