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Mumbai Triple Blasts Case: एक विशेष मकोका कोर्ट (MCOCA Court) ने 25 साल पुरानी अधिसूचना का हवाला देते हुए 2011 के मुंबई ट्रिपल ब्लास्ट के आरोपी की याचिका ख़ारिज कर दी है. आरोपी ने अपने केस से संबंधित दस्तावेजों के 1,800 पन्नों का अंग्रेजी में अनुवाद (Translation) करने की मांग की थी। कोर्ट स्पष्ट कहा कि सिर्फ मराठी (Marathi) ही मुंबई में आपराधिक अदालतों की भाषा है.
कोर्ट ने कहा, "मराठी इन्वेस्टीगेशन पेपर्स का अंग्रेजी में अनुवाद करना समय लेने वाला और महंगा है।" अपने मामले की पैरवी कर रहे आरोपी नदीम अख्तर (Nadeem Akhtar) ने कोर्ट को बताया कि वह केवल अंग्रेजी और उर्दू भाषा को अच्छे से जानता है। उसने दलील दी कि स्कूल में भी केवल दो साल ही मराठी पढ़ी थी। यह भी पढ़े-Maharashtra Crime: नंदुरबार में कुत्ते ने बिगाड़ा चड्डी-बनियान गैंग के चोरी का प्लान, सीसीटीवी में कैद हुई वारदात
आरोपी नदीम अख्तर की याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अधिसूचना के अलावा कहा कि अनुवाद की प्रक्रिया बेहद महंगी है। हालांकि कोर्ट ने सिटी सिविल एंड सेशंस कोर्ट (मुंबई) के कानूनी सेवा प्राधिकरण के पैनल से अधिवक्ता की सेवा देने की पेशकश की, लेकिन आरोपी ने इसे अस्वीकार कर दिया।
कोर्ट ने याचिका ख़ारिज करते हुए कहा “तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी चार्जशीट के साथ दायर किए गए आरोपपत्र और दस्तावेजों की अंग्रेजी अनुवादित प्रतियां उपलब्ध कराने के लिए राज्य के खिलाफ निर्देश नहीं मांग सकता है.” कोर्ट ने कहा कि यह मामला 2012 से लंबित है।
Published on:
24 Jul 2022 07:36 pm
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