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डीडवाना में नानी बाई रो मायरो कथा प्रारम्भ

शहर में निकली कलश यात्रा

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Kalash Yatra In didwana

Kalash Yatra In didwana

डीडवाना. राधाकृष्ण सत्संग समिति के तत्वावधान में आनन्द भवन में रविवार से नानी बाई रो मायरो कथा का शुभारम्भ हुआ। इस मौके पर शहर में भव्य कलश यात्रा भी निकाली गई, जिससे भारी संख्या में महिलाओं ने शिरकत की। शहर के झालरिया मठ से प्रारम्भ हुई इस कलश यात्रा में महिलाएं पारम्परिक वेशभूषा में सिर पर सजे-धजे कलश रखकर कतारबद्ध तरीके से मंगलगीत गाते हुए चल रही थी। रथ में कथावाचक बाल व्यास मोनिका पारीक विराजित थी। इस दौरान शहर के प्रमुख मार्गों से शोभायात्रा निकाली। यात्रा का मार्ग में अनेक स्थानों पर पुष्प वर्षा कर तथा स्वागत किया गया। कथास्थल पर समिति सदस्य राजेन्द्र पटवारी, सुभाष गौड़, शिवशंकर पारीक, रामप्रसाद वैष्णव सहित अनेक सदस्यों ने कथावाचक मोनिका पारीक का अभिनन्दन किया।
ठाकुर की कृपा से जीवन सुखमय
इस अवसर पर विधिविधान के साथ कथा का शुभारम्भ हुआ। वाचन करते हुए मोनिका पारीक ने कहा कि भगवान की कृपा अगर किसी पर होती है तो निश्चित रूप से उस स्थान का वातावरण आनन्दमय एवं सुखमय हो जाता है। भगवान की महिमा का वर्णन शब्दों में नहीं समेटा जा सकता, बल्कि उनकी महिमा तो अपरम्पार है। भक्त नरसी का जन्म तलाजा गांव में ब्राह्मण कुल में हुआ था। उनके पिता का नाम कृष्ण ? दामोदर, माता का नाम लक्ष्मी था। वे जन्म से बोलना नहीं आता था, मगर भगवान की ऐसी असीम अनुकम्पा हुई कि उन्हें हरि स्मरण के लिए मुख से आवाज आने लगी। उन्होंने कहा कि भक्त नरसी खाता बहीं का काम करते थे। इसलिए उन्हें नरसी मेहता के नाम से भी जाना जाता था। उनका विवाह 9 वर्ष की आयु में मणिक गौरी से हुआ था। उन्होंने कहा कि प्रभू भक्त नरसी के मन में किसी प्रकार की कोई कामना नहीं थी। वे निष्काम भक्त थे और सच्चे हृदय से भगवान का स्मरण किया करते थे। उसी के फलस्वरूप भगवान श्रीविष्णु ने कृष्ण अवतार में उसकी पुकार सुनकर उसके हर दुख दर्द को अपना समझकर पूरा किया।
उन्होंने कहा कि भगवान की ही इच्छा थी कि नरसीजी की लाडली नानी बाई की पुत्री के विवाह में अदभुत मायरा होना चाहिए। भगवान सदैव भक्तों के हित के लिए हर प्रकार की सहायता करते है मगर किस रूप में कर दें, यह एक रहस्य है और जो इसे समझ लेता है, उसे स्वर्ग की प्राप्ति हो जाती है। भगवान लीलाओं के माध्यम से कलयुग के भक्तों को यह बता देना चाहते है कि ईश्वरीय ज्ञान एवं भक्ति ही मनुष्य का भला कर सकती है।