
देवेंद्र फडणवीस और सुनेत्रा अजित पवार (Photo: IANS)
महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्रों के विधान परिषद की 17 सीटों पर होने वाले चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुए तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक सत्तारूढ़ महायुति और विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाड़ी (MVA) के बीच सीट बंटवारे का फॉर्मूला तय नहीं हो पाया है। इसी वजह से चुनाव लड़ने के इच्छुक नेताओं की बेचैनी लगातार बढ़ती जा रही है। मुंबई से लेकर दिल्ली तक बैठकों और मंथन का दौर जारी है। दोनों खेमों में कुछ अहम सीटों पर अब भी पेंच फंसा हुआ है। उधर, महायुति में वित्त मंत्रालय को लेकर भी चर्चाएं गर्म हैं। इस पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मेरे पास अभी तक ऐसी कोई आधिकारिक मांग नहीं आई है।
सीएम फडणवीस ने बुधवार को दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, “विधान परिषद का हमारा कठिन पेपर हल हो चुका है, अब सिर्फ आसान वाला बाकी है, जिसमें केवल टिकमार्क ही करना है। उसे भी पूरा कर अंतिम फैसला मुंबई में लिया जाएगा।” फडणवीस के इस बयान से साफ संकेत मिले हैं कि महायुति में अधिकांश सीटों पर सहमति बन चुकी है और अब केवल कुछ सीटों पर चर्चा जारी है।
सीएम फडणवीस ने बताया कि नासिक, छत्रपति संभाजीनगर और कोंकण की सीटों को लेकर अब भी अंतिम फैसला बाकी है। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (सुनेत्रा पवार) पुणे की सीट की भी मांग कर रही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, महायुति में सीटों का जो शुरुआती फॉर्मूला सामने आया है, उसके तहत भाजपा 10 से 11 सीटों पर, शिवसेना 5 से 6 सीटों पर और एनसीपी 2 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। हालांकि बदले हुए राजनीतिक समीकरणों के बीच भाजपा अपने बढ़े हुए संख्याबल के आधार पर ज्यादा सीटों पर दावा ठोक रही है। भाजपा की नजर विरोधियों की उन पारंपरिक सीटों पर है, जहां वह अब कमजोर पड़ चुके है। जो गठबंधन में खींचतान का मुख्य कारण बन गया है।
कोंकण सीट को लेकर महायुति के भीतर सबसे ज्यादा रस्साकशी देखने को मिल रही है। बताया जा रहा है कि शिवसेना नेता भरत गोगावले और एनसीपी के वरिष्ठ नेता सुनील तटकरे दोनों ही अपने-अपने बेटों के लिए इस सीट पर दावा कर रहे हैं। इसी वजह से कोंकण सीट का मामला ज्यादा उलझा हुआ माना जा रहा है।
बता दें कि कोंकण के रायगढ़ जिले में संरक्षक मंत्री के पद को लेकर इन दोनों नेताओं के बीच पहले से ही सियासी संघर्ष चल रहा है, जिसके कारण फडणवीस सरकार के गठन के डेढ़ साल बाद भी जिले को संरक्षक मंत्री नहीं मिल पाया है।
बताया जा रहा है कि शुरुआत में सुनेत्रा पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) केवल एक सीट की मांग कर रही थी, लेकिन अब पार्टी ने तीन सीटों पर दावा ठोक दिया है। उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने दिल्ली में कहा कि उनकी पार्टी ने तीन सीटों की मांग की है। इससे महायुति के भीतर सीट बंटवारे का पेंच और फंस गया है।
पिछले विधान परिषद चुनाव में भाजपा ने 17 में से 7 सीटों पर जीत हासिल की थी। लेकिन उसके बाद महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े बदलाव हुए। शिवसेना और एनसीपी में विभाजन के बाद राज्य की राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल गई है।
एनसीपी के हिस्से में आए वित्त मंत्रालय को उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को सौंपने की मांग जोर पकड़ रही है। दिल्ली में जब पत्रकारों ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस संबंध में पूछा तो उन्होंने कहा, “मेरे पास अभी तक ऐसी कोई आधिकारिक मांग नहीं आई है। जब आएगी, तब मैं इस पर बोलूंगा।”
इसी साल 28 जनवरी की सुबह बारामती हवाई पट्टी के पास हुए विमान हादसे में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री और एनसीपी प्रमुख अजित पवार की मौत हो गई थी। इसके बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली और बाद में उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया। हालांकि, अजित पवार तब राज्य के वित्त मंत्री भी थे, लेकिन सुनेत्रा पवार को यह विभाग नहीं दिया गया। यह महत्वपूर्ण विभाग फडणवीस ने अपने पास रखा और कहा था कि राज्य के बजट सत्र के बाद यह एनसीपी को वापस सौंपा जा सकता है।
Published on:
28 May 2026 11:19 am
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