
ओवेरी को प्रदर्शित करती हुई प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)
नागौर. कृषि प्रधान नागौर जिला अब गंभीर स्वास्थ्य चुनौती का सामना कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में जिले में कैंसर के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विशेष रूप से महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर, ओवेरियन कैंसर और सर्वाइकल कैंसर के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। चिकित्सकों का कहना है कि जिस तरह कभी पंजाब और राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले को कैंसर प्रभावित क्षेत्र माना जाता था, उसी तरह के संकेत अब नागौर जिले में भी दिखाई देने लगे हैं। जेएलएन अस्पताल में हर माह 60 से अधिक लोगों की कीमोथैरेपी की जा रही है, जबकि औसतन हर माह 5 से 7 नए मरीज पहुंच रहे हैं। कई मरीज ऐसे भी हैं, जो जोधपुर व बीकानेर में उपचार करवा रहे हैं।
फसलों में अंधाधुंध कीटनाशकों का उपयोद
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार फसलों में अंधाधुंध कीटनाशकों और रासायनिक उर्वरकों का उपयोग, खाद्य पदार्थों में मिलावट तथा दूध और मांस के उत्पादन में एंटीबायोटिक दवाओं के अत्यधिक इस्तेमाल का असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। इन कारणों से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।
महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर, ओवेरियन कैंसर व सर्वाइकल कैंसर ज्यादा
नागौर सहित पूरे प्रदेश में पुरुषों में मुंह, गले और फेफड़ों के कैंसर के मामले अधिक सामने आ रहे हैं, जबकि महिलाओं में स्तन कैंसर (ब्रेस्ट कैंसर), सर्वाइकल कैंसर (बच्चादानी के मुंह का कैंसर) और ओवेरियन कैंसर (अंडाशय का कैंसर) प्रमुख बीमारी बनकर उभरा है।
ये कारण बन रहे प्रमुख वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि तंबाकू और शराब का सेवन, बदलती जीवनशैली, प्रोसेस्ड फूड का बढ़ता उपयोग और पर्यावरणीय प्रदूषण भी कैंसर के मामलों में वृद्धि के प्रमुख कारण हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में तंबाकू और गुटखे का सेवन अधिक होने तथा बीमारी का देर से पता चलने के कारण स्थिति और गंभीर हो जाती है। कई मरीज तब अस्पताल पहुंचते हैं जब बीमारी अंतिम चरण में पहुंच चुकी होती है। इससे उपचार जटिल हो जाता है।
जेएलएन में कीमोथैरेपी की सुविधा
राहत की बात यह है कि नागौर के जेएलएन अस्पताल में कैंसर रोगियों के लिए विशेष वार्ड संचालित किया जा रहा है। यहां पिछले काफी समय से कीमोथैरेपी और अन्य उपचार सुविधाएं निशुल्क उपलब्ध हैं। पहले मरीजों को कीमोथैरेपी के लिए बीकानेर, जोधपुर, अजमेर या जयपुर जाना पड़ता था। अब स्थानीय स्तर पर सुविधा मिलने से समय और खर्च दोनों की बचत हो रही है।
बचाव के लिए नियमित जांच जरूरी
चिकित्सकों का कहना है कि कैंसर से बचाव के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच बेहद जरूरी है। महिलाओं को हर माह स्वयं स्तन परीक्षण करना चाहिए तथा 40 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को समय-समय पर कैंसर स्क्रीनिंग करवानी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते जागरूकता, नियमित जांच और स्वस्थ जीवनशैली को अपनाया जाए तो कैंसर के बढ़ते खतरे पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। शुरुआती जांच और लक्षणों को पहचानकर इनका सफल इलाज संभव है।
जिले में बढ़ रहे कैंसर मरीज
नागौर जिले में कैंसर मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जेएलएन अस्पताल में हर महीने औसतन 60 मरीजों की कीमोथैरेपी की जा रही है। यहां मुख्य रूप से पुरुषों में मुंह व लंग्स कैंसर और महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले सबसे ज्यादा सामने आ रहे हैं।
- डॉ. दिनेश मिश्रा, जिला नोडल अधिकारी (कैंसर), जेएलएन अस्पताल, नागौर
Updated on:
09 Jun 2026 09:39 am
Published on:
09 Jun 2026 09:39 am
