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Maharashtra: संजय राउत को नहीं मिली जमानत, PMLA कोर्ट ने न्यायिक हिरासत 21 अक्टूबर तक बढ़ाई

Sanjay Raut in ED Custody in Money Laundering Case: ईडी का आरोप है कि संजय राउत ने कानून की नजर से बचने के लिए प्रवीण राउत के माध्यम से पर्दे के पीछे से सारा षड्यंत्र रचा। प्रवीण राउत इस मामले में सह-आरोपी है। राउत को अपराध की कुल आय का 3.27 करोड़ रुपये मिला।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Oct 18, 2022

Sanjay Raut in ED Remand till 4 August

4 अगस्त तक ईडी की कस्टडी में रहेंगे संजय राउत

Shiv Sena MP Sanjay Raut Money Laundering Case Patra Chawl Scam: मुंबई के पात्रा चॉल पुनर्विकास परियोजना (Patra Chawl Case) में कथित घोटाले के आरोपी शिवसेना (Shiv Sena) सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) को आज भी जमानत नहीं मिली। पीएमएलए (PMLA) कोर्ट ने शिवसेना सांसद संजय राउत की न्यायिक हिरासत 21 अक्टूबर तक बढ़ा दिया। साथ ही कोर्ट ने कहा कि उसके बाद राउत की जमानत याचिका पर फिर से सुनवाई होगी।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने संजय राउत के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है और इसी साल उन्हें अगस्त महीने में गिरफ्तार किया था। तब से शिवसेना नेता ईडी की हिरासत में है। ईडी ने राउत की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कोर्ट में दलील दी कि शिवसेना नेता ने पात्रा चॉल घोटाले में "सक्रिय रुचि" ली और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनकी संलिप्तता दिखाने के लिए जांच एजेंसी के पास सबूत है। यह भी पढ़े-Maharashtra News: कस्टडी में जाने से पहले संजय राउत ने लिखी चिट्ठी, कहा- मां, मैं जल्द आऊंगा, तब तक उद्धव ही तुम्हारा बेटा

ईडी ने उत्तरी मुंबई में पात्रा चॉल पुनर्विकास से संबंधित इस मामले में संजय राउत की जमानत याचिका पर अपनी दलीलें सोमवार को पूरी कीं। जिसके बाद कोर्ट ने सुनवाई एक दिन के लिए स्थगित कर दी थी। शिवसेना के राज्यसभा सदस्य राउत ने पिछले महीने विशेष धनशोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) कोर्ट से जमानत मांगी थी।

ईडी ने क्या कहा?

ईडी की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) अनिल सिंह ने राउत की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसी के पास 2011 के रिकॉर्ड हैं, जो बताते हैं कि राउत पात्रा चॉल परियोजना में शामिल थे। उन्होंने पूरी परियोजना में सक्रिय रुचि ली थी। सिंह ने दावा किया कि रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री इस केस में राउत की संलिप्तता को बताती है।


क्या है आरोप?

ईडी की जांच पात्रा चॉल के पुनर्विकास में कथित वित्तीय अनियमितताओं और उनकी पत्नी और सहयोगियों से जुड़े वित्तीय लेनदेन से संबंधित है। उपनगरी क्षेत्र गोरेगांव में 47 एकड़ में फैली पात्रा चॉल को सिद्धार्थ नगर के नाम से भी जाना जाता है और उसमें 672 किरायेदार परिवार रहते हैं। 2008 में म्हाडा ने एचडीआईएल की सहयोगी कंपनी गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड (जीएसीपीएल) को चॉल के पुनर्विकास का कॉन्ट्रैक्ट सौंपा। जीएसीपीएल को किरायेदारों के लिए 672 फ्लैट बनाने थे और म्हाडा को कुछ फ्लैट देने थे। इसके बाद जीएसीपीएल बची हुई जमीन बेचने के लिए स्वतंत्र था।

ईडी के अनुसार, पिछले 14 वर्षों में किरायेदारों को एक भी फ्लैट नहीं मिला, क्योंकि कंपनी ने पात्रा चॉल का पुनर्विकास नहीं किया, बल्कि अन्य को जमीन कुल 1,034 करोड़ रुपये में बेच दिया।

ईडी का आरोप है कि संजय राउत ने कानून की नजर से बचने के लिए प्रवीण राउत के माध्यम से पर्दे के पीछे से सारा षड्यंत्र रचा। प्रवीण राउत इस मामले में सह-आरोपी है। राउत को अपराध की कुल आय का 3.27 करोड़ रुपये मिला।