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लूणी को छलनी कर रहा बजरी माफिया, हाइवे बना अवैध ढुलाई का एक्सप्रेस-वे

जोधपुर के पीपाड़ और नागौर के रियांबड़ी से बजरी का अवैध खनन कर अजमेर-नागौर तथा जोधुपर-नागौर हाइवे से आठ जिलों में आपूर्ति की जा रही है। रोजाना 300 से 400 गाडि़यां नेशनल हाइवे से होकर गुजर रही है। पुलिस ने अभियान में तीन माह में 200 से ज्यादा डंपर पकड़े है।
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नागौर सदर थाने में खड़े बजरी के डंपर

नागौर सदर थाने में खड़े बजरी के डंपर

दिनेश कुमार स्वामी@ नागौर. जोधपुर और नागौर जिले में लूणी नदी के बहाव क्षेत्र में बजरी माफिया दिन-रात अवैध खनन कर रहा है। नागौर के रियांबड़ी और जोधपुर के पीपाड़ क्षेत्र में अवैध रूप से निकाली बजरी की ढुलाई के दो प्रमुख मार्ग बन गए है। जोधपुर-नागौर तथा अजमेर-नागौर नेशनल हाइवे पर रोजाना करीब 400 डंपर और ट्रोले बजरी का अवैध परिवहन कर रहे है। नागौर पुलिस तीन महीने से अभियान चलाकर दोनों हाइवे पर अवैध बजरी से भरे 200 से ज्यादा डंपर-ट्रोले जब्त कर चुकी है। जो इस पूरे काले कारोबार का खुलासा कर रहे है।

पत्रिका की पड़ताल में सामने आया कि पुलिस हाइवे से हो रही अवैध ढुलाई पर नकेल तो कस रही है लेकिन जहां से बजरी खनन हो रहा है, वहां संगठित माफिया हावी है। खनन विभाग मूकदर्शक और बेबस बना बैठा है। नागौर पुलिस ने 140 एफआइआर दर्ज कर 155 लोगों को गिरफ्तार किया है। हर कार्रवाई में पुलिस ने खनन विभाग को जब्त वाहन, खनिज व चालक-परिचालक का ब्यौरा सौंपा। परन्तु समस्या की जड़ पर प्रहार नहीं हो पाया।

चंद घंटों में माल पांच जिलों तक

नागौर के मेड़ता, डेगाना व रियांबड़ी उपखण्ड में लूणी नदी बहाव क्षेत्र में खनन माफिया दिन-रात बजरी खोदकर अवैध परिवहन कर रहा है। उन्हें अजमेर-नागौर नेशनल हाइवे खनन क्षेत्र के नजदीक से होकर गुजर रहे होने का फायदा मिल रहा है। अवैध बजरी से भरे डंपर व ट्रोले हाइवे पर चढ़ने के कुछ ही घंटों में प्रदेश में पांच-छह जिलों तक बजरी पहुंचा रहे है।

यहां खप रहा अवैध खनन

लूणी नदी क्षेत्र की बजरी की जयपुर, नागौर, डीडवाना-कुचामन, झुंझनूं, सीकर, बीकानेर, श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिले में सबसे ज्यादा मांग है। इन जिलों में बजरी के दाम खनन क्षेत्र से गाड़ी भराई के रेट से पांच गुणा तक मिलते है। अजमेर-नागौर हाइवे और जोधपुर-नागौर हाइवे से इन जिलों का सीधा हाइवे टू हाइवे जुड़ाव है। यही खनन माफिया के लिए मुफीद साबित हो रहा है।

प्रदेश में पुलिस कार्रवाई का बनाया रिकॉर्ड

नागौर पुलिस अधीक्षक आशाराम चौधरी ने पत्रिका से बातचीत में बताया कि नागौर पुलिस ने खनिज के अवैध परिवहन पर बीते चार माह करीब 140 एफआइआर, 150 ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी और 200 से ज्यादा वाहनों से 4000 टन बजरी जब्त की है। यह पूरे प्रदेश में खनिज के अवैध परिवहन पर कार्रवाई का रिकॉर्ड है। खींवसर होकर आ रही बजरी जोधपुर जिले में खोदी जा रही है। वहीं मेड़ता-डेगाना व रियांबड़ी उपखण्ड के अंतिम छोर और पाली जिले से सटी सीमा से बजरी आ रही है। यह सही है कि दोनों नेशनल हाइवे का उपयोग अवैध खनिज परिवहन में होना सामने आ रहा है। इन्हीं पर पुलिस निगरानी रख नकेल भी कस रही है।

पर्यावरणीय संकट: डेढ़ मीटर की जगह 10 मीटर खुदाई

खनिज विभाग ने नागौर जिले में पड़ने वाले लूणी नदी के क्षेत्र में बजरी खनन की पांच लीज दे रखी है। यह लीजें रियांबड़ी, झींटिया, आलनियावास, जसनगर में है। खनन नियमों के तहत नदी क्षेत्र में डेढ़ मीटर गहराई तक ही बजरी का खनन किया जा सकता है। परन्तु यहां 9-10 मीटर तक खोदा गया है। इससे पर्यावरणीय संकट खड़ा हो गया है। बारिश का पानी नीचे कच्चा मुड का पैंदा निकलने से भूमि सोख लेती है। पहले यही बरसाती पानी भूमि की ऊपरी पतरों में नमी कायम रखता था। जिस पर किसान खेती करते है। जिससे चिंतित क्षेत्र के किसान लगातार आंदोलन भी कर रहे है।

वैध पर लिमिट, अवैध अनलिमिटेड

पांच साल के लीज पट्टे में 1 लाख 20 हजार से 1 लाख 80 हजार एमटी के बीच बजरी खनन की लिमिट तय है। यानि नागौर जिले की पांच लीज में सात-आठ लाख एमटी बजरी का खनन होना चाहिए। परन्तु इस क्षेत्र से 400 से ज्यादा डंपर बजरी का परिवहन होना बताता है कि वैध खनन पर भले लिमिट हो, अवैध तो अनलिमिटेड चल रहा है।

जांच कमेटी में भी हो चुका खुलासा

लूणी क्षेत्र के किसानों की ओर से अवैध बजरी खनन के खिलाफ आंदोलन करने पर चार महीने पहले जिला प्रशासन की कमेटी ने जांच की। इसमें खनन नियमों की अवहेलना, लीज से बाहरी क्षेत्र में अवैध खनन होने, माइनिंग प्लान के अनुरूप खुदाई नहीं होने जैसी खामियां उजागर हुई। खनिज विभाग ने 15 करोड़ रुपए की पैनल्टी लगाकर अवैध खनन पर पर्दा डालने का प्रयास किया। इसके बाद भी अवैध खनन पर कोई नकेल नहीं लगी है।

यहां खप रही अवैध बजरी

जयपुर, सीकर, झुंझुनूं, डीडवाना-कुचामन, नागौर, बीकानेर, श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ में नागौर जिले से बजरी जा रही है। जोधपुर की बजरी की खपत नागौर जिले में ज्यादा होती है। जबकि मेड़ता-डेगाना क्षेत्र वाली बजरी जयपुर सहित अन्य जगह जा रही है। यह गुणवत्ता प्रदेश में नम्बर वन होने से डिमांड और दाम दोनों ही ज्यादा है।

जनता को नहीं मिलती सस्ती बजरी

सरकार ने बजरी खनन की लीज देने के पीछे मंशा रही कि इससे आमजन को आवास आदि निर्माण के लिए सस्ती बजरी मिलेगी। इसके लिए बजरी के दाम भी 250 से 300 रुपए प्रति टन के तय गए। परन्तु खनन क्षेत्र से गाड़ी 500 रुपए टन की दर पर भरी जाती है। जो गतंव्य पर पहुंचने पर 1200 से 1500 रुपए टन के भाव बिकती है। यानि आम आदमी को तीन गुणा भाव देने पड़ते है।

एसआइटी में शामिल, वसूल रहे जुर्माना

खनिज विभाग, पुलिस, परिवहन, वन और राजस्व विभाग की संयुक्त एसआइटी गठित है। पुलिस जो भी बजरी से भरी गाड़ी पकड़ती है, उसकी जांच खनिज विभाग की टीम करती है। खनिज लीगल था या नहीं, यह तय कर जुर्माना वसूली, कानूनी कार्रवाई करते है। अवैध खनिज पर रॉयल्टी से दस गुणा जुर्माना व गाड़ी की कम्पाउंड राशि वसूलते है। लूणी नदी क्षेत्र के खनन एरिया में निगरानी के लिए गोटन में एएमई कार्यरत भी है।
- जयप्रकाश गोदारा, एमई खनिज विभाग नागौर