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BMC चुनाव से पहले राज ठाकरे को झटका, अहम याचिका खारिज, गलत जानकारी देने पर पड़ी फटकार

राज ठाकरे की पार्टी का दावा था कि निर्विरोध चुनाव असल में निष्पक्ष तरीके से नहीं हुए हैं। राजनीतिक दबाव और डराने-धमकाने की वजह से विपक्षी उम्मीदवारों ने अपना नामांकन वापस लिया है। इस मामले में मनसे के नेता अविनाश जाधव ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Jan 14, 2026

Raj Thackeray Marathi Row

मनसे प्रमुख राज ठाकरे (Photo: IANS)

महाराष्ट्र में 29 नगर निगमों के चुनाव से पहले राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) को कानूनी मोर्चे पर बड़ा झटका लगा है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने मनसे नेता अविनाश जाधव (Avinash Jadhav) की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने की प्रक्रिया को चुनौती दी थी। अदालत ने न केवल याचिका खारिज की, बल्कि सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता द्वारा गलत जानकारी देने पर सख्त नाराजगी भी व्यक्त की।

राज ठाकरे के करीबी सहयोगी अविनाश जाधव ने याचिका में मांग की थी कि यदि किसी चुनाव में उम्मीदवार निर्विरोध चुना जा रहा है, तब भी वहां मतदान होना चाहिए। उनकी दलील थी कि मतदाताओं को 'नोटा' (NOTA) का विकल्प मिलना चाहिए ताकि वे अपनी असहमति दर्ज करा सकें।

निर्विरोध चुनाव निष्पक्ष नहीं हुए- मनसे

मनसे ने पिछले हफ्ते बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए आरोप लगाया था कि राज्य में सत्ताधारी पार्टी ने कई जगहों पर विपक्षी उम्मीदवारों को डराने, धमकाने और पैसे बांटने जैसी हरकतों के जरिए अपना नामांकन वापस लेने के लिए मजबूर किया। जिससे उनके प्रत्याशी निर्विरोध चुके गए हैं। इस तरह चुनाव की प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष नहीं रही और लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ है।

याचिका में दावा किया गया है कि चुनाव आयोग पर भाजपा नीत सरकार का दबाव है। इसलिए इस मामले की हाईकोर्ट की निगरानी में जांच की जाए और जब तक यह जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक उन 67 निर्विरोध जीते उम्मीदवारों के नतीजे रोक दिए जाएं।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान मनसे नेता के रुख पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा, याचिकाकर्ता ने सुबह दावा किया था कि यह याचिका पहले से लंबित याचिकाओं जैसी ही है। लेकिन जब सुनवाई शुरू हुई, तो उनके वकील ने इसे एक स्वतंत्र और अलग याचिका बताया।

जुर्माने से बचे, लेकिन याचिका हुई खारिज

इस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा, "आपने अदालत को गलत जानकारी दी। जब दोनों याचिकाओं में कोई समानता नहीं है, तो आपने ऐसा क्यों कहा? हम आप पर जुर्माना लगाएंगे और याचिका खारिज कर देंगे।"

हालांकि, कोर्ट ने जुर्माना तो नहीं लगाया, लेकिन तीखे शब्दों में फटकार लगाते हुए याचिका को खारिज कर दिया। अदालत के इस फैसले से अब राज्य में निर्विरोध चुने गए उम्मीदवारों को बड़ी राहत मिली है।

मुंबई की बीएमसी सहित महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं (नगर निगम) के लिए 15 जनवरी को मतदान होना है। ठाणे, कल्याण-डोंबिवली, पिंपरी-चिंचवाड़, जलगांव और छत्रपति संभाजीनगर जैसे शहरों में बड़े पैमाने पर निर्विरोध उम्मीदवार चुने गए।

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