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हैण्डराइटिंग को लेकर गांधी जी को था मलाल, बोले – अच्छी लिखावट के बिना ​शिक्षा अधूरी

नेशनल हैण्डराइटिंग-डे पर विशेष : मोबाइल के बढ़ते उपयोग व सोशल मीडिया के युग में खत्म-सा हो रहा है हाथ से लिखने का रिवाज

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National Handwriting Day

National Handwriting Day

कहते हैं किसी भी व्यक्ति की लिखावट उसके बारे में काफी कुछ बताती है। लिखावट यानि हैण्डराइटिंग एक ऐसा हुनर है, जो कई लोगों का दिल जीत लेता है। वहीं कुछ लोग इसे लोगों के चेहरे तक की संज्ञा देते हैं, यानि आपकी हैण्डराइटिंग देखकर ही आपके बारे में काफी कुछ विचार बनाया जा सकता है। साक्षरता के मूल में लिखावट की कला निहित है। उचित अक्षर निर्माण में महारत हासिल करने से लेकर उन्हीं अक्षरों से कहानियां बुनने तक, लिखावट प्रत्येक छात्र के लिए एक अनिवार्य कौशल है।
एक समय था जब लोग हाथों से कागज पर लिखकर अपने जज्बात उतारा करते थे। ये जज्बात कभी डायरी में उतरकर बोझिल मन को हल्का करने का काम करते थे, तो कभी चि_ियों के माध्यम से करीबी लोगों तक पहुंचते थे। ऐसे में पढऩे वाले को भी लिखने वाले के हर शब्द में उसके प्यार और भावनाओं का अहसास होता था। लोगों का दायरा बेशक सीमित था, लेकिन दूर रहकर भी दिल मिले रहते थे। लिखते समय लोग हैण्डराइटिंग के प्रति बेहद गंभीर होते थे, क्योंकि पढऩे वाले भी अक्सर इस पर गौर किया करते थे। इसके विपरीत आज सोशल मीडिया के युग में हाथों से लिखने का चलन बिल्कुल समाप्त-सा हो गया है। ऐसे में हैण्डराइटिंग की ओर किसी का ध्यान ही नहीं जाता। आज 23 जनवरी को नेशनल हैण्डराइटिंग-डे के National Handwriting Day मौके पर जानते हैं क्या कहना है इस पर शिक्षकों का-

अच्छी हैण्डराइटिंग वालों की हर जगह होती है तारीफ
पेंटिंग में रुचि रखने वाले राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय तरनाऊ के तृतीय श्रेणी शिक्षक राजाराम टाक का कहना है कि अच्छी हैण्डराइटिंग वाले विद्यार्थी को जहां अंक अधिक मिलते हैं, वहीं उसे कक्षा में भी अधिक तवज्जो मिलती है। सुंदर लिखावट देखकर परीक्षक का भी मूड सही हो जाता है। लिखावट एक प्रकार से व्यक्ति के व्यक्तित्व को प्रदर्शित करती है। टाक ने बताया कि गांधी जी का मानना था कि खराब लेखन को अपूर्ण शिक्षा का संकेत माना जाना चाहिए। टाक का कहना है कि आजकल लोग हैण्डराइटिंग या लेखन आदि की बातों को दकियानूसी बताकर दरकिनार कर देते हैं। परीक्षाएं भी ऑनलाइन होने लगी हैं। लिखने से ज्यादा लोग मोबाइल में टाइप करने में आसानी महसूस करते हैं। ऐसे में हैण्डराइटिंग को लेकर बात करना भी लोगों को रास नहीं आता।

लगातार अभ्यास से सुधार सकते हैं हैण्डराइटिंग
कला के शिक्षक प्रेमचंद सांखला कहते हैं कि बचपन में बच्चों को शिक्षक एवं अभिभावक यही कहते थे कि बेटा इतना सुंदर लिखने का अभ्यास करो कि अखर मोती जैसे नजर आए। परीक्षाओं में हैण्डराइटिंग के भी नंबर हुआ करते थे। राइटिंग को सुंदर बनाने के लिए लोग घंटों पेज पर लिखकर अभ्यास किया करते थे। सांखला का कहना है कि सुंदर लिखावट एक प्रकार से पेंटिंग का ही रूप है। अच्छी हैण्डराइटिंग कुछ बच्चों को गोड गिफ्ट होता है, लेकिन इसे लगातार अभ्यास से सुधारा भी जा सकता है।

सोशल मीडिया का असर ज्यादा
पेशे से अध्यापिका गीता का कहना है कि सोशल मीडिया ने लोगों की लिखने की आदत को बिल्कुल खत्म सा कर दिया है। अब लिखने के लिए पेन उठाओ, तो ज्यादा देर कुछ लिखा नहीं जाता। ऐसे में हैण्डराइटिंग की तो बात ही करना ही जैसे बेमानी है। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव आजकल के बच्चों पर पड़ रहा है। सोशल मीडिया ने बच्चों की भाषा पर पकड़ को कमजोर कर दिया है। हिंदी लिखना तो बच्चे जैसे पसंद ही नहीं करते। अंग्रेजी लिखते भी हैं तो गलत लिखते हैं।

लिखने का चलन कम होने से रिश्तों की डोर कमजोर हुई
स्कूल व्याख्याता नथूराम खुडख़ुडिय़ा का कहना है कि सोशल मीडिया जब आया था तो लगा था कि लोगों से सम्पर्क का दायरा बढ़ेगा और रिश्ते मजबूत होंगे, लेकिन इसने तो रिश्तों के मायने ही बदल दिए। सोशल मीडिया के अतिशीघ्र रिस्पॉन्स ने लोगों की लिखने की आदत को प्रभावित किया। इसके कारण लोगों ने पत्राचार के जरिए हाल चाल पूछना बंद कर दिया। आमने सामने रहकर कोई किसी से बात नहीं करना चाहता। जबकि पहले जब लोग लिखा करते थे, तो फुर्सत निकाल कर एक-एक शब्द को कीमती मानकर अपनी भावनाएं लिखते थे। लिखते समय हैण्डराइटिंग का विशेष खयाल रखा जाता था। पढऩे वाले भी न सिर्फ इस पर गौर करते थे, बल्कि खुलकर प्रशंसा भी किया करते थे। पत्र का लोग बेसब्री से इंतजार करते थे और पढ़ते समय मानो लगता था, कि एक-एक शब्द जीवंत हो गया है। पहले दायरा सीमित था, लेकिन रिश्तों की डोर बहुत मजबूत थी। जैसे जैसे लिखने की आदत खत्म होने लगी, हैण्डराइटिंग पर बात होना भी बंद हो गया। इस कारण रिश्तों की डोर बहुत कमजोर हो गई है।

ऐसे सुधार सकते हैं हैण्डराइटिंग
आज मोबाइल और कंप्यूटर के युग में हैण्डराइटिंग को लेकर अक्सर लोग कहते हैं कि काम तो लैपटॉप पर करना है, हैण्डराइटिंग सुधारने से क्या फायदा, लेकिन फिर भी जीवन के विभिन्न पहलुओं में हैण्डराइटिंग आपको दर्शाती है, व्यक्ति की क्रिएटिविटी उसकी राइटिंग से पता चलती है। बच्चों की हैण्डराइटिंग सुधारने के लिए मुख्य रूप से रोजाना अभ्यास जरूरी है। इसके लिए साफ-सुथरे अक्षर नियंत्रित तरीके से लिखने के लिए हर दिन कुछ समय समर्पित करना होगा। इसी प्रकार लिखते समय अच्छा पॉश्चर (मुद्रा) बनाए रखने से लिखावट की गुणवत्ता में महत्वपूर्ण अंतर आ सकता है। हैण्डराइटिंग के लिए जिन टूल्स का उपयोग करते हैं, वे हैण्डराइटिंग पर प्रभाव डालते हैं। इसी प्रकार पकड़, गति, अक्षर बनाने की प्रक्रिया आदि महत्वपूर्ण है।