नागौर. संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने मंगलवार को सिविल सेवा परीक्षा-2024 का अंतिम परिणाम जारी कर दिया। यूपीएससी के परिणाम में इस बार नागौर जिले के युवाओं ने बेहतर प्रदर्शन किया है। जिले से चार युवाओं का चयन हुआ है। वर्तमान में राष्ट्रीय पुलिस अकादमी हैदराबाद में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे नागौर के शिवांक चौधरी ने लगातार दूसरी बार यूपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण करके रैंक भी सुधारी है। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों से नागौर जिले के युवा यूपीएससी में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
नागौर के शिवांक चौधरी को मिली 471वीं रैंक
मूल रूप से बोड़वा गांव निवासी व वर्तमान में शहर की जाट कॉलोनी में रहने वाले शिवांक चौधरी पुत्र नवीन गोदारा ने इस बार 471 रैंक हासिल की है। शिवांक ने 10वीं तक की शिक्षा नागौर से की। उसके बाद एम्स जोधपुर से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की तथा यूपीएससी सिविल सर्विसेज की तैयारी में जुट गए। पिछले साल शिवांक यूपीएससी में 530वीं रैंक हासिल की। हालांकि वे वर्तमान में राष्ट्रीय पुलिस अकादमी हैदराबाद में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं और उत्तर प्रदेश कैडर आवंटित है, लेकिन इस बार वापस शिवांक ने रैंक सुधारने के लिए मेहनत करके परीक्षा दी, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें 471वीं रैंक मिली है।
मेहनत करने वालों का किस्मत भी साथ देती है : शिवांक
पत्रिका से बात करते हुए शिवांक चौधरी ने बताया कि गत वर्ष यूपीएससी में सलेक्ट होने के बाद उन्हें आईपीएस में यूपी कैडर मिला, लेकिन इस बार उन्होंने वापस लगातार मेहनत करके रैंक सुधारी है। शिवांक ने कहा कि लगातार मेहनत करने वालों के साथ किस्मत भी हो जाती है, मैं इसका उदाहरण हूं। उन्होंने युवाओं से कहा कि मेहनत करोगे तो परिणाम भी आपके अनुरूप आएगा। शिवांक ने अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता नवीन गोदारा, माता ममला व छोटी बहन वैष्णवी को देते हुए कहा कि इन्होंने हमेशा उसका साथ दिया और सपोर्ट किया। उन्होंने बताया कि आईएएस बनने की प्रेरणा अपने दादा भूराराम गोदारा से मिली। अधिकारी बनने के बाद किस क्षेत्र में सुधार करेंगे, इस सवाल का जवाब देते हुए शिवांक ने कहा कि मैं खुद डॉक्टर हूं, इसलिए अब एक ऑफिसर के रूप में जो क्षेत्र मुझे मिलेगा, उसमें मैं हैल्थ सेक्टर में बेहतर काम करने का प्रयास करूंगा। शिवांक के पिता नवीन गोदारा ने कहा कि मेरे लिए यह गर्व का पल है, यदि किसी व्यक्ति में जिद, जुनून और जज्बा हो तो वह कोई भी मंजिल प्राप्त कर सकता है, मेरे बेटे ने मुझे उम्मीद से ज्यादा दिया है।
राज बांगड़ा – रैंक 657
नागौर जिले के सिलारिया गांव के राज बांगड़ा ने यूपीएससी परीक्षा में 657वीं रैंक प्राप्त कर जिले का नाम रोशन किया है। उन्होंने घर पर रहकर स्वयं की मेहनत से तैयारी की और दूसरे प्रयास में यह सफलता हासिल की। राज ने सीनियर सैकंडरी तक की पढ़ाई नागौर में की और शहीद भगत सिंह कॉलेज, दिल्ली से बीए किया। प्रारंभिक असफलता के बाद उन्होंने ऑनलाइन और ऑफलाइन खुद के स्तर पर तैयारी की। उनके पिता पेमाराम व्यवसायी हैं और माता भंवरी चौधरी शिक्षिका हैं। उनकी बड़ी बहन डॉ. तमन्ना चौधरी एसएमएस अस्पताल, जयपुर में पीजी कर रही हैं। राज की सफलता ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणादायक है।
2. दीपेंद्र सिंह – रैंक 644
रियांश्यामदास गांव के दीपेंद्र सिंह रिडमलोत ने यूपीएससी में 644वीं रैंक प्राप्त कर पहला आईएएस बनने का गौरव हासिल किया है। दीपेंद्र के पिता कैप्टन हीरसिंह फौज से रिटायर्ड हैं और परिवार खेती करता है। केंद्रीय विद्यालय से पढ़ाई कर दीपेंद्र ने जोधपुर IIT से इलेक्ट्रिकल में बीटेक किया और 10 माह बेंगलुरु में नौकरी की। पिता के अफसर बनने के सपने को साकार करने के लिए उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू की। पहले तीन प्रयासों में असफलता के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और चौथे प्रयास में सफलता पाई। उनकी यह यात्रा समर्पण और आत्मविश्वास की मिसाल है।
महिपाल बेड़ा – रैंक 772
मोकलपुर गांव के महिपाल बेड़ा ने यूपीएससी परीक्षा में 772वीं रैंक हासिल कर क्षेत्र का नाम रोशन किया। बचपन में पिता रामप्रकाश का निधन हो गया था, जिसके बाद उनके ताऊ नेमारामबेड़ा और बड़े भाई प्रो. घनश्याम ने उनकी शिक्षा की जिम्मेदारी उठाई। महिपाल ने गांव से प्रारंभिक शिक्षा के बाद मेड़ता से स्कूली पढ़ाई की और फिर दिल्ली जाकर सिविल सेवा की तैयारी में जुट गए। कठिन पारिवारिक परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी। उनकी सफलता इस बात का उदाहरण है कि मजबूत इच्छाशक्ति और मार्गदर्शन से कोई भी बाधा पार की जा सकती है।