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-एक्सप्रेस ट्रेन का नहीं दिया जा रहा ठहराव
नागौर. रेलवे को करोड़ों का राजस्व देने वाला रेण रेलवे स्टेशन लम्बे समय से उपेक्षित है। यात्री सुविधाओं व रेलवे की नीति के लिहाज से रेण स्टेशन गाडिय़ों के ठहराव के लिए उपयुक्त होने के बावजूद रेलवे अधिकारी इसकी अनदेखी कर रहे हैं। अधिकारियों की इस अनदेखी का खमियाजा यहां आने वाले लकवाग्रस्त रोगियों व उनके परिजनों को भुगतना पड़ता है। ज्यादातर गाडिय़ों का रेण स्टेशन पर ठहराव नहीं होने से बुटाटी आने वाले यात्रियों को डेगाना या मेड़ता रोड स्टेशन पर ही उतरकर वाहनों से सफर करना पड़ता है। यात्रियों को होने वाली परेशानी को लेकर मानवाधिकार आयोग ने भी रेल प्रशासन को नोटिस दिया था।
पर्याप्त यात्री फिर भी ठहराव नहीं
जानकारी के अनुसार यात्रियों को डेगाना से करीब 52 किमी व मेड़ता रोड से 35 किमी का सफर तय कर बुटाटी पहुंचना पड़ता है जबकि बुटाटी धाम रेण से 15 किमी ही दूर है। मेड़तारोड 11 बजे बाद गाड़ी नहीं है। आरटीआई कार्यकर्ता दीनदयाल बंग को आरटीआई के जरिए रेलवे बोर्ड से अन्य स्टेशनों पर गाडिय़ों से होने वाली आय व संचालन नीति को लेकर मिली सूचना में चौंकाने वाली जानकारी मिली है। सूचना के अनुसार खुनखुना व गच्छीपुरा जैसे स्टेशनों पर नाम मात्र की आय के बावजूद कई गाडिय़ों का ठहराव है जबकि रेण में करोड़ों का राजस्व मिलने के बावजूद कई गाडिय़ों का ठहराव नहीं दिया गया है।
नाम मात्र की आय पर भी ठहराव
रेलवे प्रशासन द्वारा मिली जानकारी के अनुसार गाड़ी संख्या 22477/78 जोधुपर-जयपुर इंटरसिटी के गच्छीपुरा स्टेशन पर मई 16 में 64095, जून में 279540,जुलाई में 290733, अगस्त में 277733, सितम्बर में 272473, अक्टूबर में 267914, नवम्बर में 353066 रुपए की आय हुई। इसी गाड़ी के रेण स्टेशन पर ठहराव से जनवरी 17 में 90680, फरवरी में 200825, मार्च मे 219035, अप्रेल में 168370, मई में 271917, जून में 204295 व जुलाई में 254805 रुपए की आय हुई। दोनों स्टेशनों की तुलना की जाए तो रेण स्टेशन पर राजस्व अधिक मिलने के बावजूद टे्रनों का ठहराव कम है।
रेलवे को राजस्व से परहेज
इसी प्रकार खुनखुना स्टेशन पर 22421/22422 सालासर एक्सपे्रस के ठहराव से नाम मात्र की आय के बावजूद यहां कई एक्सप्रेस टे्रनों का ठहराव दिया गया है। खुनखुना स्टेशन पर जनवरी 2017 में 23950, फरवरी में 114580, मार्च में 120905, अप्रेल में 96350, मई में 60890, जून में 63655 व जुलाई में महज 49200 रुपए की आय हुई। इसके बावजूद यहां पर एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव दिया गया है जबकि अधिक राजस्व देने वाले रेण स्टेशन की उपेक्षा की जा रही है। रेण स्टेशन पर फिलहाल लम्बी दूरी की एक भी गाड़ी का ठहराव नहीं है। ऐसे में रेलवे राजस्व मिलने के बावजूद ठहराव देने से परहेज कर कर रहा है।
Published on:
25 Nov 2017 11:39 am
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