
शिवसेना के 16 विधायकों की अयोग्यता मामले में SC ने विधानसभा स्पीकर को भेजा नोटिस
Supreme Court Eknath Shinde Uddhav Thackeray: शिवसेना में अंदरूनी कलह (Shiv Sena Crisis) के बाद महाराष्ट्र में उपजे राजनीतिक संकट पर देश की शीर्ष अदालत कभी भी फैसला सुना सकती है। हालांकि पिछले कुछ दिनों से यह सवाल राज्य में सबसे ज्यादा कौतूहल का विषय बना हुआ है कि सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ का निर्णय आखिर आएगा कब?
सुप्रीम कोर्ट में महाराष्ट्र के सत्ता संघर्ष की सुनवाई 16 मार्च को पूरी होने के बाद मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। इसके बाद से पक्ष-विपक्ष समेत सभी की निगाहें नतीजों पर टिकी हुई हैं। इस मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एमआर शाह, कृष्ण मुरारी, हिमा कोहली और पीएस नरसिम्हा की पांच जजों की पीठ ने की। यह भी पढ़े-संजय राउत का केंद्र पर हमला, कहा- पुलवामा अटैक के लिए भाजपा सरकार पर दर्ज हो देशद्रोह का केस
एक दिन पहले आएगी फैसले की तारीख
रिपोर्ट्स के मुताबिक, संविधान पीठ द्वारा किसी बड़े मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद आमतौर पर फैसला आने में कम से कम एक महीने का समय लगता है। हालांकि फैसला सुनाने की अधिकतम अवधि की कोई गारंटी नहीं होती है। चूंकि महाराष्ट्र मामले की सुनवाई कर रहे एक न्यायाधीश के सेवानिवृत्त होने की तारीख नजदीक आ रही हैं, इसलिए आगामी कुछ हफ़्तों के अंदर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने की उम्मीद की जा रही है।
गौर करने वाली बात यह भी है कि सुप्रीम कोर्ट यदि महाराष्ट्र सत्ता संघर्ष पर अपना निर्णय सुनाएगा तो उसकी तारीख कम से कम एक दिन पहले ही बता दी जाएगी। फैसले की यह तारीख अदालत की कार्य सूची में एक दिन पहले ही जोड़ा जायेगा। इसलिए महाराष्ट्र केस की तारीख का ऐलान फैसले से एक दिन पहले ही किया जाएगा।
कब आ सकता है फैसला?
जानकारी के मुताबिक, जिन पांच जजों की संविधान पीठ के सामने महाराष्ट्र मामले की सुनवाई हुई, उसमें से एक न्यायाधीश अगले महीने रिटायर हो रहे हैं। जस्टिस एमआर शाह 15 मई को सेवानिवृत्त होंगे। इसलिए 14 मई से पहले कभी भी महाराष्ट्र मामले पर फैसला आना तय माना जा रहा है।
इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट की गर्मी की छुट्टी (ग्रीष्मकालीन अवकाश) भी 20 मई से शुरू हो रही है. यानी 20 मई से 2 जुलाई तक सुप्रीम कोर्ट का अवकाश रहेगा। उधर, कानूनी हलकों में चर्चा है कि अप्रैल के आखिरी हफ्ते या मई के पहले हफ्ते तक महाराष्ट्र के सत्ता संघर्ष का फैसला आने की संभावना है।
कई संवैधानिक मुद्दे होंगे स्पष्ट!
मालूम हो कि महाराष्ट्र के सत्ता संघर्ष का आने वाला परिणाम कानूनी रूप से भी महत्वपूर्ण है। इस निर्णय का देश की सियासत पर बड़े परिणाम होंगे। इसलिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का बेसब्री से इंतजार हो रहा है। शीर्ष कोर्ट का फैसला क्या होगा, इसे लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। क्योकि इसमें मुख्य मुद्दा 16 विधायकों की अयोग्यता प्रक्रिया को लेकर भी है, जिसमें खुद सीएम एकनाथ शिंदे भी शामिल है। इसके अलावा पार्टी में विभाजन, विलय, दलबदल और नबाम रेबिया मामला जैसे संवैधानिक मुद्दों भी शामिल हैं। यह भी पढ़े-क्या है नबाम रेबिया मामला, जिसकी महाराष्ट्र मामले में हो रही चर्चा?
इस बीच, फरवरी में शिवसेना के चिन्ह और उसके अधिकार को लेकर जारी विवाद पर केंद्रीय चुनाव आयोग ने भी बड़ा फैसला सुनाया। हालांकि उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना गुट के लिए निर्वाचन आयोग का फैसला बड़ा झटका था। आयोग ने शिंदे नीत गुट को असली शिवसेना माना और पार्टी का ‘तीर धनुष’ का चुनाव चिन्ह उसे दे दिया था। तो अब देखना होगा कि सत्ता संघर्ष पर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला क्या होता है।
Published on:
15 Apr 2023 07:19 pm
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