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Pune Heritage News : लोनावला जाएं तो देखें यादों का ‘हेरिटेज घर’ !

एंटीक वस्तुओं के संग्रह ( Collection ) ने दिलाई व्यास को अनूठी पहचान ( Identity ) शाही पोशाक के साथ विंटेज कारों, बग्घियों ( Baghhi ) में घूमना है शौक ( Interest ) लोनावाला ( Lonavala ) के रमेश सिंह व्यास (राजपुरोहित) ने पूर्वजों से मिली सौगातों-धरोहरों को संभाल कर रखा है

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मुंबई

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Binod Pandey

Jun 07, 2020

Pune Heritage News  : लोनावला जाएं तो देखें यादों का 'हेरिटेज घर' !

Pune Heritage News : लोनावला जाएं तो देखें यादों का 'हेरिटेज घर' !

ओमसिंह राजपुरोहित

पुणे. अतीत की धरोहर को सहेजना आज के दौर में न केवल कठिन, बल्कि महंगा सौदा साबित होता है। पर, जिन्हें इससे जुड़ाव और लगाव होता है, वे हर कीमत पर इनको संजोकर रखते हैं। महारष्ट्र के ख्यात हिल स्टेशन लोनावाला जाने पर एक व्यक्ति के जुनून, जज्बे और जोश से तैयार इस थाती को देख कर आप स्वत समझ जाएंगे कि बेजान वस्तुएं भी जीवंत रखी जा सकती हैं। लोनावाला के रमेश सिंह व्यास (राजपुरोहित) ने पूर्वजों से मिली सौगातों-धरोहरों को संभाल कर रखा है। चौंकाने वाली बात तो यह कि पूरा परिवार इन्हीं धरोहरों के बीच रहता है। इतना ही नहीं, दुर्लभ और अनूठी वस्तुएं आज भी इस्तेमाल की जाती हैं। व्यास ने बताया कि इस संग्रह की प्रेरणा उन्हें पिता देवीशंकर व्यास से विरासत में मिलीं। पत्रिका से बातचीत में व्यास ने कहा कि व्यक्ति की आमदनी अमरीकन जैसी हो, घर ब्रिटिशियर जैसा हो, घर में भारतीय नारी हो तथा भोजन जापानी जैसा हो तो इंसान लंबी आयु जीता है।

महकती है राजस्थानी माटी की सुगंध
राजस्थान में पाली जिले के बोया गांव से लोनावला आकर बसे व्यास परिवार के रमेश भाई ने पूर्वजों से विरासत में मिली ऐतिहासिक चीजों के महत्व को पहचाना। लोनावाला आने वाले पर्यटकों को उनकी इस नायाब सोच के बारे में जानकारी मिलती है तो वे स्वयं को रोक नहीं पाते। वे भी किसी को निराश नहीं करते और गौरवशाली इतिहास से सबको रू-ब-रू कराते हैं। किसी से कोई शुल्क तक नहीं लेते। दशकों से राजस्थान से दूर रहने के बावजूद वहां की माटी की सुगंध कभी फीकी नहीं पड़ी। घर और कारोबार के साथ पूरे परिवार के सदस्यों में राजस्थान का पूरा असर मिलता है।

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न परंपरा बदली, न शौक-पहनावा
दरबार और राजघरानों का दौर बीतने के बावजूद व्यास परिवार पूर्वजों की परंपरा निभा रहा है। वे आज भी उसी तौर-तरीकों के साथ जीने, पहनावा धारण करने, विंटेज कारों के साथ बग्घी चलाने और संग्रहित एंटीक वस्तुओं का उपयोग करने में यकीन करते हैं। अक्सर खास मौकों और समारोहों में शाही पोशाक और आभूषण पहन कर जाते हैं।

एक से बढ कर एक एंटीक चीजें
ब्रिटिश से खरीदे गए हेरिटेज भवन में रमेशसिंह परिवार के साथ रहते हैं। उनके घर में ही विदेशी विंटेज कारें, विंटेज बैलगाडिय़ां, घोड़ा गाडिय़ां, अनोखी पेंटिंग, सोना-चांदी, जवाहरात से जड़े आभूषण, फर्नीचर, प्यानो, ग्रामोफोन, घडिय़ां, शस्त्र, लाइब्रेरी, टाइपराइटर, टेलीफोन, केरोसिन पंखे, लैंप, क्रॉकरी, इत्र, कांच के बर्तन, रेडियो, ग्लोब, कैमरे, दूरबीन, छडिय़ां, कटारें, तलवारें आदि सहेज कर रखी गई हैं।