
Civilian in support of JLN Hospital doctor
नागौर. राज्य सरकार के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने अजमेर में लोकसभा उपचुनाव को लेकर नागौर जिले के विभिन्न सरकारी अस्पतालों से किए गए डॉक्टरों के तबादले से चिकित्सा व्यवस्था चरमराने लगी है। यहां तक कि जिला मुख्यालय के जेएलएन अस्पताल से एक फिजिशियन व एक ईएनटी विशेषज्ञ का तबादला करने से व्यवस्था बेपटरी होने की आशंका बढ़ गई है।
मुख्यालय के जेएलएन अस्पताल के डॉक्टर सुरेन्द्र भाकल का तबादला निरस्त करने की मांग को मंगलवार सुबह करीब 10 बजे सैकड़ों नागरिक अस्पताल परिसर में एकत्र हो गए तथा शांतिपूर्वक रैली निकालकर पीएमओ डॉ. अपूर्व कौशिक को ज्ञापन सौंपा। नागरिकों का कहना था कि अस्पताल में पहले से डॉक्टरों की कमी है, जिसके लिए और डॉक्टर लगाने की मांग लम्बे समय से की जा रही है। इसके बावजूद सरकार ने उल्टे यहां लगे डॉक्टरों के तबादले कर परेशानी बढ़ाने का काम किया है।
इस दौरान नागरिकों ने हाथों में तबादला निरस्त करने एवं सरकार के निर्णय के विरोध की नारे लिखी तख्तियां ले रखी थी। नागरिकों का कहना था कि यदि डॉ. भाकल का तबादला निरस्त नहीं किया गया तो वे आंदोलन करेंगे।
आधा दर्जन डॉक्टर रिलीव
चिकित्सा विभाग ने लोकसभा उप चुनाव को लेकर गत सप्ताह आदेश जारी कर जिलेभर से 12 डॉक्टरों का स्थानांतरण अजमेर जिले में अलग-अलग स्थानों पर किया था। आदेश जारी होने के बाद नागौर सीएमएचओ डॉ. सुकुमार कश्यप ने बताया कि जिले से करीब 6 डॉक्टरों को रिलीव किया जा चुका है। हालांकि चिकित्सा विभाग के अधिकारी चिकित्सा व्यवस्था सुचारू होने की बात कह रहे हैं, लेकिन जहां से डॉक्टरों को रिलीव किया गया है, वहां स्थिति काफी बिगड़ गई है।
गंभीर बीमारियों का कैसे होगा ईलाज
जेएलएन अस्पताल पहुंचने वाले ह्रदय रोग के मरीजों का ईलाज भी डॉ. भाकल के भरोसे है। जिले के कई क्षेत्रों के लोग यहां ईलाज के लिए आते हैं, लेकिन तबादले के बाद अब ह्रदय रोग से सम्बधित मरीज परेशान होंगे। बासनी निवासी महिला मरीज हनी ने पत्रिका टीवी को बताया कि डॉ. भाकल द्वारा किए चैकअप व राय के बाद उसका जयपुर में वॉल का ऑपरेशन हुआ। ऑपरेशन का ढाई लाख रुपए का खर्चा थाम लेकिन डॉ. भाकल ने सरकारी योजना के बारे में बताया और जेएलएन से रेफर किया तो जयपुर में वॉल का ऑपरेशन मुफ्त में हो गया। रायधनु के सोहनराम ने बताया कि उसे हार्ट अटैक आया , अगर समय पर ईलाज नहीं मिलता तो उसके परेशानी खङी हो जाती। परिजन उसे नागौर के जेएलएन अस्पताल लेकर आए। यहां डॉ. भाकल ने उसका उपचार किया।
सीसीयू वार्ड व एनसीडी शिविर पङेंगे खटाई में
प्रदर्शन करने वाले आम लोगों ने कहा कि जेएलएन अस्पताल में बने सीसीयू वार्ड में आने वाले गंभीर रोगियों को जीवन रक्षा (स्ट्रेप्टोकाइनेन इंजेक्शन) लगाने व धड़कन असंतुलित होने पर डीसी सोक लगाकर मरीजों का उपचार भी डॉ. सुरेंद्र भाकल द्वारा किया जा रहा है। अस्पताल में प्रत्येक बुधवार को लगने वाले एनसीडी शिविर में (कैंसर, डायबिटीज व बीपी) के मरीजों की जांच व उपचार की जिम्मेदारी भी डॉ. भाकल को ही सौंपी हुई है। वहीं डायलिसिस की मशीनें भी नागौर के जेएलएन अस्पताल में आ चुकी है। अभी डायलिसिस सेवा शुरु करने के प्रयास शुरु ही हुए हैं और इससे पहले ही स्पेशलिस्ट फिजिशियन का तबादला हो चुका है।
कौन संभालेंगा 300 मरीजों का आईटडोर
जेएलएन अस्पताल से फिजिशयन डॉ. भाकल का स्थानांतरण अजमेर के लूलवा अस्पताल में होने से यहां कई चिकित्सा व्यवस्थाएं ठप होने लगी है। आज भी इसका असर देखने को मिला है। डॉ. भाकल आज अस्पताल नहीं पहुंचे। अस्पताल में मौसमी बीमारियो से सम्बधित मरीजों की भीड़ लग गई। एकमात्र डॉक्टर एसएस कालवी मरीजों को संभालने में जुटे रहे। मौसमी बीमारियों सहित फिजिशियन डॉक्टर के ईलाज से जुड़े मरीजों की भारी भीड़ के कारण एक डॉक्टर से सारी व्यवस्था संभालना असंभव हो गया है। इन दिनों मौसमी बीमारियों का सीजन होने के कारण प्रतिदिन करीब एक हजार से अधिक का आउटडोर एवं 60 से 70 का इनडोर रहता है। इनमें से फिजिशियन डॉ. भाकल एवं डॉ. एसएस कालवी 300 से अधिक मरीज प्रतिदिन देखते हैं तथा वार्ड का राउंड भी करते हैं।
मरीज नहीं चाहते तबादला हो
मरीज व परिजन दोनों ही नही चाहते कि डॉक्टर भाकल का तबादला हो। दय डॉक्टरों के कार्य से मरीज तथा परिजन भी संतुष्ट हैं। आम लोगों की माने तो ईलाज के साथ-साथ डॉक्टर का व्यवहार भी अच्छा है। वहीं बासनी निवासी व्यक्ति ने कहा कि दोनों ही डॉक्टर समय पर अस्पताल पहुंचते हैं तथा ईलाज करते हैं। तबादला होने से चिकित्सा सेवा प्रभावित होगी।
Published on:
17 Oct 2017 12:30 pm
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