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लड़के के साथ बनाए अप्राकृतिक संबंध, कोर्ट ने 10 साल के लिए भेजा जेल, पनवेल स्टेशन पर हुई थी वारदात

महाराष्ट्र के एक रेलवे स्टेशन पर नाबालिग लड़के के साथ अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने के आरोप में अदालत ने एक व्यक्ति को दोषी ठहराया है। कल्याण की एक विशेष अदालत ने साल 2019 में नवी मुंबई के एक रेलवे स्टेशन पर 12 वर्षीय मासूम लड़के के साथ अप्राकृतिक यौनाचार (Unnatural Sex) करने के जुर्म में […]

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Mar 29, 2026

panvel station child rape case

पनवेल रेलवे स्टेशन पर लड़के से हैवानियत (Photo: Facebook/AI)

महाराष्ट्र के एक रेलवे स्टेशन पर नाबालिग लड़के के साथ अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने के आरोप में अदालत ने एक व्यक्ति को दोषी ठहराया है। कल्याण की एक विशेष अदालत ने साल 2019 में नवी मुंबई के एक रेलवे स्टेशन पर 12 वर्षीय मासूम लड़के के साथ अप्राकृतिक यौनाचार (Unnatural Sex) करने के जुर्म में एक व्यक्ति को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला बच्चों के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति को दोहराता है।

पॉक्सो एक्ट के तहत सुनाया फैसला

कल्याण कोर्ट के विशेष न्यायाधीश वी. ए. पात्रावले ने आरोपी श्रीनिवास रामन्ना रेड्डी को भारतीय दंड संहिता (IPC) की प्रासंगिक धाराओं और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत दोषी करार दिया। हालांकि, अदालत ने इस मामले में अपना फैसला 17 मार्च को सुनाया था, लेकिन फैसले की विस्तृत प्रति रविवार को जारी की गई। कोर्ट ने दोषी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जिसे मुआवजे के तौर पर पीड़ित बच्चे को दिया जाएगा।

पनवेल स्टेशन पर हुई शर्मनाक वारदात

विशेष लोक अभियोजक कादंबिनी खंडागेले ने अदालत को बताया कि यह घिनौनी वारदात 25 जून 2019 की रात को हुई थी। पीड़ित बच्चा एक बेघर नाबालिग था, जिसका फायदा उठाते हुए आरोपी श्रीनिवास ने उसे पहले नशीली दवा दी। फिर आरोपी बच्चे को बहला-फुसलाकर पनवेल रेलवे स्टेशन (Panvel Railway Station) के एक सुनसान और अंधेरे इलाके में ले गया, जहां उसने मासूम के साथ अप्राकृतिक यौन संबंध बनाये। बच्चे की बेबसी का फायदा उठाकर किए गए इस अपराध को कोर्ट ने बेहद गंभीर माना। मेडिकल जांच में भी मासूम बच्चे पर किए गए अत्याचार की पुष्टि हुई थी।

बच्चों की सुरक्षा पर उठे सवाल

इस शर्मनाक मामले ने एक बार फिर रेलवे स्टेशनों और सार्वजनिक स्थानों पर रहने वाले बेघर बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभियोजन पक्ष ने मजबूत गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर दोषी के खिलाफ आरोप साबित किया। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सख्त सजा से समाज में एक कड़ा संदेश जाएगा कि मासूमों के साथ दरिंदगी करने वालों को कानून किसी भी कीमत पर नहीं बख्शेगा।