
सोलापुर-मुंबई वंदे भारत एक्सप्रेस (Photo: IANS/File)
महाराष्ट्र में एक दिल छू लेने वाली घटना सामने आई, जहां एक छोटी सी चूक के कारण 3 साल की मासूम बच्ची वंदे भारत एक्सप्रेस में अकेली रह गई। हालांकि, रेलवे के 'ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते' और सजग रेल कर्मियों की मदद से कुछ ही घंटों में बच्ची को सुरक्षित उसके माता-पिता से मिला दिया गया।
जानकारी के अनुसार, राहुल खुरमुटे 2 मई को सोलापुर-मुंबई वंदे भारत एक्सप्रेस में अपनी तीन साल की बेटी के साथ सफर कर रहे थे। कुर्डुवाडी स्टेशन पर ट्रेन रुकने के दौरान बच्ची को भूख लगी, तो पिता बिस्किट लेने के लिए नीचे उतर गए। इसी बीच ट्रेन चल पड़ी और वह वापस डिब्बे में नहीं चढ़ पाए, जबकि बच्ची ट्रेन में ही रह गई।
वंदे भारत ट्रेनों में ऑटोमैटिक दरवाजे होते हैं, जो स्टेशन से रवाना होते समय तुरंत बंद हो जाते हैं।
मासूम बच्ची कोच सी-5 की सीट नंबर 30 पर अकेली थी। ट्रेन के रफ्तार पकड़ते ही वह डर के मारे जोर-जोर से रोने लगी। उसे अकेला और रोता देख कोच के सह-यात्रियों ने तुरंत इसकी सूचना टीटीई एचएल मीणा को दी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मीणा ने तुरंत कंट्रोल रूम को सूचित किया और 'ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते' के तहत बच्ची को उसके पिता से मिलाने का काम शुरू हुआ। सफर के दौरान एक महिला यात्री ने बच्ची की देखभाल की और उसे शांत कराया।
बच्ची इतनी छोटी थी कि वह अपने बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दे पा रही थी। ऐसे में रेलवे अधिकारियों ने रिजर्वेशन डिटेल के जरिए पिता का मोबाइल नंबर निकाला और उनसे बात की। उन्हें भरोसा दिलाया गया कि उनकी बेटी पूरी तरह सुरक्षित है और उन्हें अगली ट्रेन से पुणे आने को कहा गया।
रेलवे अधिकारियों के बीच बेहतरीन समन्वय के कारण बच्ची को पुणे स्टेशन पर सुरक्षित उतारा गया। वहीं, कुर्डुवाडी में पीछे छूटे पिता को दूसरी ट्रेन से पुणे पहुंचने की व्यवस्था की गई। पुणे पहुंचने पर जब मासूम ने अपने माता-पिता को देखा, तो आंखों में आंसू आ गए। फिर बच्ची को सुरक्षित उनके सुपुर्द कर दिया गया। आरपीएफ और रेलवे कर्मचारियों की इस तत्परता की हर तरफ सराहना हो रही है।
Updated on:
04 May 2026 04:49 pm
Published on:
04 May 2026 04:49 pm
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