
महाविकास आघाडी का सीट शेयरिंग फाइनल
लोकसभा चुनाव 2024 में अब चंद महीने रह गए है। इसके लिए सभी राजनीतिक दल अपनी सियासी रणनीति को धार देने में लगे हुए हैं। महाराष्ट्र में भी बैठकों का दौर जारी है। इस बीच, वरिष्ठ नेता शरद पवार ने महाविकास आघाडी (एमवीए) गठबंधन में सीट शेयरिंग के फाइनल होने के संकेत दिए है।
एनसीपी (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) के संस्थापक शरद पवार ने कहा कि एमवीए के घटक दलों के बीच महाराष्ट्र में 39 लोकसभा सीट पर सहमति बन गयी है। उन्होंने बताया कि पांच-छह सीट पर अभी और चर्चा की जाएगी। मंगलवार को छत्रपति साहू महाराज से मिलने के बाद कोल्हापुर में शरद पवार ने पत्रकारों से बात की। यह भी पढ़े-महाराष्ट्र में मुस्लिमों को 5% आरक्षण देने की मांग, क्या शिंदे सरकार चलेगी विपक्ष वाली दांव?
विपक्षी दलों के बीच सीट के बंटवारे की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर पवार ने कहा, ‘‘39 सीट पर सहमति बन गयी है। हम बची हुई पांच-छह सीट पर चर्चा करेंगे।’’ लोकसभा सीटों के बंटवारे को लेकर कुछ दिन पहले महाराष्ट्र में ‘इंडिया’ अलायंस के नेताओं की बैठक हुई थी।
2019 महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद एमवीए का गठन हुआ था। एमवीए गठबंधन में कांग्रेस, एनसीपी (शरदचंद्र पवार) और शिवसेना (यूबीटी) शामिल है। जबकि तीनों दल इंडिया गठबंधन का भी हिस्सा है। वहीँ, प्रकाश आंबेडकर की वंचित बहुजन आघाडी समेत कुछ छोटे दल भी एमवीए का हिस्सा है।
‘महायुति’ का क्या है हाल?
इस बीच, लोकसभा चुनाव के लिए सीटों के बंटवारे को लेकर बीजेपी, शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी (अजित पवार) में भी खींचतान की ख़बरें आई। मालूम हो कि महाराष्ट्र में ‘महायुति’ में सत्तारूढ़ बीजेपी, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और एनसीपी अजित पवार गुट शामिल हैं।
हालांकि, देवेंद्र फडणवीस ने दावा किया है कि लोकसभा चुनाव के लिए महायुति का सीट आवंटन लगभग तय हो चुका है। फडणवीस ने कहा कि सत्तारूढ़ गठबंधन लोकसभा चुनाव में 40 से 42 सीटें जीतेगा।
महाराष्ट्र में लोकसभा की 48 सीटें हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के साथ गठबंधन में शिवसेना ने 23 सीटों पर चुनाव लड़ा था। इसमें बीजेपी को 23 और शिवसेना को 18 सीटों पर कामयाबी मिलीं।
बीजेपी के लिए महाराष्ट्र बेहद अहम
बीजेपी ने महाराष्ट्र की 45 लोकसभा सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। दरअसल उत्तर प्रदेश के बाद महाराष्ट्र में सबसे अधिक 48 लोकसभा सीटें हैं। वहीँ, उत्तर प्रदेश में लोकसभा की 80 सीटें हैं। इसलिए ये दोनों राज्य बीजेपी के लिए बेहद अहम हैं। इसके लिए खास रणनीति भी बनायीं गयी है।
गौरतलब हो कि शिवसेना और एनसीपी दोनों दल दो धड़ों में बंट चुके है और उनका एक-एक गुट अधिकांश विधायकों के साथ सत्ताधारी महायुति गठबंधन का हिस्सा है।
2019 में कैसे थे नतीजे?
पिछले लोकसभा चुनाव में शिवसेना ने बीजेपी के साथ मिलकर 23 सीटो पर चुनाव लड़ा था। तब शिवसेना ने 18 सीट पर जीत हासिल की थी। वहीँ, कांग्रेस 25 जगहों पर लड़ी और महज एक सीट पर जीत दर्ज कर पाई थी। एनसीपी ने 19 सीटों पर चुनाव लड़ा और चार पर विजयी हुई। तब प्रकाश आंबेडकर की पार्टी वीबीए ने 48 में से 47 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था। हालांकि कोई सीट जीत नहीं सकी थी। पर वीबीए को करीब सात फीसदी वोट मिले थे।
वहीँ, राज्य में बीजेपी को करीब 28 फीसदी, शिवसेना को 23 फीसदी, कांग्रेस और एनसीपी को 16 फीसदी वोट मिले थे। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम को एक फीसदी से कम वोट मिला था, लेकिन एआईएमआईएम औरंगाबाद लोकसभा सीट जितने में कामयाब रही।
Published on:
21 Feb 2024 03:55 pm
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