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शहीद देवताओं के समान: बाजौर

सैनिक शहीद यात्रा पहुंची नागौर, शहीदों के परिजनों का किया सम्मान

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नागौर. शहीद सुरेन्द्रसिंह की माता का सम्मान करते बाजौर एवं अन्य।

नागौर. 'आज हर गांव, हर शहर में मंदिर हैं, उन मंदिरों में देवता विराजित हैं। मंदिरों में जितने देवता हैं, उन सब ने मनुष्य के रूप में धरती पर जन्म लिया और समाज में अच्छे काम किए, इसलिए आज हम उन्हें पीढ़ी दर पीढ़ी देवता के रूप में पूज रहे हैं। ठीक उसी प्रकार शहीद भी अपने गांव में पैदा हुए और देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। इसलिए शहीद भी देवताओं से कम नहीं हैं। शहीद देवताओं के समान हैं।' यह बात राज्य सैनिक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष प्रेमसिंह बाजौर ने रविवार शाम को जिला मुख्यालय स्थित सैनिक कल्याण बोर्ड कार्यालय में आयोजित शहीद वीरांगना व परिजन सम्मान समारोह में कही।
27 जिलों की यात्रा कर चुके
कर्नल जगदीश सिंह चौहान ने कहा कि शहीद सम्मान यात्रा अब तक 27 जिलों में पहुंच चुकी है। इन सभी जिलों के शहीदों के आश्रितों से मिलकर उनका सम्मान किया गया व समस्याओं का समाधान किया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा अब तक की सबसे लंबी यात्रा है। इस यात्रा का संपूर्ण विवरण लिम्का बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड में दर्ज होगा। उन्होंने कहा कि 1999 व उसके बाद के शहीदों को सरकार ने बहुत अच्छा पैकेज दिया और मूर्तियां भी लगवाई, लेकिन उससे पहले के करीब 1150 शहीद हैं, जिनको सरकार ने आर्थिक पैकेज नहीं दिया। सरकार में ऐसा प्रावधान भी नहीं है। अब ये मूर्तियां लगाने का निर्णय बाजौर ने लिया है और वे खुद के 25 करोड़ खर्च कर 1150 मूर्तियां लगाएंगे।

शहीदों के आश्रितों को देंगे नौकरी
बाजौर ने कहा कि शहीदों के आश्रितों में से परिवार के एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी दी जाएगी तथा प्रत्येक शहीद की मूर्ति उसके गांव में स्थापित की जाएगी। इसके लिए परिजनों को भूमि का चिह्नीकरण कर स्थानीय उपखंड अधिकारी तथा जिला सैनिक कल्याण अधिकारी को बताना होगा। शेष सम्पूर्ण व्यवस्था राज्य सरकार के स्तर पर की जाएगी। बाजौर ने कहा कि राज्य सरकार ने यह नीतिगत निर्णय लिया है कि शहीद के परिवार का कोई भी सदस्य चाहे वह उसका पौता हो या नाती हो। इनमें से जो भी राज्य सरकार की नौकरी की योग्यता रखता हो, उनमें से एक व्यक्ति को नौकरी दी जाएगी। इसी तरह उसके गांव अथवा उपखंड क्षेत्र में किसी एक सरकारी संस्था का नाम शहीद के नाम से किया जाएगा। परिवार के सदस्य जिला प्रशासन के माध्यम से राज्य सरकार को यह सूचना कर दें कि गांव की शिक्षण संस्था का नाम शहीद के नाम पर करना है। इसके बाद तत्काल सरकार के स्तर पर निर्णय लेकर शहीद के नाम पर नामकरण कर दिया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान भाजपा नेता भागीरथ मेहरिया, कर्नल जगदीश सिंह चौहान तथा जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल पीएस राठौड़ ने शहीदों के परिजनों का शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया तथा उन्हें 1 लाख 50 हजार रुपए के चेक प्रदान किए। इस दौरान शहीद सुगनसिंह, शहीद गुलाब खान, शहीद सुमेरसिंह, शहीद मेहफूल खान, शहीद गोविन्दराम, शहीद लालसिंह एवं शहीद सुरेन्द्रसिंह सहित अन्य शहीदों के परिजनों का सम्मान किया गया।

शहीदों के परिजनों का सम्मान

जायल शहीद सम्मान यात्रा के दौरान रविवार को विभिन्न गांवों में शहीद परिजनों का सम्मान किया गया। सैनिक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष प्रेमसिंह बाजौर ने कहा कि देश की रक्षा के लिए हंसते-हंसते प्राण न्यौछावर करने वाले अमर शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित करने के लिए ही उन्होंने प्रदेशभर में शहीद सम्मान यात्रा शुरू की है। उन्होंने कहा कि यात्रा के माध्यम से परिजनों का सम्मान करने के साथ ही उनकी समस्याओं का समाधान व सैनिक कल्याण बोर्ड की योजनाओं की जानकारी देने का प्रयास किया जा रहा है। रविवार को बाजोर ने ग्राम कठौती में करगिल शहीद मूलाराम बिडियासर के परिजनों का सम्मान किया। इसी प्रकार ग्राम हिरसानी में शहीद भंवरसिंह व सवाईसिंह, राजोद के शहीद बलवीर रेवाड़ के परिजनों का सम्मान किया। समारोह के दौरान विधायक डॉ. मंजू बाघमार, उपखण्ड अधिकारी सुरेन्द्र प्रसाद सहित विभागीय अधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे। ग्राम डिडिया में सम्मान समारोह के दौरान केन्द्रीय राज्य मंत्री सी.आर. चौधरी, सैनिक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष प्रेमसिंह बाजौर व विधायक डॉ. मंजू बाघमार ने डिडिया के शहीद रूपाराम चांगल, रूपाथल के शहीद सीताराम व कसनाऊ के शहीद खुदा बक्श के परिजनों का सम्मान किया।