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इनके लिए अब घाटे का सौदा नहीं कृषि, आधुनिक तकनीक व नवाचार से कृषि को बना दिया फायदे का सौदा

कोई रेगिस्तान में उगा रहा अनार तो कोई बिना ट्यूबवेल के जीरा व अन्य रबी फसलें- नागौर के युवा कृषक विदेशों तक फैला रहे अपने उत्पादों की महक

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अशोक जांगू के कृषि उत्पाद हो रहे निर्यात

अशोक जांगू के कृषि उत्पाद हो रहे निर्यात

नागौर. आधुनिक तकनीक एवं नवाचारों से जिले के कई युवा किसान खेती को फायदे का सौदा बना रहे हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो जिन किसानों ने परम्परागत खेती की बजाए रिस्क उठाकर नवाचार किया, उनके लिए अब कृषि घाटे का सौदा नहीं है। जिस जमीन पर वे परम्परागत तरीकों से खेती करके लागत भी नहीं निकाल पा रहे थे, उसी जमीन पर सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर व आधुनिक तकनीक से लाखों कमा रहे हैं।
कृषि में पेस्टीसाइड व उरर्वकों के अंधाधुंध उपयोग से खान-पान की चीजों में बढ़ रही केमिकल की मात्रा से बीमारियों से घिर रहे इंसान को शुद्ध खान-पान की तलाश है और ऐसे में जो किसान जैविक खेती कर रहे हैं, उन्हें उपज का दाम भी अच्छा मिल रहा है। खाने के तेल में जहां दिनों-दिन पाम ऑयल की मात्रा बढ़ रही है, वहां स्वास्थ्य के लिए लाभदायक कच्ची घाणी के तेल की डिमांड भी बाजार में बढ़ रही है, इसलिए गांवों में जागरूक युवा घाणियां लगाकर तेल निकाल रहे हैं। जिले में खेती में नवाचार कर चुनिंदा युवाओं ने किसानों के समक्ष उदाहरण पेश किए हैं, जिनसे पत्रिका ने बातचीत कर जाने सफलता के राज -

अशोक जांगू के कृषि उत्पाद हो रहे निर्यात
कालड़ी गांव में प्रगतिशील किसान अशोक जांगू की ओर से विकसित किए गए बगीचे व फूड पार्क में तैयार होने वाले कृषि उत्पाद विदेशों में निर्यात हो रहे हैं। जांगू देसी गाय का घी के साथ तिल, सरसों व मूंगफली का तेल निकालकर विदेशों तक पहुंचा रहे हैं। जांगू बताया कि कच्ची घाणी के तेल की डिमांग इतनी है कि वे पूर्ति नहीं कर पा रहे हैं, जबकि दाम भी अच्छे हैं। बाहर जाने वाला तिल का तेल 400 रुपए प्रति लीटर बिक जाता है, जबकि स्थानीय स्तर पर सवा तीन सौ रुपए प्रति लीटर तक बेचते हैं। जांगू तो यहां तक कहते हैं कि हमें सर्दी में काले तिल का तेल और गर्मी में सफेद तिल का तेल खाने में काम लेना चाहिए। बाजार में आने वाले खाद्य तेलों में पाम ऑयल की मात्रा ज्यादा रहती है, जो बीमारियों का घर है। यदि किसी गांव में युवा घाणी लगा ले तो आराम से जीवन यापन कर सकते हैं। गौरतलब है कि जांगू अनार, घी, दालें आदि भी एक्सपोर्ट करते हैं। घी की कीमत 1500 रुपए प्रति किलो से 3200 रुपए प्रति किलो तक है।

नवाचार से आ रहा बदलाव
कृषि में नवाचार से बदलाव आ रहा है। खेती को फायदे का सौदा बनाने के लिए उद्यानिकी विभाग की ओर से किसानों को प्रोत्साहित करने को लेकर विभिन्न योजनाओं के तहत अनुदान दिया जा रहा है। यही वजह है कि पिछले कुछ वर्षों में जिले में उद्यानिकी का रकबा बढ़ा है। कई युवा कृषकों ने खेती में अनुकरणीय काम किया है।
- अर्जुनराम मुण्डेल, कृषि अधिकारी, उद्यानिकी विभाग, नागौर

किसान उठाएं योजनाओं का फायदा
किसानों को समय-समय पर सरकार की योजनाओं का फायदा उठाने के लिए प्रेरित किया जाता है। साथ ही जिन किसानों ने योजनाओं का लाभ उठाकर कृषि में बदलाव किया है, उनसे भी रू-ब-रू करवाते हैं।
- हरीश मेहरा, उप निदेशक, उद्यानिकी विभाग, नागौर

भाकरोद के ओमप्रकाश ने उगाया जैविक जीरा
भाकरोद गांव के ओमप्रकाश ने 40 बीघा खेत में दो साल पहले सामुदायिक जल स्रोत (डिग्गी) बनाया, ताकि उसमें बारिश का पानी भर सकें। इसमें उन्हें पांच लाख का अनुदान मिल गया। इसके साथ छह-छह बीघा में बेर व नीम्बू का बगीचा भी लगाया। सरकारी अनुदान से पैक हाउस भी बनाया, जिसमें करीब 5 लाख का खर्च आया। डिग्गी के पानी से सिंचाई करने के लिए 5 एचपी का सौर ऊर्जा संयंत्र भी लगाया, जिसमें भी उद्यान विभाग ने 60 प्रतिशत अनुदान दिया। ओमप्रकाश ने बताया कि उन्होंने अभी 30 बीघा में जैविक जीरा की खेती कर रखी है और फसल भी अच्छी है। गत वर्ष जब बाजार में जीरा के 20 हजार रुपए प्रति क्विंटल भाव थे, तब उन्होंने अपना जैविक जीरा 30 हजार रुपए क्विंटल में बेचा था, इस बार सामान्य जीरा के भाव 30 हजार से अधिक है, ऐसे में यदि दो क्विंटल प्रति बीघा उत्पादन भी होता है तो कम से कम 20 लाख का जीरा हो जाएगा। जबकि उनकी अन्य 150 बीघा जमीन में खरीफ में पूरी पांच लाख की पैदावार भी नहीं हुई। खेती में नवाचार का यही फायदा है।