
मुजफ्फरनगर। कोरोना वायरस के चलते डाक्टरों सहित देशभर का चिकित्सा स्टाफ मरीजो की जान बचाने के लिए दिन रात अपनी जान की बाज़ी लगाकर काम कर रहा है। मगर जनपद मुज़फ्फरनगर में भगवान का रूप माने जाने वाले डॉक्टरों का एक ऐसा चेहरा सामने आया है जो लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। कारण, जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही एक गर्भवती महिला को डॉक्टरों ने डिलीवरी के लिए भर्ती करना तो दूर, उसे देखना भी उचित नहीं समझा और उसको जिला चिकित्सालय भेजने की सलाह दे डाली।
मगर सरकारी जिला महिला चिकित्सालय में भी उसको गंभीर बताते हुए भर्ती करने से मना कर दिया। आरोप है कि परिजन जब तीसरे हॉस्पिटल में पहुंचे तो वहां भी महिला को सिसौली की निवासी होने का पता चलते ही डिलीवरी करने से मना कर दिया। जिसके बाद मामला भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत के पास पहुंचा और भारतीय किसान यूनियन के कई दर्जन कार्यकर्ताओं ने हॉस्पिटल पर जाकर हंगामा शुरू किया। उसके बाद महिला को डिलीवरी के लिए एक निजी हॉस्पिटल में भर्ती किया गया।
दरअसल, मामला कस्बा सिसौली का है। जहां निवासी पवनदीप बालियान की पत्नी नीतू का इलाज लंबे समय से थाना सिविल लाइन क्षेत्र के महावीर चौंक स्थित सेवा मेडिकेयर में चल रहा था। मगर जब महिला डिलीवरी के लिए अस्पताल पहुंची तो डॉक्टर ने उसे भर्ती करना तो दूर की बात डॉक्टर ने उसे देखना तक उचित नहीं समझा और डिलीवरी करने से मना कर दिया। जिसके बाद महिला के परिजन उसे लेकर जिला महिला चिकित्सालय पहुंचे। आरोप है कि जिला महिला चिकित्सालय में भी डाक्टरों ने महिला का सिसौली निवासी होने का पता चलने पर डिलीवरी करने से मना कर दिया। उसके बाद पूरे शहर में घूमने के बाद यह महिला भोपा रोड स्थित एक निजी हॉस्पिटल पहुंची। जहां पर भी मरीज के सिसौली निवासी होने की जानकारी हुई तो उन्होंने भी बहाने बनाने शुरू कर दिए।
मामले जानकारी भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत के पास पहुंची तो चौधरी राकेश टिकैत भाकियू कार्यकर्ताओ के साथ आनंद हॉस्पिटल पहुंच गये। भारतीय किसान यूनियन के हंगामे की सूचना मिलते ही मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. प्रवीण चौपड़ा , अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) अमित कुमार भी हॉस्पिटल पहुंच गये। इसके बाद मरीज की डिलीवरी की तैयारी शुरू कर दी। मामले के बाद महिला के देवर प्रदीप की तरफ से जिलाधिकारी को लापरवाही करने वाले चिकित्सकों के विरुद्ध कार्रवाई हेतु प्रार्थना पत्र दिया गया। वहीं चौधरी राकेश टिकैत ने लॉक डाउन के दौरान इलाज न करने वाले डॉक्टरों के अस्पतालों पर कार्रवाई की मांग की है।
महिला के कस्बे के नाम से क्यों घबराए डॉक्टर
गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले जनपद की ही रहने वाली एक महिला नोएडा के अस्पताल में इलाज कराकर सिसौली कस्बे में एक रस्म तेरवीं में शामिल हुई थी। जिसकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई थी। इस तेरवीं में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे। जिन्हें बाद में स्वास्थ्य विभाग द्वारा क्वारंटाइन किया गया। महिला के देवर का आरोप है कि इसी वजह से उसकी भाभी को अस्पतालों ने भर्ती करने से इंकार कर दिया।
Updated on:
14 Apr 2020 01:01 pm
Published on:
14 Apr 2020 12:36 pm
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