
सीनेट सदस्यों ने इसलिए उठाई सुरक्षा गार्डों के वेतन वृद्धि की मांग
मुंबई. मुंबई विश्वविद्यालय के सुरक्षा गार्डों को वर्दी और न्यूनतम मजदूरी का भुगतान सीनेट सदस्यों ने मांग की है। सीनेट सदस्यों ने आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी इस मामले में दुर्व्यवहार कर रहा है। मुंबई यूनिवर्सिटी को सौंपे गए संविदा सुरक्षा गार्डों को कोई सुविधा नहीं दी जा रही है, जबकि न्यूनतम वेतन 8 से 10 हजार तक ही दिया जा रहा है। वहीं इस मामले को लेकर कर्मचारियों ने औद्योगिक न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जिस पर कोर्ट ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला दिया है। हालांकि मुंबई यूनिवर्सिटी ने इसके विरोध में उच्च न्यायालय में अपील की है। वहीं औद्योगिक न्यायालय के निर्णय को ध्यान में रखते हुए, विश्वविद्यालय के प्रबंधन परिषद ने आदेश दिया कि इस संबंध में वेतन वृद्धि का निर्णय लिया जाए।
की जाए ठोस कार्रवाई...
विदित हो कि विश्वविद्यालय सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। इस पर सदस्य सुप्रिया करंडे ने औचित्य का मुद्दा उठाया और कहा कि आप अदालत में कर्मचारियों के खिलाफ लड़ने के लिए लाखों रुपये खर्च करते हैं, लेकिन उन्हें भुगतान करने के लिए आपके पास पैसे नहीं हैं। सीनेट सदस्य प्रवीण पाटकर और वैभव नरवडे ने भी इसकी पुष्टि की और मांग की है कि अब बगैर किसी आश्वासन के ठोस कार्रवाई की जाए। इस पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मामला उच्चतम न्यायालय में है और अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है। वहीं सदस्यों ने निर्णय लिया कि बिना आश्वासन के कोई बैठक आगे नहीं बढ़ेगी।
विधानसभा में भी उठा था सवाल...
उल्लेखनीय है कि उसके बाद रजिस्ट्रार डॉ. अजय देशमुख ने आश्वासन दिया कि अगले 15 दिनों में वित्त समिति की बैठक होगी, जिसके बाद इस महीने के अंत में प्रबंधन परिषद की बैठक आयोजित की जाएगी। इसके बाद बैठक शुरू हो सकी। मुंबई यूनिवर्सिटी ने सुरक्षा गार्ड का ओवरटाइम 16 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये कर दिया है, जबकि ऐसी सुविधा अन्य कर्मचारियों को सुविधा नहीं दी गई थी। विधानसभा में एक सवाल भी उठाया गया था। इस संबंध में अगली बैठक में उचित निर्णय लिया जाएगा।
Published on:
08 Nov 2019 12:12 pm
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