नागौर. गुरु पूर्णिमा गुरुवार को धूमधाम से मनाई गई। इस मौके पर गुरुजनों का शिष्यों ने पूजन कर उनसे आशीर्वाद मांगा। दिन भर कार्यक्रम का दौर चला। शाम को भी धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन किए गए।
संत लिखमीदास का किया पूजन पूजन
अमरपुरा में संत लिखमीदास की जयंती स्मारक स्थल पर मनाई गई। श्रद्धालुओं ने संत लिखमीदास का पूजन किया। इस दौरान राठौड़ी कुआं से पैदल यात्री के रूप में श्रद्धालुओं का दल स्मारक स्थल पहुंचा। यह दल नया दरवाजा, बाड़ी कुआं, गांधी चौक, दिल्ली दरवाजा व विजय फिल्म चौक से होते हुए शाम को पहुंचा। श्रद्धालुओं के पूजन से माहौल आस्था के रंग में रंगा रहा। शाम को हुई आरती में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। इसी क्रम में जोधपुर के भोपालगढ़ से भी वाहन रैली के साथ पहुंचे श्रद्धालुओं के दल ने पूजन किया। इस दौरान कैलाश माली एवं शोभा माली ने मारवाणी भजनों की एक से बढकऱ एक प्रस्तुतियां दी। संस्थान की ओर से हुए आयुर्वेदिक नि:शुल्क चिकित्सा शिविर में डॉ. नरेन्द्र पंवार आदि ने अपनी सेवाएं दी। रोगियों की जांच कर उनको दवाएं भी नि:शुल्क दी गई। इस दौरान पांचाराम सोलंकी, हुक्माराम देवड़ा, रामजीवन सोलंकी, कमलेश कच्छावा, मांगीलाल भाटी, सुनील लखारा, नरेन्द्र देवड़ा आदि मौजूद थे।
गुरु का किया नमन
नागौर. जोधपुर रोड स्थित गो-चिकित्सालय में गुरुवार को गुरु पूर्णिमा मनाई गई। इस मौके पर स्वामी कुशालगिरी ने अपने गुरु का पूजन किया। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन करते हुए गुरु को श्रद्धा सुमन अर्पित किया। इसके पश्चात शिष्यों ने स्वामी कुशालगिरी का पूजन किया। पाद प्रक्षालन करने के साथ ही दीप प्रज्जवलित कर 21 सौ थालियों के साथ उनकी आरती की, और गुरु को धारण करते हुए मंत्र दीक्षा भी प्राप्त की। इस दौरान चिकित्सालय परिसर में दिन भर भजन, कीर्तन एवं सत्संग का दौर चलता रहा। इस दौरान स्वामी कुशालगिरी ने शिष्यों को संबोधित करते हुए कहा कि ईश्वर प्राप्ति के लिए त्याग की भावना होना जरूरी है। इसके लिए सतगुरू धारण व सतगुरू की आज्ञा मानना व कठिन साधनाओं से गुजरना पड़ता है। उन्होंने शिकारी हंस और कौआ का प्रसंग उद्धरण देते हुए समझाया कि संसार में संगति का सदैव ध्यान रखना चाहिए। गुरु एवं शिष्य के परस्पर संबंधों की व्याख्या करते हुए कहा कि अंधकार से रोशनी की ओर ले जाने का कार्य गुरु करता है। गुरु के बिना न तो आगे बढ़ सकते हैं, और न ही जीवन का कोई अर्थ रह जाता है। उन्होंने कहा कि लोगों को चंदन की तरह महकने का कार्य करना चाहिए। यानि की अपने सद्गुणों एवं कर्तव्यों से वह चंदन की तरह बन सकता है। कार्यक्रम के दौरान भामाशाह बालकिशन गहलोत, दिनेश सांखला, प्रवीण कुमार सोलंकी, रामदेव खोड़, महेन्द्र सिंह सिसोदिया व नरेन्द्र देवड़ा आदि ने सहयोग राशि दी। इस दौरान आनन्द परिवार सेवा समिति की ओर से मनजीतपाल सिंह आदि की टीम ने स्वामी कुशालगिरी को तलवार भेंट कर उनका सम्मान किया।
गुरु अज्ञान रूपी अंधकार से ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर ले जाते है
नागौर. कनक आराधना भवन में चल रहे प्रवचन में गुरु पूर्णिमा की महत्ता समझाई गई। साध्वी प्रियंकरा ने कहा कि जीवन में गुरु का विशेष महत्व होता है। भारतीय संस्कृति में गुरु को भगवान से भी बढकऱ माना जाता है। गुरु हमें अज्ञान रूपी अंधकार से ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर ले जाते हैं। गुरु के ज्ञान और संस्कार के आधार पर ही उसका शिष्य ज्ञानी बनता है। गुरु की महत्ता को महत्व देते हुए प्राचीन धर्मग्रन्थों में भी गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान बताया है। एक व्यक्ति गुरु का ऋण कभी नहीं चूका पाता है। गुरु के ज्ञान की कोई सीमा नहीं होती है। हमारा जीवन गुरु के अभाव में शून्य होता है। गुरु अपने शिष्यों से कोई स्वार्थ नहीं रखते हैं। उनका उद्देश्य सभी का कल्याण ही होता है। इस दौरान छतरियां दादावाड़ी में कुशल मण्डल एवं विचक्षण महिला मंडल की ओर से दादा गुरुदेव की पूजा पढ़ाई गई। इस दौरान गौतमचंद, शकुंतला देवी, प्रवीण कुमार नाहर एवं राजेन्द्र कुमार कोठारी आदि थे।
गुरु पूर्णिमा उत्सव मनाया
नागौर. रामपोल में गुरु पूर्णिमा धूमधाम से मनाई गई। इस मौके पर शिष्यों ने रामनामी महंत मुरलीराम महाराज का पूजन करते हुए उनका आशीर्वाद लिया। इस मौके पर महंत मुरलीराम महाराज ने कहा कि सत्संग ही भक्तों का कमाया हुआ धन है। जब गुरु कृपा करते हैं तो सत्संग में कमाया हुआ भजन का धन प्रेमियों को लुटा देते हैं। सभी हंस नहीं हो सकते हैं। बगुला तो सभी जगहों पर मिल जाएंगे, लेकिन हंस हर जगह नहीं मिलता है। राम नाम के मोती का सेवन करने के लिए हंस बनना पड़ेगा, तभी यह मिल पाएगा। उन्होंने कहा कि शिष्यों को पूर्ण रूप से विकसित करने का कार्य गुरु ही कर सकता है। गुरुओं की महत्ता सर्वविदित रही है। वर्तमान में भी शिष्यों को अपने गुरु में आस्था रखनी पड़ेगी, तभी वह समग्र रूप से आगे बढ़ सकते हैं। इस दौरान रामेश्वर भाकरोद, पवन वैष्णव, विनय वैष्णव, कैलाश वैष्णव, नंदकिशोर बजाज, कांतिलाल कंसारा, इच्छाराम कंसारा एवं रामेश्वरलाल आदि मौजूद थे।
गुरु की महत्ता समझने पर ही कल्याण
नागौर. सुगन सिंह सर्किल स्थित रामद्वारा में गुरु पूर्णिमा धूमधाम से मनाई गई। इस मौके पर पहुंचे शिष्यों ने संत भागीरथराम शास्त्री का पाद प्रक्षालन करने के साथ उनका वैदिक मंत्रोच्चार से पूजन किया। इसके पश्चात उनका वंदन करते हुए माल्यार्पण किया। इस दौरान संत भागीरथराम शास्त्री ने कहा कि आदि से लेकर अब तक के समय में गुरु की महत्ता श्रेयस्कर रही है। गुरु के बिना तो समग्र रूप से उन्नति का मार्ग प्रशस्त ही नहीं हो सकता है। प्राचीन काल से लेकर अब तक के समय का उद्धरण देते हुए समझाया कि वह चाहे अर्जुन हो या फिर कर्ण अथवा भगवान राम, सभी को उनके गुरु ने सुदृण बनाने का कार्य किया।
गुरु का किया पूजन
नागौर. बख्तासागर स्थित केशवदास बगीची में भी गुरु पूर्णिमा पर शिष्यों ने महंत जानकीदास का पूजन किया। इस मौके पर महंत जानकीदास ने कहा कि गुरु एवं शिष्य का संबंध बेहद प्रगाढ़ होता है। गुरु का प्रयास अपने शिष्य को समग्र रूप से आगे बढ़ाने का रहता है। इसलिए शिष्यों को आस्था भाव से गुरु के प्रत्येक बात को उनकी आज्ञा मानकर स्वीकार करना चाहिए। इस दौरान उन्होंने कहा कि भगवान शिव भी गुरु को ही महत्व देते हैं। वह स्पष्ट रूप से कहते हैं कि जो गुरु का अनादर करता है वह उनकी भक्ति का पात्र नहीं हो सकता है। इसलिए गु़रु की महत्ता सर्वोपरि है।