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फिजियोथेरेपिस्ट रेप-मर्डर केस: बॉम्बे हाई कोर्ट ने पलटा निचली अदालत का फैसला, फांसी की सजा की रद्द, रिहाई का आदेश

Vile Parle Physiotherapist Case: मुंबई के विले पार्ले में 2016 में 24 वर्षीय फिजियोथेरेपिस्ट से दुष्कर्म और हत्या के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने दोषी देबाशीष धारा की मौत की सजा रद्द कर दी।
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मुंबई

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Dinesh Dubey

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Updated: 8 Sep 2026, 12:40 PM IST

Mumbai Vile Parle Physiotherapist Case

विले पार्ले फिजियोथेरेपिस्ट हत्या-दुष्कर्म मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा फैसला (Photo: IANS/CCTV footage)

Mumbai Vile Parle Case Acquittal: मुंबई के विले पार्ले में करीब एक दशक पहले हुई 24 वर्षीय फिजियोथेरेपिस्ट से दुष्कर्म और हत्या के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को बड़ा फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने इस मामले में दोषी ठहराए गए सुनार देबाशीष धारा को सुनाई गई मौत की सजा को रद्द कर दिया है। हालांकि, अदालत के विस्तृत फैसले की प्रति सोमवार को उपलब्ध नहीं हो सकी।

यह फैसला न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति मंजुषा देशपांडे की खंडपीठ ने सुनाया। पीठ दोषी की ओर से दायर उस अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसने अपनी दोषसिद्धि और मौत की सजा को चुनौती दी थी। इसके साथ ही सत्र अदालत ने मौत की सजा की पुष्टि के लिए जो संदर्भ हाईकोर्ट को भेजा था, उस पर भी सुनवाई हो रही थी।

2016 में विले पार्ले में हुई थी वारदात

यह दिल दहला देने वाली घटना 5 दिसंबर 2016 की तड़के करीब 3 बजे विले पार्ले ईस्ट के श्रद्धानंद रोड स्थित एक चॉल में हुई थी। पीड़िता अपने घर के एक कमरे में सो रही थी। उसी दौरान एक पड़ोसी ने कमरे से धुआं निकलते देखा और उसके पिता को इसकी जानकारी दी।

पिता तुरंत वहां पहुंचे। कमरे का दरवाजा बाहर से बंद था। दरवाजा खोलने पर अंदर धुआं भरा हुआ था और कपड़े तथा किताबें जल रही थीं। पीड़िता के शरीर पर कपड़े नहीं थे और उसके गले में जींस बंधी हुई थी।

पुलिस के अनुसार, आरोपी पीड़िता के पड़ोस में ही रहता था और वहीं एक ज्वैलरी की दुकान में काम करता था। वारदात वाली रात वह शराब के नशे में था।

CCTV फुटेज से आरोपी तक पहुंची पुलिस, पश्चिम बंगाल से किया गिरफ्तार

जांच के दौरान पुलिस ने इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। जांच एजेंसी के मुताबिक, फुटेज के आधार पर देबाशीष धारा की पहचान हुई। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, आरोपी ने महिला को अकेले कमरे में देखा था और देर रात उसके कमरे में घुस गया। आरोप था कि उसने महिला के साथ दुष्कर्म किया और उसे प्रताड़ित करने के बाद गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद कमरे में मौजूद कपड़ों और किताबों में आग लगा दी।

2019 में सत्र अदालत ने सुनाई थी मौत की सजा

4 अक्टूबर 2019 को दिंडोशी सत्र अदालत ने देबाशीष धारा को दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ए. डी. देव ने अपने फैसले में कहा था कि आरोपी ने युवती के साथ दुष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या से पहले प्रताड़ित किया। अदालत ने पीड़िता को पहुंचाई गई चोटों को आरोपी के बेहद क्रूर व्यवहार का प्रमाण माना था।

अदालत ने इस अपराध को झकझोर देने वाला बताया था और इसे 'दुर्लभतम से दुर्लभ' श्रेणी का मामला मानते हुए मौत की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ देबाशीष ने बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील दाखिल की थी। हाई कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई के बाद मौत की सजा को रद्द कर दिया। फिलहाल इस मामले में विस्तृत आदेश आना बाकि है।