
(मुंबई): देश की राजधानी दिल्ली में जहां वाहनों की संख्या में इजाफा होने से वहां लोगों को सांस लेने में समस्या हो रही है, वहीं आर्थिक राजधानी मुंबई में भी दिन-प्रतिदिन बढ़ते वाहनों की संख्या से हो रहे प्रदूषण से मुंबईकरों की हालत भी दयनीय है। वायु प्रदूषण के मामले में मुंबई ने दिल्ली को भी पीछे छोड़ दिया है, जो बहुत ही चिंताजनक है।
जानकारों की मानें तो समुद्र तटीय क्षेत्र होने की वजह से मुंबई जैसे महानगर में प्रदूषण का स्तर आमतौर पर दूसरे महानगरों की तुलना में कम ही रहता था, लेकिन आज हालत चिंताजनक हो गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर का शहर होने के बावजूद मुंबई में इतनी खराब हवा का होना अफसोसजनक है। वहीं वायु की गुणवत्ता खराब होने के लिए वाहनों के प्रदूषण, निर्माण गतिविधियों और मौसम संबंधी कारकों को जिम्मेदार ठहराया है। इस लिहाज से देश की दोनों राजधानियों में अब लोगों को सांस लेना मुहाल हो गया है।
विदित हो कि ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सड़कों पर जहां एक करोड़ 7 लाख से भी ज्यादा वाहन दौडऩे नजर आते हैं, जिनमें 7 लाख से ज्यादा दो पहिया वाहन हैं, जबकि 32 लाख से अधिक कार हैं। वहीं आर्थिक राजधानी मुंबई में 33 लाख से ज्यादा वाहन सड़कों पर रोजाना दिखाई देते हैं, जिनमें दो पहिया वाहन 19 लाख 52 हजार से भी अधिक हैं और 9 लाख से भी ज्यादा कारें प्रतिदिन सड़कों पर नजर आती हैं।
मुंबई में 300 से अधिक एक्यूआई...
बहरहाल, विशेषज्ञों की मानें तो हवा में प्रदूषण का स्तर बढऩे से लोगों को सर्दी, जुकाम और वायरल इन्फेक्शन की शारीरिक समस्या होती हैं। खराब हवा से सबसे ज्यादा परेशानी एलर्जी और अस्थमा के मरीजों को होती है। जिन्हें सांस लेने में तकलीफ होती है, उन्हें ऐसे समय अधिक सतर्कता बरतनी चाहिए। ऐसी स्थिति में किसी भी तरह की शारीरिक परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें। वहीं जानकार बताते हैं कि ईरान और अफगानिस्तान की तरफ से धूल के कण भारत आ रहे हैं। इसलिए मुंबई की हवा प्रभावित हो रही है। ठंड शुरू होने से पहले हवा की गति धीमी होने से धूल के कण वायुमंडल में एक जगह से दूसरी जगह नहीं जा पाते। इससे आसमान में धुंधलापन छा जाता है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फॉरकॉस्टिंग (सफर) पूरी मुंबई की हवा 215 एक्यूआई रहा, जिसमें मझगांव व बीकेसी जैसे इलाकों में 300 से अधिक एक्यूआई के साथ यहां की हवा की गुणवत्ता खराब आंकी गई।
दिल्ली में एक्यूआई पहुंचा 330...
वहीं दिल्ली के पर्यावरण की बात करें तो ठंड बढऩे के चलते जलाए जा रहे अलाव को तत्काल रोका जाना चाहिए, अगर ऐसा नहीं हुआ तो दिल्ली समेत समूचे उत्तर भारत को गंभीर स्वास्थ्य जोखिम से जूझना पड़ेगा। इसके साथ ही राष्ट्रीय राजधानी के कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर काफी गंभीर है। हवा खराब होने का सबसे बड़ा कारण वाहनों के प्रदूषण, निर्माण गतिविधियों और मौसम संबंधी कारकों समेत कई कारकों को जिम्मेदार ठहराते हुए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने आने वाले दिनों में दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता के और खराब होने का पूर्वानुमान व्यक्त किया है। इसके अलावा दिल्ली का संपूर्ण वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 315 रिकॉर्ड किया गया।
शून्य और 50 के बीच एक्यूआई को ठीक माना जाता है, जबकि 51 और 100 के बीच इसे संतोषजनक, 101 और 200 के बीच मध्यम माना जाता है। वहीं 301 और 400 के बीच काफी खराब और 401 और 500 के बीच गंभीर स्थितियां सामने आती हैं। आंकड़ों की मानें तो आनंद विहार में एक्यूआई 358, द्वारका सेक्टर आठ में एक्यूआई 376, आईटीओ पर 295 और रोहिणी में एक्यूआई 330 दर्ज किया गया।
एक्यूआई है इस तरह...
- 0-50 अच्छा
- 51-100 संतोषजनक
- 101-200 सामान्य
- 201-300 खराब
- 301-400 बेहद खराब
- 401 अति गंभीर
(वायु में प्रदूषण का स्तर)
Published on:
19 Oct 2018 04:30 pm
