
इस दौरान शहर में अनेक स्थानों पर भगवान की सवारी का भव्य स्वागत हुआ तथा भक्तजनों ने सवारी पर पुष्प वर्षा भी की।
मंदिर के व्यवस्थापक श्यामसुन्दर शर्मा ने बताया कि मठाधीश स्वामी घनश्यामाचार्य महाराज के सानिध्य एवं युवाचार्य स्वामी भूदेवाचार्य के निर्देशन में सुबह प्रधान अर्चक बालमुकुन्द ने अपने सहयोगियों के साथ भगवान का मनोहारी श्रृंगार किया। इसके पश्चात सुबह 9.30 बजे भगवान सवारी पर विराजित हुए। इस अवसर पर भगवान की सवारी ने नगर भ्रमण किया। सवारी सुनारों की गली, गुदड़ी बाजार, कोट मौहल्ला, नृसिंह चौक, नागौरिया मठ, लाहोटियों की गली, गुरूजी की गली पहुंची, जहां कलाकारों ने भजनों की प्रस्तुतियां दी। इसके बाद सवारी पुन: मंदिर के लिए रवाना हुई। सवारी के साथ अनेक भक्तजन भजन-कीर्तन करते हुए चल रहे थे। अनेक मौहल्लों में अनेक स्थानों पर भगवान की सवारी का स्वागत किया गया तथा भारी संख्या में महिला व पुरूष श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन किए। इसके बाद 4 बजे मंदिर में जल विहार का कार्यक्रम हुआ, जिसमें अनेक श्रद्धालुओं ने भाग लिया। रात्रि 8 बजे परकाल लीला का मंचन किया गया। इसके तहत भगवान अश्ववाहन पर
विराजित हुए।
आज होगी चीरलाला
बुधवार को चांदी की पालकी में भगवान की चीर लीला एवं प्रणय कलह लीला होगी तथा अपरान्ह 3 बजे मन्दिर में यज्ञांत स्नान का कार्यक्रम होगा। रात्रि 8 बजे भगवान गज वाहन पर विराजकर मंदिर परिसर का भ्रमण करेंगे। गुरुवार को सुबह 9 बजे भगवान कल्पवृक्ष पर विराजकर मंदिर परिसर का भ्रमण करेंगे। इस दौरान दोपहर 3 बजे मन्दिर में भगवान का 12 बार पूजन किया जाकर भोग लगाया जाएगा तथा सांय 4 बजे मन्दिर में फाग उत्सव मनाया जाएगा।
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