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Mumbai News: मास्को में ‘हिंदी-रूसी भाई भाई’ का नारा

'हिंदी-रूसी भाई भाई' ( 'Hindi-Russian Bhai Bhai' ), मास्को ( Moscow ) में आयोजित सम्मेलन दिया गया नारा, साहित्यकार लोकशाही अन्नभाऊ साठे ( Lokshahi Annabhau Sathe ) की वर्षगांठ पर कार्यक्रम, मुंबई यूनिवर्सिटी ( Mumbai University ) समेत देश भर के 357 प्रतिनिधियों ( 357 Delegates ) ने कार्यक्रम में की शिरकत

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Mumbai News: मास्को में 'हिंदी-रूसी भाई भाई' का नारा

Mumbai News: मास्को में 'हिंदी-रूसी भाई भाई' का नारा

मुंबई. साहित्यकार लोकशाही अन्नभाऊ साठे की वर्षगांठ पर रूसी लेखक अलेक्जेंडर पुश्किन और अफनासी निकितिन के जन्मदिन के अवसर पर रूसी लेखक 16 सितंबर को मुंबई यूनिवर्सिटी और रूस में पुश्किन राज्य रूसी भाषा विश्वविद्यालय में दो दिन का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें मुंबई विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रवींद्र कुलकर्णी, रूस में भारतीय राजदूत डी. बाला वेंकटेश वर्मा और पुश्किन यूनिवर्सिटी के रेक्टर डॉ. मार्गारेटा रुतसकाया मुख्य अतिथि थे। इन दौरान विश्व प्रसिद्ध भाषाविद् और पुश्किन विश्वविद्यालय के अध्यक्ष प्रो. विटाली कोस्टरमोव ने सभी को बधाई दी और 'हिंदी-रूसी भाई भाई' का नारा दिया। मास्को में आयोजित सम्मेलन में पूरे भारत के 357 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसमें मुंबई यूनिवर्सिटी के यूरेशियन विभाग के निदेशक डॉ. संजय देशपांडे, अंग्रेजी विभाग के प्रमुख शिवाजी सरगर समेत महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, हैदराबाद, दिल्ली, मध्य प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, यूएई, यूके, और अन्नाभाऊ साठे के अलावा कई प्रतिनिधियों के साथ सम्मेलन में हिस्सा लिया।

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मास्को में दो दिवसीय सम्मेलन...
लोकशाही अन्नभाऊ साठे, रूसी लेखक अलेक्जेंडर पुश्किन और अफनासी निकितिन तीनों महान साहित्यकारों के साहित्य इंडो रशियन साहित्य में परिलक्षित होती है। अफनासी निकितिन ने वास्को-द-गामा से सैकड़ों साल पहले 1469 में भारत की यात्रा की थी। वे भारत के पहले यूरोपीय यात्री थे। उनकी प्रतिष्ठित पुस्तक, बियॉन्ड थ्री सीजन्स को इस 550वीं वर्षगांठ के रूप में मनाया गया है। इन तीनों लेखकों ने मानवता और भाईचारे को प्राथमिकता दी है। अन्नाभाऊ साठे का काम केवल महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में श्रमिकों के राष्ट्रीय योगदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था। उन्होंने अपनी लेखनी से किसानों, मजदूरों, कमजोर तत्वों के लिए संघर्ष किया। लालबावटा, कलापथक, इप्टा के सांस्कृतिक आंदोलन में उनका काम महत्वपूर्ण था। भारत में अन्नाभाऊ साठे को मैक्सिम गॉर्की के नाम से भी जाना जाता है। उनके उत्कृष्ट साहित्य के चलते उनकी प्रसिद्धि सात समुद्र तक प्रख्यात हो गई, साथ ही उनके साहित्य का कई विश्व भाषाओं में अनुवाद भी किया गया है। ऐसे महान लेखकों के काम को श्रद्धांजलि देने के लिए मास्को में दो दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया गया था।

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