
महाराष्ट्र की सियासत में शरद पवार के इस्तीफे का क्या होगा असर?
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के मुखिया शरद पवार ने मंगलवार को पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया। पवार के इस फैसले को पार्टी कार्यकर्ता और बड़े नेता मानने को तैयार नहीं हैं। सभी एक सुर में वरिष्ठ नेता से इस्तीफा वापस लेने की अपील कर रहे हैं।
बीते कुछ हफ़्तों से महाराष्ट्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष व शरद पवार के भतीजे अजित पवार को लेकर कई तरह की अटकलें लग रही है। ऐसे में शरद पवार का अचानक इस्तीफा देना विपक्षी एकता खासकर महाविकास आघाडी (एमवीए) गठबंधन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। जबकि बीजेपी को इससे फायदा होने की संभावना जताई जा रही है। यह भी पढ़े-शरद पवार के राजनीतिक संन्यास के ऐलान से महाराष्ट्र की राजनीति में खलबली, कार्यकर्ता हुए भावुक
बीजेपी के लिए खोली राह!
एनसीपी चीफ के पद से शरद पवार का इस्तीफा बीजेपी के लिए नई राह खोलेगा। महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में कयासों का बाजार गर्म है और कहा जा रहा है कि पूर्व डिप्टी सीएम अजित पवार बीजेपी के समर्थन से अपना मुख्यमंत्री बनने का सपना पूरा करेंगे। हाल के दिनों में अडानी और EVM मशीन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर पवार की टिप्पणी विपक्ष के रुख के विपरीत थी, जिसने अफवाहों को और बढ़ावा दिया।
सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ कभी भी शिवसेना में फूट से जुड़े मामलो पर अपना फैसला सुना सकती है। इसके हिसाब से सभी राजनीतिक दल विभिन्न परिदृश्यों की उम्मीद से तैयारी कर रहे हैं। यदि शिंदे के साथ गए शिवसेना के 16 विधायक (बागी) को सुप्रीम कोर्ट अयोग्य करार देता है तो मौजूदा शिंदे-फडणवीस सरकार अल्पमत में आ सकती है। ऐसे में महाराष्ट्र सरकार को बचाने के लिए अजित पवार बीजेपी का साथ दे सकते है।शरद पवार के बाद पार्टी का नेतृत्व अजित पवार को मिलने की चर्चा है।
एमवीए का अस्तित्व खतरे में!
महाराष्ट्र में विपक्षी महाविकास अघाडी के घटकों की एकता पर एनसीपी प्रमुख शरद पवार की 24 अप्रैल को की गई टिप्पणी ने राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी थी। यह पूछे जाने पर कि क्या एनसीपी, कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) की एमवीए 2024 का चुनाव साथ मिलकर लड़ेगी, पवार ने कहा था, “मिलकर काम करने की इच्छा है। लेकिन केवल इच्छा ही हमेशा पर्याप्त नहीं होती है। सीट आवंटन, और कोई मसला है या नहीं, इन सब पर अभी बात नहीं हुई है, तो मैं आपको कैसे बता सकता हूं।” पवार की इस टिप्पणी पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी, जबकि उद्धव गुट ने बचाव किया था। दरअसल शरद पवार ने ही एनसीपी, कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव गुट) का महाविकास आघाड़ी (एमवीए) गठजोड़ बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। यह भी पढ़े-महाविकास आघाडी में पड़ी दरार? शरद पवार के बयान से कांग्रेस नाखुश, उद्धव गुट ने कही बड़ी बात
MVA होगी कमजोर, बीजेपी को मिलेगा फायदा
शरद पवार को उलझी सियासी बिसात पर सही मोहरे चलकर बाजी पलटने में महारत हासिल है। जमीन से जुड़े बेहद अनुभवी नेता शरद पवार का सक्रीय राजनीति से दूर हटने का फैसला एमवीए को कमजोर करेगा। हाल के चुनाव नतीजों को देखें तो एमवीए गठबंधन ने शिंदे गुट-बीजेपी को कड़ी चुनौती दी है। लेकिन अब शरद पवार के सीधे तौर पर साथ नहीं होने से एमवीए की योजना विफल हो सकती है। हालांकि पवार द्वारा फेंकी गई यह गुगली अभी भी समझ से बाहर है। लेकिन माना जा रहा है कि इससे बीजेपी का जनाधार बढ़ेगा।
अभी कुछ बोलना जल्दी होगा- फडणवीस
शरद पवार के एनसीपी अध्यक्ष पद से इस्तीफे पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, यह शरद पवार का व्यक्तिगत और एनसीपी का आंतरिक मामला है। इस बात पर अभी कुछ बोलना जल्दी होगा। पवार साहब का फैसला एनसीपी का अंदरूनी मामला है। यह उनका निजी फैसला है। वह एक वरिष्ठ नेता हैं और उन्होंने कुछ फैसला किया है। उनकी पार्टी के भीतर कई मुद्दों पर मंथन चल रहा है। इसलिए इस पर प्रतिक्रिया देना हमारे लिए ठीक नहीं होगा। हम स्थिति पर नजर रखेंगे और एक-दो दिन बाद प्रतिक्रिया देंगे।
MVA पर फर्क नहीं पड़ेगा- नाना पटोले
पवार के एनसीपी अध्यक्ष पद से इस्तीफे पर महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा, “शरद पवार जी ने अपने अध्यक्ष पद से किस कारणवश इस्तीफा दिया है यह बताना मुश्किल है। हमें लगता था कि वे आखिरी सांस तक सामाजिक और राजकीय जीवन में रहकर एक विचारधारा के साथ लड़ेंगे लेकिन अब उनके इस फैसले से एमवीए को कोई फर्क नहीं पड़ेगा। हमें उम्मीद है कि एनसीपी का नया अध्यक्ष एमवीए के साथ रहेगा।“
शरद पवार ने आज क्या कहा?
एनसीपी के मुखिया के पद से अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए शरद पवार ने कहा कि उनकी राजनीतिक यात्रा 1 मई 1960 में शुरू हुई थी और पिछले 63 वर्ष से अनवरत जारी है। उन्होंने कहा, “इतने वर्षों में मैंने विभिन्न पदों पर रहते हुए महाराष्ट्र और देश की सेवा की है। मेरी राज्यसभा की सदस्यता का 3 वर्ष का कार्यकाल अभी बाकि है। इस दौरान मैं बिना किसी पद के महाराष्ट्र और देश के मुद्दों पर ध्यान दूंगा। 1 मई 1960 से 1 मई 2023 की लंबी अवधि में एक कदम पीछे लेना जरूरी है। इसलिए मैंने एनसीपी का अध्यक्ष पद छोड़ने का फैसला किया है।’’
मालूम हो कि शरद पवार एनसीपी पार्टी के सह-संस्थापक हैं। वर्ष 1999 में पवार ने पीए संगमा (PA Sangma) और तारिक अनवर (Tariq Anwar) के साथ मिलकर कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) के साथ कुछ पुराने विवाद को लेकर कांग्रेस से निकाले जाने के बाद एनसीपी पार्टी का गठन किया था।
पवार अपने राजनीतिक जीवन में चार बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री चुने गए। उन्होंने केंद्रीय रक्षा मंत्री और कृषि मंत्री के रूप में भी कार्य किया है। पवार की एनसीपी, कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव गुट) का महाविकास आघाड़ी (एमवीए) गठजोड़ बनाने में अहम भूमिका रही है।
Published on:
02 May 2023 07:24 pm
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