
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण पर घमासान
मराठा आरक्षण के लिए संघर्ष कर रहे मनोज जरांगे पाटील (Manoj Jarange) ने महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे सरकार को चेतावनी दी है। शिंदे सरकार ने मंगलवार को मराठा समुदाय को दस फीसदी आरक्षण देने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी। हालांकि इस फैसले को मनोज जरांगे ने नकार दिया है और आंदोलन करने की चेतावनी दी है।
महाराष्ट्र विधानसभा के विशेष सत्र से पहले आज सुबह एकनाथ शिंदे की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक हुई। बैठक में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा दी गई रिपोर्ट को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। रिपोर्ट में मराठा समुदाय को दस फीसदी आरक्षण देने की सिफारिश की गई है। मराठा समुदाय की विभिन्न मांगों पर चर्चा के लिए आज (20 फरवरी) विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाया गया है। इसमें मराठा आरक्षण विधेयक पेश किये जाने की उम्मीद है। यह भी पढ़े-‘...तो फिर ओबीसी आरक्षण हो सकता है रद्द’, मनोज जरांगे की चेतावनी से मची खलबली
रिपोर्ट में क्या है?
महाराष्ट्र राज्य पिछड़ा आयोग के मुख्य न्यायाधीश शुक्रे ने यह रिपोर्ट कुछ दिन पहले राज्य सरकार को सौंपी थी। आयोग की सर्वेक्षण रिपोर्ट मराठा समुदाय की सामाजिक और वित्तीय स्थिति के बारे में है।
पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि मराठा समुदाय पिछड़ा हुआ है। राज्य में अभी मौजूदा लगभग 52 प्रतिशत आरक्षण में बड़ी संख्या में जातियाँ और समूह शामिल है। राज्य की बड़ी आबादी पहले से ही आरक्षित श्रेणी का हिस्सा हैं। ऐसे मराठा समुदाय, जो राज्य में 28 प्रतिशत है, को अन्य पिछड़ा वर्ग में रखना ठीक नहीं होगा।
मनोज जरांगे क्यों नाराज?
मराठा आंदोलन की अगुवाई करने वाले मनोज जरांगे ने कहा कि सरकार ने मराठों को धोखा दिया है। हमारी मांग नहीं मानी गयी तो हम आंदोलन करेंगे। हम कल से आंदोलन की दिशा तय करेंगे। हमने अलग से आरक्षण की मांग नहीं की, हमें ओबीसी कोटे से ही आरक्षण चाहिए। हमें राज्य सरकार का मराठों के लिए स्वतंत्र आरक्षण स्वीकार्य नहीं है, हमें ओबीसी के तहत ही आरक्षण चाहिए। अगर आज कोई समाधान नहीं निकला तो सरकार को पछताना पड़ेगा।
मालूम हो कि पिछले एक साल में चार बार मनोज जरांगे मराठा समुदाय को ओबीसी समूह के तहत आरक्षण दिलवाने की मांग को लेकर भूख हड़ताल कर चुके हैं। जरांगे सभी मराठों के लिए कुनबी प्रमाणपत्र मांग रहे है। कृषक समुदाय ‘कुनबी’ ओबीसी के अंतर्गत आता है। जिससे सभी मराठों को राज्य में ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण मिल सके।
बता दें कि महाराष्ट्र सरकार ने 2018 में सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए महाराष्ट्र राज्य आरक्षण अधिनियम लागू किया था जिसमें मराठा समुदाय को शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण देने का प्रावधान था। हालांकि, इसे बॉम्बे हाईकोर्ट ने सही ठहराया था। लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मराठा आरक्षण को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया था। यह भी पढ़े-छगन भुजबल के बगावती तेवर! मराठा आरक्षण के विरोध में छोड़ा मंत्री पद, फडणवीस ने कही बड़ी बात
Published on:
20 Feb 2024 12:35 pm

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