
गौशाला पलते गोवंश(patrika file photo)
- गौमाता की पुकार: चारे का करो इंतजाम, भूखे पेट जिंदा रहना मुश्किल
-उधारी पर चारा देने वालों ने खींचे हाथ, भामाशाहों के भरोसे व्यवस्था
सवाईसिंह हमीराणा
खींवसर(नागौर). सरकार की उदासीनता और लचर कार्यशैली ने गौशालाओं में पल रहे गौवंश के लिए संकट की घंटी बजा दी है। प्रदेश की कुल 2500 गौशाला में पल रहे 14 लाख गोवंश के अनुदान के करीब 1120 करोड़ रुपए नौ माह से अटके हुए हैं। इसी तरह नागौर जिले की 455 पंजीकृत गौशालाओं का पिछले नौ महीनों से 158 करोड़ रुपए का अनुदान अटका पड़ा है। यह राशि गौशालाओं के लिए जीवनरेखा है, लेकिन सरकार की शिथिलता ने गौवंश के निवाले पर तलवार लटका रखी है। गौशालाओं में चारा आपूर्ति करने वालों ने उधार देने से इनकार कर दिया है।
सरकार ने गत वर्ष नवम्बर से मार्च तक और चालू वर्ष में अप्रेल से जुलाई तक का भुगतान नहीं किया है। जबकि सरकार गौशालाओं को सिर्फ नौ माह के लिए अनुदान देती है। यह भी समय पर नहीं मिलने से गौशालाओं की आर्थिक स्थिति खराब है। चारे के भाव काफी बढ़ने से गौशाला संचालकों के लिए विकट स्थिति है। उनको भामाशाहों का सहयोग लेना पड़ रहा है। पहले छोटे पशु के लिए 20 व पशु के लिए 40 रुपए अनुदान मिलता था, अब बढ़ाकर छोटे के लिए 22 व बड़े पशु के लिए 42 रुपए कर दिया गया है।
भूखा रहता गोवंश अनुदान राशि नहीं मिलने से गोवंश को भूखा रहना पड़ रहा है। नागौर जिले की स्थिति यह है कि यहां कि ७८५ गौशालाओं में से ३३० गौशालाओं का पंजीयन नहीं है। वहीं पंजीकृत ४५५ गौशालाओं में ९ माह से १५८ करोड़ के अनुदान बाकी है। इस कारण गौशाला संचालक पशुओं को गौशाला में लाने से बचते है। प्रदेश में लाखों की संख्या में गौवंश सड़कों पर भटक रहा है।
भुगतान के लिए कागज ही तैयार नहीं
सरकार ने इस वर्ष गौशालाओं को अनुदान राशि का भुगतान नहीं किया है। मार्च के बाद सरकार ने कागज तक तैयार नहीं किए है। उधारी में चारा देने वालों ने इनकार कर दिया है।
- हीराराम गोदारा, प्रदेश मंत्री, राजस्थान गौ सेवा समिति।
अनावश्यक देरी
गौशालाओं के अनुदान में अनावश्यक देरी कर रहे हैं। विभाग गौशालाओं का पैसा रोककर राशि का दुरुपयोग कर रहे हैं। समय पर अनुदान राशि का भुगतान मिलना चाहिए
रघुनाथसिंह राजपुरोहित , प्रदेश महामंत्री, राजस्थान गो सेवा समिति, जयपुर।
भुगतान की प्रक्रिया चल रही
गौशाला अनुदान के भुगतान को लेकर कर्मचारियों की टीम लगा रखी है। फाइलें जांच रहे हैं अगस्त माह के अंत तक भुगतान करने का प्रयास किया जाएगा।
महेशकुमार मीणा, उप निदेशक पशुपालन विभाग, नागौर।
Published on:
09 Aug 2025 05:01 pm
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