
निदा खान को ढूंढने के चक्कर में तोड़ दिया मेरा नया घर- हनीफ (Photo: IANS)
नासिक के बहुचर्चित टीसीएस (TCS) धर्मांतरण मामले में की गई बुलडोजर कार्रवाई अब कानूनी विवाद में फंसती नजर आ रही है। बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने छत्रपति संभाजीनगर नगर निगम (CSMC) की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि पहली नजर में ऐसा लग रहा कि तोड़क कार्रवाई में नियमों का पालन नहीं किया गया है।
मामला उस मकान से जुड़ा है जहां टीसीएस केस की आरोपी निदा खान कथित तौर पर छिपी हुई थी। नगर निगम ने 13 मई की सुबह बुलडोजर चलाकर उस घर समेत कई अन्य संरचनाओं को ध्वस्त कर दिया था। इसमें एआईएमआईएम पार्षद मतीन पटेल और स्थानीय निवासी हनीफ खान से जुड़ी संपत्तियां शामिल थीं।
अब 31 वर्षीय हनीफ खान ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि नगर निगम ने निदा खान और एआईएमआईएम नेता मतीन पटेल के चक्कर में उनके वैध नए मकान को ‘गलती’ से जमींदोज कर दिया।
हनीफ खान ने याचिका में कहा है कि उसने अपने रिश्तेदार के साथ मिलकर 600 वर्गफुट का मकान केवल दो महीने पहले खरीदा था। यह मकान छत्रपति संभाजीनगर के कौसर बाग इलाके में स्थित था।
हनीफ छोटे-मोटे निर्माण कार्य का काम करता है। उसने बताया कि परिवार की पूरी जमा पूंजी लगाकर उसने यह घर खरीदा था। कोर्ट में जमा दस्तावेजों के मुताबिक, हनीफ और उसके साले सैयद अफसर ने 12 मार्च को 27 लाख रुपये में रजिस्टर्ड सेल डीड के जरिए यह मकान खरीदा था।
हनीफ ने कहा, “यह हमारे परिवार का पहला खुद का घर था। जिंदगीभर किराए के घर में रहने के बाद हमने सोचा था कि अब अपना घर होगा। हम उसमें शिफ्ट होने से पहले मरम्मत कराने वाले थे, लेकिन सब खत्म हो गया।”
याचिका में हनीफ ने बताया कि एआईएमआईएम पार्षद मतीन पटेल से उसकी दोस्ती थी। मई के पहले सप्ताह में पटेल ने कुछ मेहमानों के ठहरने की बात कहकर कुछ समय के लिए मकान इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी थी।
हनीफ ने कहा, चूंकि मतीन पटेल स्थानीय पार्षद थे और पहचान के थे, इसलिए मैंने मना नहीं किया। बाद में पुलिस ने 8 मई को इसी घर से निदा खान को गिरफ्तार किया।
निदा खान उन टीसीएस कर्मचारियों में शामिल बताई जा रही है, जिन पर नासिक स्थित इकाई में यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण की कोशिशों से जुड़े आरोप लगे हैं। मामला दर्ज होने के बाद से वह फरार थी। उसे उसके परिवार के साथ हनीफ के उसी मकान में पकड़ा गया था, जिसे छत्रपति संभाजीनगर नगर निगम ने अवैध बताकर ढहा दिया है।
हनीफ खान ने आरोप लगाया कि नगर निगम ने पहले जो नोटिस घर पर चिपकाया था, वह मतीन शेख के नाम पर था, जिसे मतीन पटेल से जोड़कर देखा जा रहा है। बाद में अधिकारियों ने हाथ से हनीफ और उसके रिश्तेदारों के नाम नोटिस में जोड़ दिए।
यहां तक कि उन्हें दस्तावेज जमा करने के लिए केवल तीन दिन का समय दिया गया, जबकि इतने कम समय में सभी कागजात जुटाना संभव नहीं था। उन्होंने 15 दिन की मोहलत मांगी थी और साथ ही हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की थी।
हनीफ खान ने अदालत में आरोप लगाया कि 12 मई की सुनवाई के दौरान CSMC के वकील ने मौखिक रूप से कहा था कि सात दिन तक कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। लेकिन उसी दिन फिर से 24 घंटे का नोटिस चिपका दिया गया।
सबसे बड़ा आरोप यह है कि नोटिस की समयसीमा 13 मई दोपहर 12 बजे खत्म होनी थी, लेकिन उससे पहले ही सुबह बुलडोजर चलाकर मकान गिरा दिया गया।
सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने हनीफ खान और AIMIM पार्षद मतीन पटेल की याचिकाओं पर सुनवाई की। अदालत ने नगर निगम की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि रिकॉर्ड देखने पर ऐसा नहीं लगता कि प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया गया। अदालत ने साथ ही कहा कि महाराष्ट्र में बुलडोजर कल्चर को प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, यह उत्तर प्रदेश या बिहार नहीं है। हालांकि, नगर निगम का कहना है कि जिन संरचनाओं को गिराया गया, वे अवैध थीं और सभी जरूरी प्रक्रियाओं का पालन किया गया था। अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 जून को होगी।
Updated on:
20 May 2026 12:15 pm
Published on:
20 May 2026 12:13 pm
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