30 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Loudspeakers row : मस्जिदों और मंदिरों से हटाए गए लाउडस्पीकर, इमाम ने रमजान में कार्रवाई पर उठाए सवाल

मुजफ्फरनगर में पुलिस और प्रशासन की अपील पर मंदिरों और मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने की कार्रवाई शुरू हो गई है। लोगों ने खुद पहल करते हुए मंदिर-मस्जिदों से लाउडस्पीकर को उतार लिया है। वहीं, मस्जिद के इमाम खालिल साजिद ने रमजान के महीने में की जा रही कार्रवाई पर सवाले उठाए हैं।

2 min read
Google source verification
loudspeakers-removed-from-mosques-and-temples-in-muzaffarnagar.jpg

उत्तर प्रदेश में सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत सभी धार्मिक स्थलों से अतिरिक्त लाउडस्पीकर हटाने को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले दिनों कहा था कि आवाज केवल धार्मिक स्थलों के कैंपस तक ही सीमित रहेगी। इसी के मद्देनजर मुजफ्फरनगर में पुलिस और प्रशासन ने सभी मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारों से लाउडस्पीकर उतारने की मुहिम छेड़ दी है। इसके लिए प्रशासन ने सभी धर्मों के लोगों के साथ बैठक कर लाउडस्पीकर हटाने की अपील की थी। जिसके बाद अब धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर उतारने का काम शुरू हो गया है। लोगों ने खुद पहल करते हुए मंदिर-मस्जिदों से लाउडस्पीकर और साउंड सिस्टम को या तो उतार लिया है या फिर बंद कर दिया है।

मस्जिद के इमाम खालिद साजिद ने कहा है कि देश संविधान से चलता है और हिंदुस्तान का संविधान हमेशा न्याय प्रिय रहा है। देश में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण को लेकर हम सुप्रीम कोर्ट ने जो गाइडलाइन जारी की है उसका स्वागत करते हैं। लेकिन, कहीं न कहीं इस आदेश को उस समय जारी किया गया, जब देश में रमजान का महीना चल रहा है। हम लोग नमाज पढ़ते वक्त किसी भी तरह का शोर शराबा या लाउडस्पीकर का प्रयोग नहीं करते हैं। नमाज के वक्त लाउडस्पीकर से अजान की जाती है, जिससे मुस्लिम धर्म को मानने वाले लोग अजान सुनकर सुबह उठते हैं।

यह भी पढ़ें- 'जागरण तो होकर रहेगा, इसके लिए किसी अनुमति की जरूरत नहीं, हिम्मत है तो रोक के दिखा'

जब लाउडस्पीकर नहीं था, तब मुनादी या आतिशबाजी होती थी

उन्होंने कहा कि रमजान के महीने में सुबह लोगों को शहरी के लिए उठाया जाता है। जब लाउडस्पीकर या साउंड नहीं था, तब मुनादी कराकर या फिर आतिशबाजी कर लोगों को जगाया जाता था। उसके बाद लाउडस्पीकर आ गया तो उसका सहारा लिया जाने लगा। हम मानते हैं कि लाउडस्पीकर को तेज ध्वनि से बजाकर हम ध्वनि प्रदूषण करते हैं, लेकिन हिंदुस्तान हमेशा आस्था का केंद्र रहा है और यहां की गंगा-जमुनी तहजीब से लोग एक-दूसरे को त्योहार पर भेंट कर संप्रदायिक भाईचारे की मिसाल देते हैं। लाउडस्पीकर बंद होने से परेशानी तो जरूर आएगी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सोच समझकर यह फैसला दिया होगा।

यह भी पढ़ें- दो मुस्लिम परिवारों के 8 सदस्यों ने गंगाजल से आचमन कर अपनाया हिंदू धर्म

आस्था के नाम पर शोर शराबा ठीक नहीं

मंदिर के पुजारी रमेश चंद शास्त्री भी सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे सही बता रहे हैं। उनका कहना है कि कहीं ना कहीं हम आस्था के नाम पर प्रदूषण फैला रहे हैं। इबादत और पूजा बिना लाउडस्पीकर की भी की जा सकती है। इंसान सच्चे मन से भगवान का नाम ले बस यही सच्ची श्रद्धा है, लेकिन आस्था के नाम पर शोर शराबा करना ठीक नहीं है। मंदिर और मस्जिद से लाउडस्पीकर हटाए जाने पर शहर काजी तनवीर आलम ने भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए मुस्लिम भाइयों से अपील की है कि वह खुद ध्वनि प्रदूषण के जिम्मेदार हैं। इसलिए उन्हें खुद ही मस्जिदों से लाउडस्पीकर को हटा लेना चाहिए।

Story Loader