
बीएमसी ने खराब प्लानिंग, बिना टेंडर के सौंपे काम: CAG
CAG Report on BMC: देश के सबसे अमीर नगर निगम बृह्नमुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की कार्यशैली पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने बड़ा सवाल उठाया है। महाराष्ट्र विधानसभा में शनिवार को डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने बीएमसी को लेकर कैग की रिपोर्ट पेश की, जिसमें नगर निगम में भ्रष्टाचार होने की ओर इशारा किया गया है। इतना ही नहीं कैग रिपोर्ट में बीएमसी द्वारा खराब योजना बनाने और पैसों का लापरवाही से उपयोग करने का भी आरोप लगाया गया है। हालांकि महाराष्ट्र सरकार ने कैग रिपोर्ट के आधार पर कुछ आरोपों के जांच के आदेश दे दिए है।
बीजेपी के वरिष्ठ नेता फडणवीस ने ट्वीट कर कहा, “बीएमसी में अकल्पनीय भ्रष्टाचार! बीएमसी में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के संबंध में विधानसभा में एक कैग रिपोर्ट पेश की। यह रिपोर्ट केवल एक ट्रेलर है क्योंकि अभी तक बहुत कम परियोजनाओं का ऑडिट किया गया है।‘ यह भी पढ़े-Mumbai: शक का चढ़ा ऐसा भूत, न बच्चा देखा न बुजुर्ग, पढ़ें ग्रांट रोड के ट्रिपल मर्डर का खौफनाक सच
कैग ने बीएमसी के काम करने के तरीके पर सवाल उठाते हुए अपनी रिपोर्ट में महानगरपालिका में पारदर्शिता और योजना की कमी के साथ-साथ लापरवाह तरीके से पैसों के इस्तेमाल और कोविड-19 प्रबंधन से जुड़ी जानकारी के साझा नहीं करने को रेखांकित किया है।
कैग रिपोर्ट बीएमसी के नौ विभागों द्वारा 28 नवंबर 2019 से 31 अक्टूबर 2022 के बीच खर्च किए गए 12,023.38 करोड़ रुपये की छानबीन के आधार पर तैयार की गई है। खास बात यह है कि 29 जून 2022 तक शिवसेना (यूबीटी) के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) राज्य के मुख्यमंत्री थे।
कैग रिपोर्ट में कहा गया है कि कई कार्य बिना टेंडर निकाले या उचित ठेकेदार को चुने बिना दिया गया जिनमें पम्पिंग स्टेशन का काम भी शामिल है। रिपोर्ट में कहा गया है कि करोड़ों रुपए के काम अपात्र ठेकेदारों को सौंपे गए। अंतत: संदिग्ध मंशा होने से इनकार नहीं किया जा सकता है।
कैग के ऑडिट में पाया गया कि बीएमसी ने बिना टेंडर आमंत्रित किए दो विभागों के करीब 214.48 करोड़ रुपये के 20 कार्य सौंपे, जो कि बीएमसी की कार्य निर्धारित प्रक्रिया और सतर्कता विभाग द्वारा तय दिशानिर्देशों के प्रावधानों के खिलाफ था।
इसके अलावा, बीएमसी के पांच विभागों में 4,755.94 करोड़ रुपये की लागत के 64 कार्यों में ठेकेदारों और बीएमसी के बीच कोई कॉन्ट्रैक्ट एग्रीमेंट नहीं किए गए थे। इस वजह से ठेकेदारों की ओर से चूक की स्थिति में बीएमसी ठेकेदारों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई करने में असमर्थ हो गई। इसके अलावा, तीन विभागों में 3,355.57 करोड़ रुपये की लागत वाले 13 कार्यों में ठेकेदारों द्वारा किये गए कामों की गुणवत्ता/मात्रा सुनिश्चित करने के लिए थर्ड पार्टी ऑडिटर नियुक्त नहीं किया गया था।
कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि महाराष्ट्र के महालेखाकार (ऑडटिट)-1 द्वारा बार-बार अनुरोध किए जाने के बावजूद बीएमसी ने कोविड-19 महामारी को रोकने और अन्य संबंधित कार्यों पर किए गए खर्च के दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए। इससे कैग को उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने से रोका गया। रिपोर्ट के मुताबिक बीएमसी ने महामारी अधिनियम का हवाला देते हुए 3538.78 करोड़ रुपये के खर्च की जांच की अनुमति नहीं दी। इस वजह से कोविड-19 के दौरान किये गए खर्च के हिसाब-किताब की जांच नहीं हो सकी।
Published on:
25 Mar 2023 07:11 pm
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