
Maha Mhada Lottery: म्हाडा की मिल मजदूर लॉटरी में कहीं खुशी, कहीं गम
रोहित के. तिवारी
मुंबई. मुंबई में वर्षों से इंतजार कर रहे अपने घरों का सपना देखने वाले मिल मजदूरों के लिए रविवार का दिन सुखद रहा। हजारों मिल मजदूर बांद्रा स्थित म्हाडा मुख्यालय पहुंचे सुबह से ही कतारों में लग गए। म्हाडा मुख्यालय मजदूरों से खचाखच भरा था, हर मजदूर भगवान से प्रार्थना कर रहा था कि प्रभु आज मेरी लाज रखना, मुझे मकान दिलवाना, लेकिन प्रभु ने सबकी नहीं सुनी। लॉटरी खुलने के बाद जैसे ही नामों को डिस्प्ले किया गया, लोगों में अफरा तफरी मच गई। विशालकाय डिस्प्ले बोर्ड पर सभी की निगाहें टिक गईं।
निराश भाव से प्रांगण से निकल गए बाहर...
जिन मजदूरों के नाम लिस्ट में आ गए, वे खुशी से झूम उठे और उछल पडे। लेकिन कुछ अन्य मजदूरों के भाग्य में यह खुशी नहीं थी, जिनका नाम लॉटरी में नहीं आया, वे निराश हो गए और निराशा भाव में म्हाडा प्रांगण से बाहर निकल गए। मुख्यमंत्री उद्वव ठाकरे ने मिल मजदूरों को आवास उपलबध कराने के लिए लॉटरी निकाली थी। गृहनिर्माण मंत्री डॉ. जितेंद्र आव्हाड, पर्यावरण और पर्यटन मंत्री आदित्य ठाकरे, महापौर किशोरी पेडणेकर, सभापति विनोद घोसालकर, झोपडपट्टी पुनर्वसन के सभापति विजय नाहटा, म्हाडा के उपाध्यक्ष मिलिंद म्हैसकर, पूर्व राज्यमंत्री सचिन अहिर, नवाकाल की संपादिका जयश्री खाडिलकर आदि समेत म्हाडा के आलाधिकारी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
एसी चैंबर में छूट गए पसीने...
पनवेल के कोन में दो हजार घरों का निर्माण हो रहा है, जिनकी लॉटरी एक अप्रैल तक निकाले जाने की उम्मीद है। ठाणे में भी 90 एकड जमीन पर घरों के निर्माण किए जाने की संभावना है। म्हाडा के उपाध्यक्ष मिलिंद म्हैसकर ने बताया कि मुख्यमंत्री बनने के बाद ठाकरे ने म्हाडा के अधिकारियों की एक बैठक ली और एक मार्च तक मिल मजदूरों को घर देने के आदेश दिए। कम समय में हजारों घर का लक्ष्य सुनकर म्हाडा अधिकारियों के एसी चैंबर में पसीने छूट गए।
मजदूर नेता के हाथों लॉटरी...
लोग लगभग 125 साल पहले मुंबई आए थे। मुंबई एक जादुई शहर है, जो भोजन, कपड़े और कपड़ों की बुनियादी जरूरतों को पूरा कर सकता है, लेकिन यहां भवन निर्वाण की एक गंभीर समस्या है। वहीं मिल कार्यकर्ता मुंबई की पहचान है और संयुक्त महाराष्ट्र संघर्ष में उसके बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता। मुंबई में किफायती घर स्थापित करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी और मुंबई में 50 हजार किफायती घर स्थापित करने का लक्ष्य जल्द ही पूरा हो जाएगा। मुंबई गृहनिर्माण एवं क्षेत्रविकास मंडल (म्हाडा) की ओर से चौथे चरण के अंतर्गत मिल मजदूर और उनके वंशों (वारसांसाठी) के लिए मुंबई के मध्यवर्ती क्षेत्र के बॉम्बे डाईंग, स्प्रिंग मिल और श्रीनिवास मिल की जगह पर बनाए गए हजारों घरों की लॉटरी आज वांद्रे स्थित म्हाडा मुख्यालय में मुख्यमंत्री ठाकरे की उपस्थिति में और मजदूर नेता दत्ता इस्वलकर के हाथों निकाली गई।
साढे नौ लाख के घर में चाय के लिए जरूर बुलाएं : सीएम
मुख्यमंत्री ठाकरे ने कहा कि आज मैं भाषण के बजाय परिवार के एक प्रमुख के रूप में आपसे संवाद साध रहा हूं। मुझ पर मिल मजदूरों का ऋण है और इसी लिए वे आज यहां आए हैं। नया घर मिलने के बाद मुझे आप अपने घर चाय पिलाने के लिए बुलाईए, अपने घर में खुशी से रहें, नया घर मिलने के बाद उसे नहीं बेचें और मुंबई में रहने के अधिकार को भी नहीं खोएं। इन घरों की कीमत साढे नौ लाख रुपए आज ही निर्धारित की गई, जबकि इससे पहले मिल मजदूरों को मिलने वाले घरों की कीमत अधिक थी।
1 लाख 74 हजार 36 आवेदन आए थे...
पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे ने कहा कि सरकार बनते ही हमने ठान लिया था कि जब तक सभी का अपने घर का सपना पूरा नहीं होता, हम शांत नहीं बैठेंगे। महापौर श्रीमती पेडणेकर ने कहा कि मिल मजदूरों के दुख के दिन खत्म हो गए और सुख के दिन आ गए। वडाला स्थित बॉम्बे डाईंग मिल गृहप्रकल्प के अंतर्गत 720 घर, स्प्रिंग मिल स्थित 2 हजार 630 मकान और लोअर परेल स्थित श्रीनिवास मिल की जगह पर 544 मकान निर्मित किए गए हैं। 225 वर्ग फुट के वन बीएचके मकान अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस हैं। बॉम्बे डाईंग मिल गृह प्रकल्प की जगह पर 15 मंजिला वाहन पार्किंग का निर्माण किया गया है। मिल मजदूर एवं उनके वारिसदारों की ओर से लॉटरी के लिए कुल 1 लाख 74 हजार 36 आवेदन मिले थे।
सपना हुआ साकार...
वर्षों से मुंबई में अपने घर का सपना संजोए बैठी थी। जबकि मौजूदा समय में हम सांताक्रुज में किराए के घर में रह रहे हैं। वहीं आज लॉटरी में अपना नाम देखकर काफी खुशी हुई, लेकिन घर की कीमत काफी अधिक है, जो हमारे बस की बात नहीं है। जबकि अब लॉटरी में निकले घर के लिए राशि जुटाने को लेकर इधर उधर से कुछ व्यवस्था करनी ही पडेगी।
- अनिका अनंत मानवलकर, विजेता, श्रीनिवास मिल
बेहद मुश्किल होगा घर ले पाना...
इन घरों की कीमत बहुत अधिक है, जबकि हमें विकास के नाम पर पहले ही घरों से निष्कासित किया जा चुका है। इसके बावजूद हम किराए के घरों में रहने को मजबूर हो रहे हैं। अब अगर साढे नौ लाख रुपए की कीमत के घर होंगे तो हमारे लिए इतनी बडी धनराशि जुटा पाना बेहद मुश्किल होगा।
- विट्ठल रावजी सालुंखे, मिल मजदूर, बॉम्बे डाइंग
लोग मुंबई से बाहर जाने को मजबूर...
आज स्थिति ऐसी हो गई है कि मुंबई में रहने वाला व्यक्ति आज बाहर जाने को मजबूर हो रहा है। लोगों के पास रहने के लिए एक खोली तक नहीं है, जबकि मुंबई में ही रहने की लालसा के चलते उन्हें भारी किराया भी चुकाना पड रहा है। वर्षों बाद लॉटरी निकली भी, लेकिन इतने महंगे घर ले पाना, हमारे लिए दिक्कत भरा है।
- सूर्यकांत देशमुख, मिल मजदूर, स्प्रिंग मिल
मुंबई में हमारी जमीन...
वषों से मुंबई में ही हमारी जमीन है, इसके बावजूद हमें ही मुंबई से बाहर जाने का मजबूर होना पड रहा है। पहले तो मिल बंद हो गईं, बोला गया कि सभी का घर दिए जाएंगे और अब उन घरों की कीमत इतनी ज्यादा है कि लॉटरी लगना और न लगना कोई मायने नहीं रखता। भविष्य में भी हम मुंबई से बाहर जाना नहीं चाहते।
- अशोक धनावडे, मिल मजदूर, टेक्सटाइम मिल
Published on:
02 Mar 2020 12:33 pm
बड़ी खबरें
View Allमुंबई
महाराष्ट्र न्यूज़
ट्रेंडिंग
