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परिवार व समाज के साथ पुलिस के लिए भी सिरदर्द बने नशेड़ी, नशा मुक्ति केन्द्र खोलने की मांग बढ़ी

शहर में बढ़ी एमडी-स्मैक के नशेडिय़ों की संख्या, नशे के लिए करने लगे शहर में चोरियां, नशे में बेसुध नशेड़ी दिनदहाड़े तोड़ रहे लोगों के घरों के ताले, उठा रहे मोटरसाइकिल और गैस सिलेण्डर, पुलिस गिरफ्तार करती है, लेकिन थाने व जेल में रखना भी हो रहा मुश्किल

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नागौर. नशे की लत से जूझ रहे लोग न केवल अपने परिवार और समाज के लिए बल्कि पुलिस के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन गए हैं। खासकर एमडी, स्मैक और डोडा-पोस्त जैसे नशीले पदार्थों के आदी लोग नशे की लत को पूरा करने के लिए चोरी और अन्य अपराधों में लिप्त हो रहे हैं। अब तो हालात यह है कि नशेड़ी दिनदहाड़े घरों के ताले तोड़ रहे हैं और मोटरसाइकिल, गैस सिलेंडर जैसी कीमती वस्तुओं की चोरी करने लगे हैं। नागौर शहर सहित जिले भर में पिछले दो महीने में इस प्रकार की कई चोरी की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें चोरी करने वाले आदतन चोर नहीं होकर नशेड़ी हैं, जो नशे की एक खुराक के लिए न केवल चोरी कर रहे हैं, बल्कि नशे के लिए अन्य अपराध भी कर रहे हैं।

हालांकि नशे के लिए चोरी करने वाले युवकों को पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई बार गिरफ्तार भी किया है, लेकिन वे नशे के इतने अधिक आदी हो गए हैं कि उन्हें थाने की हवालात या जेल में रखना भी मुश्किल हो रहा है। नशे के बिना वे बेसुध-से हो जाते हैं, जिन्हें समय पर उपचार नहीं मिले तो तबीयत ज्यादा खराब होने की आशंका भी रहती है, ऐसे में जिले में नशा मुक्ति केन्द्र खोलने की मांग तेज होने लगी है। नशेड़ी युवकों के परिजनों के साथ पुलिस अधिकारियों का भी यह कहना है कि यदि सरकार के स्तर पर जिले में नशा मुक्ति केन्द्र खुल जाए तो नशे के लिए चोरी करने वाले युवकों को गिरफ्तार करने के साथ उनको नशा छुड़वाने की दिशा में भी काम हो सकेगा और इसी से अपराधों में कमी लाई जा सकेगी।

नशेड़ी किस प्रकार समाज के लिए सिरदर्द बनते हैं

- पारिवारिक और सामाजिक समस्याएं: नशीली दवाओं के सेवन से परिवारों में अशांति, आर्थिक तंगी और सामाजिक कलंक और भेदभाव जैसी मनो-सामाजिक समस्याएं उत्पन्न होती हैं, जिससे जीवन की गुणवत्ता कम होती है।

- अपराध और हिंसा : नशे की लत से व्यक्ति आपराधिक गतिविधियों और घरेलू हिंसा में शामिल हो जाते हैं, जिससे समाज में असुरक्षा फैलती है।

- सार्वजनिक स्वास्थ्य का संकट: नशे की लत एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है, जिसके लिए समुदाय और स्वास्थ्य पेशेवरों से समर्थन की आवश्यकता होती है।

पुलिस के लिए चुनौतियां

- बढ़ता तनाव और संसाधन : नशे से संबंधित अपराधों के कारण पुलिस पर काम का बोझ और तनाव बढ़ता है, जिससे उन्हें अपनी सेवाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने में कठिनाई होती है।

- समुदाय के साथ अविश्वास : जब चोरी जैसी घटनाओं में बढ़ोतरी होती है तथा पुलिस नशीली दवाओं के सेवन की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने में असमर्थ होती है, तो समुदाय के भीतर पुलिस के प्रति अविश्वाास की भावना बढ़ सकती है।

क्या है समाधान

- सामुदायिक सहयोग और सहायता : नशे की लत को दूर करने के लिए पुलिस को समुदायों के साथ मिलकर काम करना चाहिए, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक समर्थन तक पहुंच प्रदान करना शामिल है।

- निवारक उपाय : नशे की रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए, ताकि लोग नशे से दूर रहें और इसके दुष्परिणामों को समझें।

- कानून प्रवर्तन और पुनर्वास : पुलिस को नशे से जुड़े अपराधों पर अंकुश लगाने के साथ-साथ नशेडिय़ों को पुनर्वास केंद्रों तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।

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पूरी सोसायटी को आगे आना होगा

हां, यह बात सही है कि नशेड़ी युवक नशे की सामग्री खरीदने के लिए चोरी जैसे अपराधों की ओर बढ़ रहे हैं। चोरी जैसे अपराध करने पर पुलिस की ओर से निरोधात्मक कार्रवाई की जा रही है, लेकिन इतना काफी नहीं है। पुलिस उन्हें गिरफ्तार करती है, लेकिन थोड़े दिन बाद वे जमानत का लाभ लेकर बाहर आ जाते हैं और फिर वहीं काम शुरू कर देते हैं। इस समस्या को जड़ से समाप्त करने के लिए जिले में सरकारी नशा मुक्ति केन्द्र खुलना चाहिए, ताकि नशेड़ी युवाओं को उसमें भर्ती करवाकर इलाज करवाया जा सके और उनकी उचित काउंसलिंग करवाई जा सके। इसके लिए नशेडिय़ों के परिजनों व समाज को भी आगे आना होगा।

- वेदपाल शिवरान, थानाधिकारी, कोतवाली थाना, नागौर