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चिंताजनक : प्रदेश के 29 जिले डार्क जोन में

राहत : पिछले पांच साल में प्रदेश के 19 जिलों में बढ़ा जल स्तर- अलवर में सबसे अधिक गिरा भूजल स्तर, चित्तौडगढ़़ में सबसे अधिक बढ़ा- सरकार कर रही प्रयास, लेकिन सरकारी विभागों में ही व्यर्थ बह जाता है बरसाती पानी

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water crisis in Nagaur

water crisis in Nagaur

नागौर. प्रदेश में भूजल स्तर दिनों-दिन गिरता जा रहा है। पिछले पांच साल में प्रदेश के 14 जिलों में भूजल स्तर घटा है। अंधाधुंध हो रहे भूजल के दोहन का ही परिणाम है कि प्रदेश प्रदेश के 29 जिले अतिदोहन यानी डार्क जोन (भूजल आंकलन रिपोर्ट वर्ष-2017 के अनुसार) की श्रेणी में हैं। हालांकि पिछले पांच साल में प्रदेश के 19 जिलों में भूजल स्तर बढ़ा है, लेकिन 14 जिले ऐसे हैं, जिनका भूजल स्तर गिरा है, इसमें प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, दौसा एवं करौली जिलों में भूजल स्तर का गिरना चिंताजनक है।
राजस्थान में पीने के पानी का 87 प्रतिशत हिस्सा भूजल से ही लिया जाता है। पिछले कुछ सालों से सिंचाई में भी भूजल का उपयोग बहुत तेजी से बढ़ा है। राज्य के सिंचित क्षेत्र का 60 प्रतिशत हिस्सा भूजल से ही कवर होता है। ऐसी स्थिति में भूजल का दोहन बहुत तेजी से हो रहा है। पानी का स्तर जितना नीचे जाता है, पानी में प्रदूषण की मात्रा भी उतनी ही बढ़ती जाती है। राजस्थान के भूजल की तस्वीर देखने से आदमी सिहर जाता है, क्योंकि राज्य के मात्र 12 फीसदी ब्लाक ही सेफ जोन में हैं।

प्रदेश में पिछले पांच सालों में भूजल में आया बदलाव
जिला - भूजल स्तर-2020 - भूजल में औसत बदलाव
अजमेर - 12.72 - 1.14
अलवर - 37.80 - -6.01
बांडवाड़ा - 9.32 - -1.58
बारां - 11.48 - 2.65
बाड़मेर - 36.72 - -0.03
भरतपुर - 17.90 - -1.59
भीलवाड़ा - 11.01 - 3.40
बीकानेर - 70.85 - -3.34
बूंदी - 12.39 - 0.22
चित्तौडगढ़़ - 12.94 - 4.06
चूरू - 42.25 - 0.07
दौसा - 35.27 - -3.82
धौलपुर - 14.47 - -0.02
डूंगरपुर - 10.29 - 0.90
गंगानगर - 11.10 - -0.14
हनुमानगढ़ - 17.61 - -0.61
जयपुर - 34.48 - 2.66
जैसलमेर - 45.61 - 0.42
जालौर - 30.45 - 0.01
झालावाड़ - 10.33 - 0.61
झुंझुनूं - 56.38 - 0.47
जोधपुर - 50.95 - 2.84
करौली - 23.94 - -2.66
कोटा - 11.09 - 2.73
नागौर - 59.52 - -2.93
पाली - 15.03 - 2.20
प्रतापगढ़ - 13.13 - -0.35
राजसमंद - 10.42 - 3.25
सवाई माधोपुर - 14.37 - 3.37
सीकर - 51.09 - -3.25
सिरोही - 17.75 - 0.10
टोंक - 10.85 - -0.23उदयपुर - 10.07 - 0.67
नोट - भूजल स्तर के आंकड़े जमीनी स्तर से नीचे मीटर में है।

प्रदेश के ये जिले हैं डार्क जोन में
1. अजमेर, 2. अलवर, 3. बारां, 4. बाड़मेर, 5. भरतपुर, 6. भीलवाड़ा, 7. बीकानेर, 8. बूंदी, 9. चितैडगढ़़, 10. चूरू, 11. दौसा, 12. धौलपुर, 13. जयपुर, 14. जैसलमेर, 15. जालौर, 16. झालावाड़, 17. झुंझुनू, 18. जोधपुर, 19. करौली, 20. कोटा, 21. नागौर, 22. पाली, 23. प्रतापगढ़, 24. राजसमन्द, 25. सवाई माधोपुर, 26. सीकर, 27. सिरोही, 28. टोंक, 29. उदयपुर।

सरकार ये कर रही प्रयास
प्रदेश में भूजल स्तर में आ रही कमी व इसके सुधार के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों को लेकर जायल विधायक डॉ. मंजू मेघवाल द्वारा विधानसभा में लगाए गए प्रश्न के जवाब में मिली जानकारी के अनुसार राज्य सरकार प्रदेश में तेजी से गिर रहे भू जल स्तर को बढ़ाने के लिए सतत् प्रयासरत है। विगत पांच वर्षों से राज्य सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा भूजल प्रबंधन के कार्य किए जा रहे हैं। इसके अन्तर्गत जल संरक्षण एवं संवर्धन संबंधी संरचनाओं का निर्माण यथा फार्म पोण्ड, एनीकट, कूप पुनर्भरण, तालाबों का पुनरूद्धार आदि कार्य किए जा रहे हैं। साथ ही बूंद-बूंद सिंचाई एवं फव्वारा पद्धति से खेती करने को प्रोत्साहित करने के साथ ही जनजागरण कार्यक्रमों से भूजल मितव्यवता के लिए आमजन को जागरूक किया जा रहा है। सरकार ने बताया कि भू जल स्तर आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर गत पांच वर्षों (2015-2019) के जिलेवार औसत भूजल स्तर की तुलना में वर्ष 2020 के वर्षा पूर्व के भूजल स्तर में 19 जिलों में सुधार दर्ज किया गया है।

ऐसे नापते हैं भूजल का औसत स्तर
किसी जिले का भूजल स्तर नापने के लिए किसी एक जगह का स्तर नहीं नापा जाता, बल्कि भूजल विभाग ने अलग-अलग स्थान पर कुआं को चिह्नित कर रखा है। जैसे नागौर के 14 ब्लॉक में 264 कुआं को चिह्नित कर रखा है, जिनके भूजल स्तर का औसत निकाला जाता है। नागौर के लाडनूं क्षेत्र के कसुम्बी का भूजल स्तर 6-7 मीटर ही है, जबकि पश्चिमी दिशा में अंतिम छोर पर बसे नागड़ी गांव का भूजल 165 मीटर के करीब है। ऐसे में जब 264 कुआं का औसत निकाला जाता है तो 59.52 मीटर ग्राउण्ड लेवल से नीचे है।

नागौर-लाडनूं को छोडकऱ सभी अतिदोहित
नागौर जिले की नागौर व लाडनूं पंचायत समिति के अलावा सभी पंचायत समितियां अतिदोहित की श्रेणी में आ चुकी है। इन दोनों में खारा पानी होने व दोहन कम होने से सेमी क्रिटिकल की स्थिति में है। आमजन को चाहिए कि भूजल का कम से कम दोहन करें।
- आरके गोदारा, जिला प्रभारी, भूजल विज्ञान, नागौर