
Kisan News: धान (चावल) खरीफ मौसम की मुख्य फसल में से एक है। धान की खेती करने वाले ज्यादातर किसान इस उम्मीद में इसकी खेती करते है कि उन्हें अन्य फसलों की तुलना में इससे बेहतर उत्पादन और ज्यादा मुनाफा मिल सके। मई का महीना आते ही कई राज्यों में किसान धान की बुआई यानी नर्सरी लगाना शुरू कर देते हैं।
किसान धान की ऐसी किस्मों की खेती करना चाहते हैं जिससे उनकी फसल जल्दी तैयार हो जाए और उत्पादन भी अच्छा मिले। लेकिन ज्यादातर किस्मों को तैयार होने में लगभग 130 से 140 दिन का समय लगता है। जिसके कारण आगे खेती करने में देरी होती है। किसानों की इन्हीं समस्याओं और बाधाओं को दूर करने के लिए बाजार में मंसूरी धान की नई किस्म आई है। आइए जानते हैं इस नई किस्म की से धान की कितनी पैदावार मिलेगी।
सबौर मंसूरी धान की खासियत यह है कि यह कम पानी, खाद और कम खर्च में सामान्य धान से ज्यादा उपज देता है। धान की यह नई किस्म सबौर मंसूरी लगभग डेढ़ गुना अधिक उपज देती है। केंद्र सरकार की ओर से इसके लिए नोटिफिकेशन एक महीने में जारी किया जाएगा।
किसान सबौर मंसूरी धान की खेती इसी खरीफ सीजन में कर सकेंगे। इस धान की खास बात यह है कि इसके बीज बिना रोपाई के सीधे बोये जा सकते हैं। साथ ही इसका औसत उत्पादन 65 से 70 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। अगर अधिकतम उत्पादन की बात करें तो यह 122 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक होता है। इसके अलावा सीधी बुआई के लिए सबौर मंसूरी धान 135 से 140 दिन में तैयार हो जाता है।
उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों में सबौर मंसूरी धान का उत्पादन होगा। इसमें बंगाल, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, तेलंगाना और पुडुचेरी शामिल हैं। धान की इस नई किस्म सबौर मंसूरी की खोज बिहार कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने की है। पिछले 4 वर्षों से अखिल भारतीय एकीकृत धान सुधार परियोजना के तहत बिहार समेत देश के 19 राज्यों के 125 केंद्रों पर इसका परीक्षण किया गया।
Published on:
04 May 2024 09:45 pm
