
Nagaur Railway Station illuminated with Solar Lights
नागौर. जिला मुख्यालय के नागौर उत्तर पश्चिम रेलवे के छोटे-बड़े स्टेशन सौर ऊर्जा से रोशन होंगे। सूरज की किरणों से बिजली बनाने की तकनीक के उपयोग से न केवल पर्यावरण शुद्ध रहेगा बल्कि रेलवे का सालाना बिजली के बिलों पर होने वाला लम्बा-चौड़ा खर्च भी बचेगा। रेलवे बोर्ड की योजनानुसार नागौर रेलवे स्टेशन की छत पर सौलर पैनल स्थापित किए जा चुके हैं। बहुत जल्द 10 किलोवाट पॉवर बिजली का उत्पादन किया जाएगा। स्टेशन पर लाइटों को सौलार पैनल से जोड़कर रोशनी संबंधी जरुरतें पूरी की जाएगी। जोधपुर मंडल के अलाय, भदवासी, चीलो समेत मेड़ता रोड से उदयरामसर तक सभी स्टेशनों पर सौलर पैनल स्थापित किए जाएंगे।
ग्रीन एनर्जी को मिलेगा बढ़ावा
योजना के तहत जोधपुर मंडल के कई स्टेशनों पर अलग-अलग किलोवाट क्षमता वाले सौर ऊर्जा प्लांट स्थापित होंगे। उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल के रेलवे स्टेशन व फाटकों को सौर ऊर्जा से रोशन करने की तैयारियों को लेकर कार्य अंतिम दौर में है। क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों के मद्देनजर ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए रेलवे स्टेशनों व फाटकों पर सोलर पैनल लगाने के लिए अलग-अलग एजेंसियों ने सर्वे का काम कर लिया है। जोधपुर मंडल के स्टेशनों पर सौर उर्जा लाइटें लगाने को लेकर गत वर्ष एक निजी कंपनी ने स्टेशनों का सर्वे किया गया था।
बनेगी दस किलोवॉट बिजली
पहले चरण में प्रदेश के 40 रेलवे स्टेशनों को बिजली के लिए आत्मनिर्भर बनाने की कवायद शुरू हुई है। जानकारों के अनुसार इस महीने के अंत में सोलर प्लेट्स लगाने की कवायद शुरू होगी जो वर्ष के अंत तक बिजली उत्पादन के साथ पूरी होगी। सूत्रों के अनुसार हर स्टेशन पर सोलर संयत्र स्थापित करने में करीब 12 से 13 लाख रुपए की लागत आएगी। प्रायोगिक तौर पर प्रत्येक स्टेशन रोजाना दस किलोवॉट बिजली का उत्पादन करेगा। सोलर प्लेट्स लगाने की कवायद पूरा होने के बाद स्टेशनों से रेलवे को सैकड़ों किलोवाट बिजली प्रतिदिन मिलेगी।
प्रदूषण मुक्त होगी तकनीक
पश्चिमी राजस्थान में सौर ऊर्जा कंपनियों की बिजली उत्पादन में सफलता के बाद रेलवे को तकनीक के साथ जोड़कर बिजली उत्पादन किया जाएगा। सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन के दौरान प्रदूषण नहीं होने से यह तकनीक अधिक कारगर साबित हो रही है। प्रदूषण मुक्त बिजली को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई रेलवे की यह पहल स्टेशनों को बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में कारगर साबित होगी। रेलवे ने बिजली उत्पादन के लिए रेलवे स्टेशनों की खाली छतों का चयन किया है। ऐसे में संयंत्र के लिए अतिरिक्त स्थान की जरुरत भी नहीं पड़ेगी।
Published on:
07 Aug 2018 08:18 pm
