
बेटे पार्थ के साथ अजित पवार (Photo: IANS)
पुणे के चर्चित मुंढवा जमीन खरीद प्रकरण में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता पार्थ पवार को बड़ी राहत मिली है। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में उन्हें क्लीन चिट देते हुए जमीन सौदे में उनकी सीधी भूमिका साबित न होने की बात कही है। हालांकि, प्रक्रिया में शामिल दो सरकारी अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) विकास खरगे की अध्यक्षता वाली जांच समिति ने सोमवार को अपनी रिपोर्ट राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को सौंप दी। रिपोर्ट में कहा गया है कि जमीन सौदे में पार्थ पवार की सीधी अनियमितता साबित नहीं होती। हालांकि हवेली के तहसीलदार सूर्यकांत येवले और असिस्टेंट रजिस्ट्रार रविंद्र तारू की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। समिति ने दोनों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है। दोनों अधिकारियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है और वे फिलहाल जेल में हैं।
यह जमीन पुणे जिले के मुंढवा इलाके में स्थित है, जिसे अजित पवार और सुनेत्रा पवार के बड़े बेटे पार्थ पवार की ‘अमेडिया’ कंपनी ने खरीदा था। आरोप था कि करीब 1800 करोड़ रुपए बाजार मूल्य वाली जमीन मात्र 300 करोड़ रुपए में खरीदी गई और 21 करोड़ रुपए की स्टांप ड्यूटी भी माफ कर दी गई। मामला सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया।
विवाद बढ़ने पर तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने इस सौदे को रद्द करने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि उनके बेटे को इस सौदे के बारे में जानकारी नहीं थी, जबकि उनके पार्टनर ने सौदे को फाइनल किया था। हालांकि मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विस्तृत जांच के आदेश दिए थे। अब जांच रिपोर्ट राजस्व मंत्री को सौंप दी गई है।
बता दें कि लगभग 1800 करोड़ रुपए मूल्य की महार वतन जमीन को 300 करोड़ रुपए में खरीदे जाने के आरोपों की जांच कर रही समिति ने अपनी रिपोर्ट सोमवार को राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को सौंप दी। और जल्द ही इसे मुख्यमंत्री पार्टनर के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
इस मामले की जांच के लिए पिछले साल नवंबर में राजस्व सचिव विकास खारगे की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई थी। इस समिति ने सोमवार को अपनी जांच रिपोर्ट राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को सौंप दी। रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया है कि पार्थ पवार का मुंढवा जमीन सौदे से कोई संबंध नहीं है। वहीं, दो सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है। अब चंद्रशेखर बावनकुले यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सौंपेंगे। इसके बाद सीएम फडणवीस बड़ा एक्शन ले सकते हैं।
इस जमीन घोटाले में क्लीन चिट मिलने के बाद माना जा रहा है कि पार्थ पवार के राज्यसभा जाने का रास्ता साफ हो गया है। अजित पवार के निधन के बाद सुनेत्रा पवार ने राज्यसभा सदस्य पद से इस्तीफा देकर उपमुख्यमंत्री की शपथ ली थी। तब से यह चर्चा थी कि उस रिक्त सीट पर पार्थ पवार को भेजा जा सकता है।
हालांकि मुंढवा जमीन घोटाले के आरोपों के चलते पार्थ पवार की छवि पर सवाल उठे थे। ऐसे में यदि उन्हें सीधे राज्यसभा भेजा जाता, तो भाजपा की नैतिकता पर भी विपक्ष सवाल खड़े करता। लेकिन अब खरगे समिति द्वारा क्लीन चिट दिए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में यह अटकले लग रही है कि पार्थ पवार को जल्द ही राज्यसभा भेजा जा सकता है।
Updated on:
17 Feb 2026 02:38 pm
Published on:
17 Feb 2026 02:38 pm
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