
Happy Mother's Day 2019 : खुद बारहवीं से आगे नहीं पढ़ पाई तो बेटियों को बना दिया आईएएस, आईपीएस
संघर्ष कर बेटियों को बनाया अधिकारी, माताओं के लिए अनुकरणीय मिसाल है जयश्री नेहरा, संघर्ष का परिणाम है कि आज तीनों बच्चे हैं आईएएस, आईपीएस
डीडवाना. ‘मुझे न्यूज पेपर पढऩे व टीवी पर खबरें देखने का बहुत शोक है, जब भी किसी महिला अधिकारी का इंटरव्यू या महिला अधिकारी को देखती तो मुझे बहुत अच्छा लगता था। तब मन में आता था कि काश मेरी बेटिया भी ऐसी बने।’ यह कहना है शहर के नागौर रोड के पास रहने वाली राजश्री नेहरा का। यूं तो सभी माताएं अपने बच्चों का लालन-पालन व पढ़ाई-लिखाई बढिया तरीके से करवाना चाहती है, लेकिन जिन विषम परिस्थितियों में राजश्री नेहरा ने अपने बच्चों को सफलता के मुकाम पर पहुंचाया है, वह अपने आप में अनुकरणीय उदाहरण है। वर्तमान में राजश्री के तीनों बच्चे आईएएस व आईपीएस अधिकारी के पद पर कार्यरत है। राजश्री ने पत्रिका को बताया कि जब बच्चे छोटे थे तब यह सब सपने थे, सोचा नहीं था कि सपने सच हो जाएंगे।
तीनों बच्चे हुए सफल
नेहरा ने बताया कि निधि ने पांच साल तक रिर्जव बैंक ऑफ इंडिया में मैनेजर का जॉब किया। उसने आईएएस बनने का सपना देखा और पहली ही बार में सफल हो गई। निधि वर्तमान में मुंबई महानगरपालिका में जॉइंट कमिश्नर के पद पर है। छोटी बेटी विधि आईएएस की तैयारी कर रही थी, दूसरे प्रयास में उसका आईपीएस के लिए सलेक्शन हो गया तो जागती आंखों के मेरे सपने सच हुए। यूं लगा जैसे छप्पर ही फट गया। विधि अभी सुपरिडेन्ट ऑफ पुलिस है । बेटा प्रवीण नेहरा भी जूनागढ में डीडीओ (आईएएस) ऑफिसर है।
एक बेटी आईएएस तो दूसरी आईपीएस
उन्होंने बताया कि पति सोमदत्त नेहरा (जलदाय विभाग में सहायक अभियंता ) सरकारी नौकरी के कारण कामकाज में व्यस्त रहने से बच्चों की पढाई पर ध्यान नहीं दे पाते थे। एेसे में खुद बच्चों पर ध्यान देना शुरू किया। बड़ी बेटी निधि चौधरी को पढऩे और अव्वल रहने का हमेशा से शोक था। पढऩे की इच्छा शक्ति कभी कमजोर हुई ही नहीं। राजस्थान विश्वविद्यालय में गोल्ड मेडलिस्ट निधि नेहरा ने प्रतियोगी परीक्षाएं देनी शुरू की पहला कम्पीटिशन ऑडिट एण्ड एकाउण्टस के लिए दिया और उसमें सलेक्शन हो गया। दो महीने इस पद पर कार्य करने के बाद आरबीआई में चयन हो गया।
खुद से ली प्रेरणा और किया संघर्ष
राजश्री ने बताया कि वे स्वयं हायर सैकण्डरी तक पढी थी और शादी कर दी। उस समय अफसोस होता था कि काश मैं भी आगे पढ़ पाती, जॉब कर पाती। लेकिन सपना सच नहीं हुआ क्योंकि उस समय में लड़कियों को पढ़ाना मुश्किल हुआ करता था। पढ़ाई का बिल्कुल भी माहौल नहीं था। स्वयं के बच्चों में अपने सपने को पूरा करने का सपना वो देखने लगी। राजश्री के अनुसार बच्चियों की योग्यता बचपन से ही नजर आने लगी, पांचवी-छठी कक्षा में ही भाषण आदि प्रतियोगिताओं में भाग लेकर उन्होंने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन शुरू कर दिया था। धीरे-धीरे बच्चियां बड़ी होने लगी तो उनकी शादी की चर्चाएं शुरू हो गई। लेकिन मुझे ऐसा लगता था कि यदि अभी से इनको बंधन में बांध दिया तो मैं अपने आप को माफ नहीं कर पाऊंगी।
संदेश
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में लड़कियों का पढऩा और अपने पैरों पर खड़ा होना बहुत जरूरी है। लड़कियां घर की चारदीवारी से निकल प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ रही है और बढ़ते रहना चाहिए। समाज में बराबरी का अधिकार पाने के लिए प्रत्येक फिल्ड में आगे आना चाहिए। मां-बाप को यह सोचना चाहिए कि हम अपने बेटे व बेटी में भेद नहीं कर बच्चियों को भी बच्चों की तरह सपोर्ट करे।
Updated on:
11 May 2019 11:07 pm
Published on:
11 May 2019 10:51 pm
