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नागौर. सरकार का फरमान आने के बाद अधिकारियों की नींद खुली, और राजकीय छात्रावासों की मरम्मत की याद आई। जिले के सभी छात्रावासों के भौतिक स्थिति सहित अन्य व्यवस्थाओं की बिंदुवार रिपोर्ट सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के मुख्यालय ने मांगी है। फरमान आने के बाद अधिकारी फिलहाल भवनों की जांच में जुट गए हैं। इससे अब जिले के 18 छात्रावासों की स्थिति भी सुधरने की उम्मीद जगी है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के निदेशक डॉ. समित शर्मा ने सहायक निदेशकों को अपने क्षेत्र के छात्रावास की भौतिक स्थिति की रिपोर्ट जल्दी भेजने के निर्देश दिए। रिपोर्ट में भवन की स्थिति, रहने की व्यवस्था, रसोई एवं सफाई के प्रबन्ध तथा इससे पहले मरम्मत कराने की तथ्यात्मक जानकारी देने के निर्देश दिए।
जुटे रिपोर्ट बनाने में
जिले में नागौर में चार, कुचामन, मौलासर, मकराना, जायल, खाटू, गच्छीपुरा, लूणवा, नावां, मेड़ता में एक-एक हैं। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सभी छात्रावासों की जांच पहले भी की गई थी, अब एक बार फिर से की जा रही है। जल्द ही इसके कमरों आदि की स्थिति के साथ पूर्णरूप से मूल्यांकन कर प्रस्तावित व्यय राशि आदि की रिपोर्ट भेजी जाएगी।
मुख्यालय स्तर पर मिली शिकायतें
राजकीय छात्रावासों के जर्जर भवन में कमरों की बदहाल स्थिति, भोजन कक्ष की अव्यवस्था के साथ अन्य मूलभूत सुविधाओं की कमी के बारे में शिकायतें मुख्यालय स्तर पर लोगों ने भेजी थी। इसे लेकर राज्य सरकार के मंत्रियों को विभिन्न संगठनों की ओर से ज्ञापन दिए गए थे।
भामाशाहों की लेंगे मदद
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अधिकारियों का कहना है कि भवन सुधारो अभियान चलाया जाएगा। इसमें छात्रावास एवं आवासीय विद्यालयों की मरम्मत के लिए मैस समिति में बचत राशि, स्थानीय भामाशाह एवं जन प्रतिनिधियों का सहयोग लिया जाएगा। मरम्मत या निर्माण के दौरान अधिकारियों के साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधि भी इसकी निगरानी करेंगे।
इनका कहना है...
राजकीय छात्रावासों की स्थिति सुधारने के संबंध में मुख्यालय से निर्देश मिले हैं। इस संबंध में विभाग आवश्यक कार्रवाई कर रहा है।
सुरेन्द्रकुमार पूनिया, सहायक निदेशक, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग नागौर

Published on:
21 Apr 2018 12:22 pm
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