5 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

catch_icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बिना हथियार किसान लड़ रहे जंगली जानवरों से जंग

-डेढ दशक से जारी नहीं हो रहे टोपीदार बंदूकों के लाईसेंस -मृतकों के वारिस भी लगा रहे चक्कर -पुलिस थानों में पड़ी धूल फांक रही बंदूकें

2 min read
Google source verification
nagaur

पुलिस थानों में पड़ी धूल फांक रही बंदूकें,पुलिस थानों में पड़ी धूल फांक रही बंदूकें

सवाईसिंह हमीराणा

खींवसर. पिछले डेढ़ दशक से किसान बिना हथियार अपने खेतों की रखवाली कर रहे है। कई बार वो नील गाय एवं जंगली सुअरों के हमलों से घायल भी हो चुके हैं। खेतों की रखवाली के लिए दिए जाने वाले टोपीदार बंदूक के लाईसेंस खींवसर ही नहीं पूरे राजस्थान में नहीं बनाए जा रहे हैं। ऐसे में किसानों को अपने खेतों में खड़ी फसल की रखवाली कर बचाने के लिए उन्हें जंगली जानवरों से बिना हथियार जंग लड़नी पड़ रही है। हालांकि लाईसेंस पर रोक कोई सरकारी फरमान नहीं है, बल्कि कई जिलों में हथियार लाईसेंस को लेकर हुए फर्जीवाड़े के बाद Òहोम करते हाथ जलनेÓ वाली स्थिति को भांपकर जिम्मेदार अधिकारियों ने नए लाईसेंस जारी करने से किनारा कर लिया है। यही नहीं जिन लाईसेंस धारकों की मौत हो चुकी है उनके वारिसों को फोतगी के लाईसेंस भी जारी नहीं हो रहे हैं।
छाछ भी फंूक-फूंक कर पी रहे
दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंक कर पीता है यह कहावत उपखण्ड अधिकारियों पर चरितार्थ हो रही है। दसअसल राज्य के कई जिलों में हथियार लाइसेंस मामलों में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद राज्य सरकार ने कुछ प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई करने से हथियार लाइसेंस जारी करने वाले अधिकारियों के तोते उड़ गए। अब स्थिति यह है कि दूसरे प्रशासनिक अधिकारियों ने भी हथियार लाइसेंस जारी करने को बर्र के छत्ते में हाथ डालना मानते हुए जैसे-तैसे अपना दामन बचाए रखने का सबक सीख लिया है। राज्यभर में उपखण्ड अधिकारियों की घबराहट का आलम यह है कि कोई भी उपखण्ड अधिकारी नए लाइसेंस जारी करना तो दूर मृत व्यक्ति के वारिसों के नाम लाइसेंस जारी करने तक की जहमत नहीं उठा रहा है।
गेंद एसडीएम के पाले में
पहले राज्य सरकार ने हथियार लाइसेंसों के मामले में सामने आए फर्जीवाड़े के बाद लाइसेंस जारी करने के अधिकार तहसीलदारों से छीन कर जिला कलक्टरों को सौंप दिए, किन्तु जिले के सबसे बड़े हाकिम के पास पहले ही पूरे जिले के काम का बोझ कुछ कम नहीं होता। ऐसे में राज्य सरकार ने कुछ समय बाद ये अधिकार उपखण्ड अधिकारियों को सौंप दिए।
डेढ दशक से नया लाइसेंस नहीं
वर्ष 2005 के बाद से ही क्षेत्र में एक भी नया लाइसेंस जारी नहीं हुआ है। लाइसेंस के अभाव में खींवसर, भावण्डा व पांचौड़ी पुलिस थाने में दर्जनों टोपीदार व बारह बोर की बंदूकें धूल फांक रही है। प्रति वर्ष लाईसेंस धारक की मृत्यु के चलते अनेक बंदूकें पुलिस थाने में जमा तो हो रही है , लेकिन नए लाईसेंस नहीं बनने से बंदूकंे पुलिस थानों में जमा की जा रही है।
कारण का पता करवाएंगे
टोपीदार बंदूकों के लाईसेंस जारी होने के मामले में सरकारी गाइड लाइन का पता करवाया जाएगा, उसी के अनुरूप कार्यवाही की जाएगी।
-डॉ. धीरज कुमार सिंह, उपखण्ड अधिकारी, खींवसर।