3 अप्रैल 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

दारोगा ने रिश्वत लिया, जेल गया, अब सड़क पर आया! DIG बोले- ऐसे भ्रष्ट अफसर की विभाग में जगह नहीं

मुजफ्फरपुर के भ्रष्ट दारोगा सदरे आलम आखिरकार अपनी नौकरी से हाथ धो बैठे हैं। विजिलेंस डिपार्टमेंट द्वारा पकड़े जाने और जेल में समय बिताने के लगभग 5 साल बाद तिरहुत रेंज के DIG ने उन्हें पुलिस सेवा से स्थायी रूप से बर्खास्त कर दिया है।

2 min read
Google source verification
DIG ने दारोगा को किया बर्खास्त

DIG चंदन कुशवाहा ने दारोगा को किया बर्खास्त

बिहार पुलिस की छवि धूमिल करने वाले दारोगा (SI) सदरे आलम को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। तिरहुत रेंज के DIG चंदन कुशवाहा ने दरोगा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई से जुड़ी रिपोर्ट के आधार पर यह सख्त आदेश जारी किया। दारोगा को पांच साल पहले मुजफ्फरपुर में रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था। यह कार्रवाई 2 अप्रैल 2026 से प्रभावी मानी जाएगी। बर्खास्तगी का आधिकारिक आदेश वैशाली के पुलिस अधीक्षक (SP) को भेज दिया गया है क्योंकि सदरे आलम इस समय वैशाली जिला पुलिस बल के अंतर्गत हाजीपुर औद्योगिक पुलिस थाने में तैनात थे।

11,000 की रिश्वत ने खत्म कर दिया करियर

यह पूरी घटना सितंबर 2021 की है, जब सदरे आलम मुजफ्फरपुर के अहियापुर पुलिस थाने में तैनात थे। अहियापुर के सिपाहीपुर की रहने वाली तबस्सुम आरा के बेटे पर एक आपराधिक मामला दर्ज था। उसे राहत दिलाने और यह सुनिश्चित करने के बदले कि उसे दोबारा गिरफ्तार न किया जाए, सब-इंस्पेक्टर सदरे आलम ने 11,000 की रिश्वत की मांग की।

परेशान महिला ने पटना स्थित निगरानी जांच ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई। 30 सितंबर 2021 को निगरानी ब्यूरो की एक विशेष टीम ने जाल बिछाया और मुजफ्फरपुर में जीरो माइल चौक के पास एक चाय की दुकान पर रिश्वत की रकम लेते हुए सदरे आलम को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के समय दारोगा ने निगरानी टीम पर अपनी पिस्तौल तानने की भी दुस्साहसी कोशिश की।

जेल से छूटे, फिर जॉइन की नौकरी… लेकिन बच नहीं पाए

रिश्वतखोरी के आरोप में गिरफ्तार होने के बाद सदरे आलम को जेल भेज दिया गया था। हालांकि, कुछ समय बाद उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया और उन्होंने मुजफ्फरपुर जिला पुलिस बल में दोबारा ड्यूटी जॉइन कर ली। इसके बाद, उनका तबादला वैशाली जिले में कर दिया गया। इस पूरी अवधि के दौरान उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई जारी रही। पांच साल तक चली लंबी जांच के बाद और DSP (पूर्वी) द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर सदरे आलम को भ्रष्टाचार का दोषी पाया गया।

DIG बोले- ऐसे अफसर की विभाग में जगह नहीं

अपने बर्खास्तगी आदेश में DIG चंदन कुशवाहा ने स्पष्ट और कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। अपने आदेश में उन्होंने लिखा कि विभागीय जांच और जांच अधिकारी की सिफारिशों से सहमत होते हुए भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गए SI सदरे आलम को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त किया जाता है। विभाग के भीतर ऐसे भ्रष्ट पुलिस अधिकारी की निरंतर उपस्थिति का न केवल आम जनता पर, बल्कि अन्य समर्पित पुलिस कर्मियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। ऐसे अधिकारी का विभाग में बने रहने का कोई भी औचित्य नहीं है।