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GT Hospital में सफल रही स्पाइनल सर्जरी, चौथी बार में महिला को मिली राहत

जीटी अस्पताल ( GT Hospital ) में सफल रही स्पाइनल सर्जरी ( Spinal Surgery ), 3 बार निजी अस्पताओं ( Private Hospitals ) में ऑपरेशन के बावजूद महिला थी पीड़ित, महिला का गोकुलदास तेजपाल ( Gokuldas Tejpal ) से संपर्क रहा सफल, डॉक्टरों की टीम ने महिला को पहुंचाई स्थायी राहत

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GT Hospital में सफल रही स्पाइनल सर्जरी, चौथी बार में महिला को मिली राहत

GT Hospital में सफल रही स्पाइनल सर्जरी, चौथी बार में महिला को मिली राहत

मुंबई. एक महिला जो रीढ़ की बीमारी को लेकर तीन सर्जरी करने के बाद भी उसे सामान्य जीवन नहीं मिल पाया, आखिरकार सरकार के जीटी अस्पताल में उस महिला की सफल सर्जरी हुई है। यह महिला कामा अस्पताल में एक नर्स के तौर पर कार्यरत है। एक निजी अस्पताल में महिला की तीन बार रीढ़ की सर्जरी हुई, लेकिन उसका दर्द जस का तस ही बरकरार रहा। इस तरह तीनों महंगे प्रयास बेकार साबित हुए। इस बीच राज्य के सरकारी अस्पताल गोकुलदास तेजपाल (जीटी) ने रीढ़ की हड्डी की सर्जरी की। इससे उन्हें बीमारी से स्थायी राहत मिल गई।

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पैर का पंजा भी हो गया था खराब...
निजी अस्पताल में इलाज महंगा है, लेकिन कहा जाता है कि यह एक अच्छा इलाज है। हालांकि निजी अस्पताल में संचिता रावराणे का अनुभव बहुत खराब था। कुछ साल पहले वह रीढ़ की हड्डी की बीमारी से पीड़ित थे। उन्होंने मुंबई के एक निजी अस्पताल में स्पाइनल सर्जरी कराई। फिर भी रीढ़ के दर्द पर कोई फर्क नहीं पड़ा। फिर उन्होंने एक निजी अस्पताल में रीढ़ की हड्डी की सर्जरी की। तब भी वे पीठ में दर्द, चलने में कठिनाई, पैर कांपना और झुनझुनाहट जैसी समस्याओं से नजात न पा सकीं। वहीं उनके एक पैर के पंजे में तो कोई भी हलचल होना तक बंद हो गई थी।

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सरकारी अस्पताल में आया सिर्फ 50 हजार का खर्च...
उल्लेखनीय है कि तंग हारकर आखिर में उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के सह-निदेशक अजय चंदनवाले से मुलाकात की और उनकी बीमारी के बारे में चर्चा की, तब आर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. धीरज सोनावणे ने निरीक्षण कर सर्जरी कराने की सलाह दी। उनके ढीले पेंचों को रीढ़ से हटा दिया गया। इन्हें हटाते समय तंत्रिका चोट की समस्याओं को दूर करने के लिए न्यूरो मॉनिटरिंग मशीन को बाहर से बुलाया गया था। इस मशीन में तारों के माध्यम से करंट पास करके नसों का निरीक्षण किया गया और इस तरह से नसों को सीधा किया गया। वहीं डॉक्टरों की यह जटिल सर्जरी सफल रही। लाखों की लागत से बचा गया था और इस सर्जिकल उपचार को सिर्फ 50 हजार अंजाम दिया गया।

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