
महाराष्ट्र में फिर बढ़ीं दूध की कीमतें, प्रति लीटर 2 रुपये तक की बढ़ोतरी (Patrika File Photo)
Milk Price Hike in Maharashtra: महाराष्ट्र में दूध की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी होने जा रही है। ईंधन, पैकेजिंग सामग्री और दूध की खरीद लागत बढ़ने का हवाला देते हुए गाय और भैंस के दूध के बिक्री मूल्य में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी करने का फैसला किया गया है। नए दाम 11 अगस्त 2026 से लागू होंगे। इसके साथ ही विभिन्न दुग्ध उत्पादों की कीमतों में भी 10 फीसदी तक की वृद्धि की जाएगी। इससे आम लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ना तय है।
राज्य के प्रमुख निजी और सहकारी दूध संघों से जुड़े दूध उत्पादक एवं प्रसंस्करण कल्याणकारी संघ के सदस्यों की बैठक शुक्रवार को पुणे जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ लिमिटेड, कात्रज डेयरी में हुई। संघ के अध्यक्ष गोपालराव म्हस्के की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में दूध की कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला लिया गया।
संघ के फैसले के लागू होने के बाद गाय के दूध की कीमत 60 रुपये से बढ़कर 62 रुपये प्रति लीटर हो जाएगी। वहीं, भैंस के दूध का दाम 76 रुपये से बढ़कर 78 रुपये प्रति लीटर होगा।
दूध के साथ-साथ पनीर समेत विभिन्न दुग्ध उत्पादों की कीमतों में भी 10 फीसदी तक की बढ़ोतरी किए जाने का फैसला लिया गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में दूध से बने उत्पाद खरीदने के लिए भी उपभोक्ताओं को अधिक पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं।
दूध की कीमत बढ़ाने के पीछे उत्पादन और परिवहन लागत में लगातार हो रही वृद्धि को प्रमुख वजह बताया गया है। संघ के मुताबिक, पिछले कुछ समय में डीजल की कीमत करीब 10 रुपये प्रति लीटर बढ़ी है। इसके अलावा चीनी के दाम में भी करीब 12 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि हुई है।
वहीं, पैकेजिंग सामग्री की लागत में 30 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। दूध की खरीद कीमत में भी वृद्धि हुई है। इन सभी वजहों से दूध के उत्पादन, पैकेजिंग और परिवहन पर होने वाला कुल खर्च काफी बढ़ गया है।
बैठक में राज्य की प्रमुख सहकारी और निजी डेयरियों के करीब 20 प्रतिनिधि शामिल हुए। इसमें दूध उत्पादन से जुड़ी बढ़ती लागत, दूध खरीद मूल्य, पैकेजिंग, परिवहन और अन्य खर्चों पर चर्चा की गई। इसके बाद दूध और दुग्ध उत्पादों के दाम बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
बैठक में कहा गया कि डीजल, पैकेजिंग सामग्री, चीनी और दूध खरीद की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर डेयरी कारोबार पर पड़ा है। उत्पादन से लेकर दूध को ग्राहकों तक पहुंचाने तक हर स्तर पर लागत बढ़ी है।
संघ का कहना है कि मौजूदा लागत को देखते हुए दूध उत्पादकों को उचित भुगतान सुनिश्चित करने के लिए बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी जरूरी हो गई थी।
Updated on:
08 Aug 2026 12:16 pm
Published on:
08 Aug 2026 11:53 am
